कोरोना की चौथी लहर को लेकर क्या कहते हैं भारतीय वैज्ञानिक

जुबिली न्यूज़ ब्यूरो

नई दिल्ली. भारत में कोरोना महामारी के मामलों में कमी आ गई है. लेकिन मरने वालों की संख्या अभी भी रोजाना 100 के पार चली जाती है. कोरोना की तीसरी लहर ओमिक्रान के रूप में आई थी. ओमिक्रान का असर धीरे-धीरे कमज़ोर पड़ने लगी है. तीसरी लहर के कमज़ोर पड़ने के साथ ही लोगों की लापरवाही भी तेज़ी से बढ़ने लगी है. बढ़ती लापरवाही के बीच चर्चा यह शुरू हो गई है कि जून तक भारत में चौथी लहर शुरू हो जायेगी.

भारत में ओमिक्रान जिस रफ्तार में घट रहा है उससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों में भारत कोरोना मुक्त हो जायेगा. चौथी लहर के मद्देनज़र हालांकि देश में वैक्सीनेशन का काम तेज़ी से चल रहा है. सरकारी आंकड़ों का कहना है कि देश में 80 फीसदी लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज़ लगा दी गई हैं.

इंडियन काउन्सिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (ICMR) का इस मामले में कहना है कि भारत में कोरोना की तीन लहरें आ चुकी हैं. हर लहर में भारत को बदलाव दिखा है. अब जब तीसरी लहर कमज़ोर पड़ रही है तब चौथी लहर के बारे में जताई जा रही आशंका पर आईसीएमआर का कहना है कि अभी इस बारे में कुछ भी कहना बहुत जल्दबाजी हो जायेगी.

भारतीय वैज्ञानिक कोरोना को लेकर दुनिया में उसके प्रभाव पर लगातार रिसर्च में लगे हैं इन वैज्ञानिकों ने इस बात से इनकार नहीं किया है कि दुनिया में इस महामारी की चौथी और पांचवीं लहर भी आई थी लेकिन साथ ही भारतीय वैज्ञानिक यह भी खुलासा करते हैं कि दुनिया में फैली कोरोना महामारी का आख़री स्वरूप ओमिक्रान ही था. भारत में ओमिक्रान का असर तेज़ी से घट रहा है. लोगों की इम्युनिटी वैक्सीनेशन से स्ट्रांग हुई है. ऐसे में इस बात का दावा नहीं किया जा सकता कि भारत में चौथी लहर आयेगी.

वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना ने जिस तरह से अपने रूप बदले हैं उसमें यह गारंटी तो नहीं की जा सकती कि अब उसका खतरा पूरी तरह से टल गया है लेकिन जिस तरह से कोरोना के मामलों में कमी आ रही है उसमें यह दावा भी नहीं किया जा सकता कि इसकी चौथी लहर आयेगी ही. हालांकि वैज्ञानिकों ने यह ज़रूर कहा है कि अगर कोरोना की चौथी लहर आई भी तो इतनी प्रभावी नहीं होगी.

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