प्रधानमंत्री बने तो क्या करेंगे राहुल गांधी?

जुबिली न्यूज डेस्क

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष व सांसद राहुल गांधी ने कहा कि अगर मैं देश का प्रधानमंत्री बना, तो मैं विशुद्ध रूप से विकास केंद्रित नीतियों की तुलना में रोजगार के अवसर पैदा करने पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित करूंगा।

राहुल ने कहा, “मैं सिर्फ ‘विकास केंद्रित’  आइडिया से ‘रोजगार केंद्रित’ आइडिया की ओर बढूंगा। हमें विकास (ग्रोथ) की जरूरत है, लेकिन उत्पादन और रोजगार पैदा करने के साथ-साथ हमें वैल्यू एडिशन पर भी जोर देना होगा।”

कांग्रेस नेता ने यह बातें अमेरिका के जाने-माने शिक्षण संस्थान ‘हार्वर्ड कैनेडी स्कूल’  के छात्रों के साथ ऑनलाइन बातचीत के दौरान एक प्रश्न के जवाब में कही।

जब राहुल से पूछा गया कि अगर वह भारत के प्रधानमंत्री बनते हैं तो नीतियां बनाते समय वे किस चीज को प्राथमिकता देंगे?

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इस सवाल के जवाब में कांग्रेस सांसद राहुल ने कहा, “वर्तमान में, अगर भारत की ग्रोथ (वृद्धि) को देखें तो हमारी ग्रोथ और रोजगार-निर्माण के बीच जैसा संबंध होना चाहिए, वैसा नहीं है, जबकि चीन इस मामले में हमसे काफी आगे है। मैं कभी ऐसे चीनी नेता से नहीं मिला, जो रोजगार के सृजन को समस्या बताता हो। इसलिए मेरी 9 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर में दिलचस्पी नहीं है, अगर मेरे यहां रोजगार ही ना हो।”

इस ऑनलाइन संवाद की मेजबानी अमेरिका के पूर्व राजनयिक निकोलस बर्न्स कर रहे थे। निकोलस फिलहाल हार्वर्ड कैनेडी स्कूल में प्रोफेसर हैं।

इस संवाद के दौरान राहुल ने भारत में संस्थागत ढांचे पर सत्तापक्ष की तरफ से पूरी तरह कब्जा कर लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि निष्पक्ष राजनीतिक मुकाबला सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार संस्थाएं अपेक्षित सहयोग नहीं दे रही हैं।

कांग्रेस की चुनावी असफलता और आगे की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर राहुल गांधी ने कहा, “हम आज ऐसी अलग स्थिति में हैं जहां वो संस्थाएं हमारी रक्षा नहीं कर पा रहीं, जिन्हें हमारी रक्षा करनी है। जिन संस्थाओं को निष्पक्ष राजनीतिक मुकाबले के लिए सहयोग देना है, वो अब ऐसा नहीं कर रही हैं।”

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इसके साथ ही उन्होंने यह दावा किया कि सत्तापक्ष से लोगों का मोहभंग हो रहा है और यह कांग्रेस के लिए एक अवसर भी है।

अर्थव्यवस्था को गति देने के उपाय से जुड़े सवाल पर राहुल गांधी ने कहा, ”अब सिर्फ एक ही विकल्प है कि लोगों के हाथों में पैसे दिये जायें। इसके लिए हमारे पास ‘न्याय’ का विचार है।”

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कांग्रेस नेता ने चीन के बढ़ते वर्चस्व की चुनौती के बारे में पूछे जाने पर कहा कि भारत और अमेरिका जैसे देश लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ ही समृद्धि और विनिर्माण क्षेत्र के विकास से चीन की चुनौती से निपट सकते हैं।

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