होली से पहले यूपी के इस जिले में मस्जिदों को क्यों ढका जा रहा है

जुबिली न्‍यूज डेस्‍क

कोरोना वायरस के संकट के बीच देश में होली के त्योहार की तैयारियां शुरू हो गई हैं। जिस तरह उत्तर प्रदेश के मथुरा के बरसाना और नंदगांव की ‘लट्ठमार होली’ दुनिया भर में मशहूर है, उसी तरह शाहजहांपुर जिले में हर साल होली के दिन खेली जाने वाली ‘जूता मार होली’ की भी एक अलग पहचान है। शाहजहांपुर में 18वीं सदी से ही जूता मार होली मनाई जाती है।

अलीगढ़: होली पर सांप्रदायिक सौहार्द्र बनाए रखने के लिए ढकी गई मस्जिद -  Aligarh: Halwaiyan Masjid has been covered ahead of the Holi festival upat

शाहजहांपुर में होली का जश्न मनाते हुए एक जुलूस निकाला जाता है, जिसमें लाट साहब (अंग्रेजी हुकूमत के अफसर) के पुतले को एक बैलगाड़ी में बैठाकर उसपर जूते बरसाए जाते हैं। इसी जुलूस को लेकर प्रशासन ने खास तैयारी की है। जुलूस के रास्ते में जहां पर मस्जिद पड़ती हैं, उनके आस-पास सुरक्षा बढ़ा दी गई है और हर तरह से नज़र रखी जा रही है। यहां प्रशासन ने इलाके में करीब 40 मस्जिदों को प्लास्टिक की शीट से ढक दिया है, ताकि होली के दिन यहां कोई अप्रिय घटना ना हो पाए।

शाहजहांपुर के एसपी संजय कुमार के मुताबिक, जुलूस के रास्ते में पड़ने वाली मस्जिदों को प्लास्टिक की शीट से ढका जा रहा है। ताकि कोई भी व्यक्ति जुलूस के वक्त इनपर रंग ना फेंके, जिससे माहौल बिगड़ने की स्थिति बने। एसपी के मुताबिक, कुछ मस्जिदों को ढक दिया गया है जबकि सभी को 28 मार्च से पहले ही ढक दिया जाएगा।

एसपी के मुताबिक, जुलूस के मद्देनज़र रूट पर अलग-अलग हिस्सों में बैरिकेडिंग की गई है जबकि कुछ रास्तों को बंद कर दिया गया है। रूट में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और ड्रोन कैमरे से भी नज़र रखी जा रही है।

आपको बता दें कि शाहजहांपुर में 18वीं सदी से ही जूता मार होली मनाई जाती है। तब अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ गुस्सा प्रकट करने के लिए स्थानीय लोगों ने इसकी शुरुआत की थी। जब 1947 में देश को आजादी मिली, तब भी इस ट्रेडिशन को जारी रखा गया। जूता मार होली को दो हिस्सों में मनाया जाता है, जहां बड़े लाट साहब और छोटे लाट साहब का जुलूस निकाला जाता है।

 

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