264 करोड़ में बना पुल, 16 जून को उद्घाटन और 15 जुलाई को हुआ ध्वस्त

जुबिली न्यूज डेस्क

बिहार के गोपालगंज में एक ऐसा मामला सामने आया है जो भ्रष्टाचार की कहानी बता रहा है। यह बता रहा है कि कैसे जनता की गाढ़ी कमाई विकास के नाम पर लूट-खसोट के भेट चढ़ गई। जी हां, गोपालगंज में 264 करोड़ की लागत से तैयार हुआ सत्तरघाट महासेतु उद्घाटन के एक माह बाद ही पानी के दबाव से ध्वस्त हो गया।

गोपालगंज को चंपारण से और इसके साथ तिरहुत के कई जिलों से इस माह सेतु को जोडऩे का यह अतिमहत्वकांक्षी पुल था। पुल का एक हिस्सा ध्वस्त हो जाने की वजह से मुजफ्फरपुर, मोतिहारी जाने का लिंक टूट गया है। टूटे पुल को लोग देखने आ रहे हैं। यह चर्चा का विषय बना हुआ है।

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जो पुल टूटा है उसका उद्घाटन 16 जून को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किए थे। यह पुल इतना कमजोर था कि गंडक नदी के तेज बहाव का दबाव झेल नहीं सका और उद्घाटन के एक महीने बाद ही ध्वस्त हो गया, जिस वजह से उत्तर बिहार के कई जिलों का संपर्क टूट गया है।

एक न्यूज एजेंसी की खबर के अनुसार एक स्थानीय ने बताया कि गोपालगंज में पानी के तेज बहाव के चलते एक महीने पहले जिस पुल का उद्घाटन हुआ था उसका एक हिस्सा बह गया। इससे मुजफ्फरपुर, मोतिहारी जाने का लिंक टूट गया है। पुल बैकुंठपुर के फैजुल्लाहपुर में टूटा है।

 

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फिलहाल इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर तंज कसा है। तेजस्वी यादव ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा है-“8 वर्ष में 263.47 करोड़ की लागत से निर्मित गोपालगंज के सत्तर घाट पुल का 16 जून को नीतीश जी ने उद्घाटन किया था आज 29 दिन बाद यह पुल ध्वस्त हो गया। खबरदार! अगर किसी ने इसे नीतीश जी का भ्रष्टाचार कहा तो? 263 करोड़ तो सुशासनी मुंह दिखाई है। इतने की तो इनके चूहे शराब पी जाते है।”

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक bjp विधायक मिथिलेश तिवारी ने इस मामले की जानकारी बिहार के पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव को दी है। उन्होंने कहा है कि इस मामले की जांच करने के लिए वह आगामी 4 अगस्त को शुरू होने वाले विधानसभा में उठाएंगे।

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