भारत-चीन झड़प : देश ने खोये अपने 20 सपूत!

जुबिली न्यूज डेस्क

लगभग 40 दिनों से लदाख में भारत और चीन की सेनाओं के बीच चल रहे गतिरोध के बीच एक बुरी खबर आई है। खबरों के मुताबिक लदाख की गलवान घाटी में दोनों सेनाओं के बीच मुठभेड़ हुई है जिसमें  20 सैनिक शहीद हुए हैं। इससे पहले मंगलवार को दोपहर में एक अफसर और दो जवानों के शहीद होने की जानकारी सामने आई थी, लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस झड़प में 20 सैनिक शहीद हुए हैं।

40 सालों में ऐसा पहला मौका माना जा रहा है जब दोनों देशों के बीच असल नियंत्रण रेखा पर जानें गई हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह घटना सोमवार रात को हुई है।

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कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि मुठभेड़ में चीनी सेना के सिपाही भी मारे गए। खबर के मुताबिक चीन के पांच जवान मारे गए हैं।हालांकि यह अभी पूरी तरह से साफ नहीं हो पाया है कि मौके पर गोलियां चली थीं या सिपाही हाथापाई में ही मारे गए। बताया जा रहा है कि तनाव को कम करने के लिए दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक दोनों स्तर पर बातचीत चल रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चीन ने आरोप लगाया है कि भारतीय सिपाही वास्तविक नियंत्रण रेखा पार कर चीन के इलाके में घुस गए थे जिसके बाद दोनों देशों के सिपाहियों के बीच मुठभेड़ हुई। वहीं भारत के रक्षामंत्री रक्षा-मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश-मंत्री एस जयशंकर ने चीफ ऑफ डिफेन्स स्टाफ जनरल बिपिन रावत और तीनों सेना प्रमुखों के साथ बैठक की है, जिसमे स्थिति का आकलन किया गया और आगे की रणनीति पर विचार किया गया।

भारत और चीन के बीच पिछले पांच मई से लदाख में कम से कम चार अलग अलग इलाकों में गतिरोध चल रहा है। सबसे पहले गतिरोध की खबर पैंगोंग झील से आई थी जहां दोनों सेनाओं के बीच हाथापाई की अनौपचारिक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। उसके बाद से तना-तनी अभी तक बनी हुई है।

हालांकि पिछले कुछ दिनों से ऐसी खबरें आ रही थीं कि दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर पर बातचीत चल रही थी। यह भी कहा जा रहा था कि गलवान घाटी में दोनों सेनाएं अपनी अपनी जगहों से पीछे हटने लगी है। वहीं ऐसी खबरों के बीच ऐसी भी खबरें चर्चा में थी कि चीन के सैनिक बड़ी संख्या में भारतीय इलाके में घुस आए हैं और वो पीछे नहीं हट रहे हैं।

फिलहाल ताजा हालात पर भी जानकारों का कहना है कि स्थिति अत्यंत संवेदनशील बन चुकी है। भारतीय सेना से सेवानिवृत्त अधिकारी और रक्षा मामलों के विशेषज्ञ अजय शुक्ल ने ट्वीट कर के कहा कि ये बेहद दुखद इसलिए भी है क्योंकि गलवान वैली वो इलाका है जो 1962 से भारत के नियंत्रण में रहा है।

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