10 सरकारी बैंकों के मर्जर के बाद ग्राहकों पर क्‍या असर पड़ेगा

न्‍यूज डेस्‍क

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकारी बैंकों के प्रस्तावित विलय को लेकर कहा कि इसका प्रोसेस तय समय के अनुसार ही आगे बढ़ रहा है। सरकार ने 10 सरकारी बैंकों को मिलाकर चार बड़े बैंक बनाने का फैसला किया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि बैंक विलय को लेकर कोई अनिश्चितता नहीं है और प्रक्रियाएं निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ रही हैं। ये बातें वित्त मंत्री ने सरकारी बैंकों के प्रमुखों के साथ हुई समीक्षा बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही।

आपको बता दें कि सरकार ने पिछले साल अगस्त 2019 में देश के 10 बड़े सरकारी बैंकों का चार बैंकों में मर्जर करने का फैसला लिया था। यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और ओरिएंटंल बैंक ऑफ कॉमर्स का विलय पंजाब नेशनल बैंक में होगा।

पीएनबी विलय के बाद दूसरा सबसे बड़ा बैंक होगा। इसके अलावा सिंडिकेट बैंक का केनरा बैंक और इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक के साथ विलय होगा। इसी प्रकार आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के साथ विलय होगा।

इससे ग्राहकों पर क्या असर होगा-

  • ग्राहकों को नया अकाउंट नंबर और कस्टमर आईडी मिल सकता है।
  • जिन ग्राहकों को नए अकाउंट नंबर या IFSC कोड मिलेंगे, उन्हें नए डिटेल्स इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, इंश्योरंस कंपनियों, म्यूचुअल फंड, नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) आदि में अपडेट करवाने होंगे।
  • SIP या लोन EMI के लिए ग्राहकों को नया इंस्ट्रक्शन फॉर्म भरना पड़ सकता है।
  • नई चेकबुक, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड इशू हो सकता है।
  • फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) या रेकरिंग डिपॉजिट (आरडी) पर मिलने वाले ब्याज में कोई बदलाव नहीं होगा, जिन ब्याज दरों पर व्हीकल लोन, होम लोन, पर्सनल लोन आदि लिए गए हैं, उनमें कोई बदलाव नहीं होगा।
  • कुछ शाखाएं बंद हो सकती हैं, इसलिए ग्राहकों को नई शाखाओं में जाना पड़ सकता है। मर्जर के बाद एंटिटी को सभी इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग सर्विस (ECS) निर्देशों और पोस्ट डेटेड चेक को क्लीयर करना होगा।

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