यूरोपीय संघ से बाहर होने वाला पहला देश बना ब्रिटेन

न्यूज़ डेस्क

यूरोपीय संघ से ब्रिटेन ने अपने आपको अलग कर लिया है। ब्रिटेन करीब 47 साल तक यूरोपीय संघ का सदस्य रहा है लेकिन बीति रात यानी 31 जनवरी को ब्रिटेन इससे अलग हो गया।

इस फैसले के बाद ब्रिटेन यूरोपीय संघ से बाहर होने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। ब्रेक्जिट के ठीक पहले ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन ने इस ऐतिहासिक पल को एक नई सुबह करार दिया।

उन्होंने कहा, ‘आज रात हम यूरोपीय संघ से अलग हो गए और ब्रिटेन के लिए यह एक ऐतिहासिक मौका है। आइए हम एक साथ मिलकर ब्रेक्जिट से उत्पन्न होने वाले सभी अवसरों का भरपूर लाभ उठाएंगे, इससे पूरे ब्रिटेन की क्षमता उजागर होगी।’

गौरतलब है कि ब्रेक्ज़िट समझौते के पक्ष में यूरोपीय संसद में 621 मत पड़े थे, जबकि 49 मत विरोध में पड़े थे। इसी के साथ ईयू से ब्रिटेन की विदाई को मंज़ूरी दे दी गई थी। इससे पहले इस पर काफी बहस भी हुई।

बहस के दौरान कई मिली-जुली टिप्पणियां की गईं, जिसमें कुछ ने देश को आगामी व्यापार वार्ता के दौरान बहुत अधिक रियायतें नहीं मिलने की चेतावनी दी। इस समझौते को अंतिम रूप पिछले साल ही तैयार किया गया था।

भारत पर पड़ेगा असर

यूरोपियन यूनियन से ब्रिटेन के अलग होने से भारतीय कंपनियों पर भी असर पड़ेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ब्रिटेन में 800 से ज्यादा भारतीय कंपनियां हैं, जो करीब सवा लाख लोगों को रोजगार देती हैं। इनमें से आधे से अधिक लोग केवल टाटा समूह की ही पांच कंपनियों में काम करते हैं।

ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन की करेंसी पाउंड में भी गिरावट हो सकती है। ऐसे में जो भारतीय कंपनियों का ब्रिटेन से अपने कारोबार कर रही हैं। उनके मुनाफे पर असर पड़ना तय है।

क्या है ब्रेक्जिट

ब्रेक्जिट यानी ब्रिटेन एक्जिट (ब्रिटेन का यूरोपीय यूनियन से बाहर होना)। यूरोपीय यूनियन में 28 यूरोपीय देशों की आर्थिक और राजनीतिक भागीदारी है। यूरोपीय संघ का निर्माण द्वितीय विश्व युद्ध के बाद आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए किया गया था। इसके पीछे यह सोच थी कि जो देश एक साथ व्यापार करेंगे वो एक दूसरे के खिलाफ युद्ध करने से बचेंगे।

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