वकील-पुलिस विवाद : कहीं PAK की भारत में हिंसा फैलाने की साजिश तो नहीं

जुबिली न्यूज़ डेस्क

तीस हजारी कोर्ट में वकीलों के विवाद से गुस्साए पुलिसवालों का करीब 11 घंटे चला धरना खत्म हो गया। हालांकि, पुलिसकर्मी अब मुख्यालय से हटकर इंडियागेट पहुंचने लगे हैं। वहां पर धरना शुरू हो गया है। मिली जानकारी के अनुसार पुलिसकर्मियों की सभी मांगो को मान लिया गया है।

बता दें कि दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच हुए झड़प की वजह से आज दिल्ली पुलिसकर्मी आज सुबह से ही प्रदर्शन कर रहे थे। तीस हजारी कोर्ट परिसर में पार्किंग को लेकर वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हुई हिंसा के बाद बौखलाए हजारों पुलिसकर्मियों ने मंगलवार को आईटीओ स्थित पुलिस मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन करते हुए वकीलों पर कार्रवाई की मांग की है।

पुलिसकर्मियों ने कहा कि पुलिसकर्मियों की पिटाई होने के बावजूद उन पर ही कार्रवाई किया जाना शर्मनाक है। दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक ने प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों को संबोधित किया। दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक ने पुलिसकर्मियों से काम पर लौटने की अपील की है।

वाया सोशल मीडिया : कहीं PAK की भारत में हिंसा फैलाने की साजिश तो नहीं

वहीं इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर सुबह से लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। ट्विटर पर #LawyersVsDelhiPolice ट्रेंड कर रहा है। कुछ लोग वकीलों द्वारा पुलिसकर्मियों को पीटने को गलत बता रहे हैं तो कुछ लोग पुलिसकर्मियों द्वारा आम जनता से की जाने वाली अभद्रता को याद दिला रहे हैं।

प्रणाम नाम के एक ट्विटर हैंडल से पोस्ट किया गया है कि, वक़्त आ गया है, दिल्ली में मोमबत्तियाँ बैन कर देनी चाहिए!

कृष्ण प्रजापति नाम के यूजर ने सवाल करते हुए पूछा है कि, एक ओर जहां श्रीराममन्दिर विषय में फैसले को लेकर लगभग सारा भारत सुरक्षा को लेकर अलर्ट जैसी स्थिति में शायद? दूसरी ओर पाक का भारत में हिंसा-आतंक को फैलाने की हमेशा साजिश का प्रयास शायद? जब किसी कारण से पुलिस हड़ताल पर चली जाए या सुरक्षा कमजोर हो जाए तो फायदा किसे मिलेगा?

रोहित शर्मा नाम के एक यूजर ने दो फोटो शेयर करते हुए लिखा है कि एक फोटो में जेहादी सीआरपीएफ के जवानों को पीट रहे हैं जबकि दूसरी में वकील पुलिसकर्मियों को पीट रहे हैं। क्या फर्क है?

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