अब मोदी सरकार की बैंकिंग सर्जिकल स्ट्राइक

स्पेशल डेस्क

नई दिल्ली। भारतीय इकोनॉमी को लेकर हाल फिलहाल में तमाम बातें कही जा रही हो लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसे पटरी पर लाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है। कुछ दिन पूर्व पत्रकारों से बातचीत कर भारतीय इकोनॉमी को लेकर उठे सवालों को लेकर अपनी सफाई दी थी तो दूसरी ओर शुक्रवार को एक बार फिर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय इकोनॉमी को लेकर कुछ कड़े उठाये हैं। उन्होंने बैंकिंग सेक्टर को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए पंजाब नेशनल बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और ओरिएंटल बैंक के विलय करने की बात कही है।

इसके साथ ही पीएनबी देश का दूसरा बड़ा सरकारी बैंक के रूप सामने आ गया है। इसके अलावा निर्मला सीतारमण ने केनरा बैंक और सिंडिकेट बैंक के विलय करने की बात कही है। इतना ही नहीं यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक का भी विलय होगा। इसके अलावा इंडियन बैंक में इलाहाबाद बैंक के विलय का ऐलान किया गया। इस विलय के बाद देश को 7वां बड़ा पीएसयू बैंक मिलेगा।

उधर यूपी यूनिट आयबॉक के सहायक महासचिव  सौरभ श्रीवास्तव ने सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध किया है।  उन्होंने जुबिली पोस्ट से बातचीत में कहा कि सरकार जनता का काम नहीं करना चाहती है। इस वजह से इस तरह का फैसला कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार इस फैसले से कर्मचारियों के साथ ग्राहकों को भी दिक्कत होगी। पुराने ग्राहकों पर असर पड़ेगा।

इससे एक ही प्रदेश में अलग-अलग बने बैंक के मुख्यालय और प्रशासनिक कार्यालयों में कर्मचारियों का ट्रांसफर और छटनी होगी। इतना ही नहीं बैंक में जो लोग छोटे स्तर पर काम कर रहे हैं उनका जीवन भी प्रभावित होगा। उनके अनुसार बैंक में जो फोटोकॉपी या फिर चाय या समोसा बेचते हैं उनका रोजगार बैंक विलय से खत्म हो जायेगा। इससे बैंकों को फायदा नहीं, बल्कि नुकसान होगा। बैंकों के विलय के परिणाम अच्छे नहीं होंगे। पहले से बैंकों की हालत खराब है। सरकार जनता काम नहीं करना चाहती है और बेरोजगारी दूर करना चाहती है।

निर्मला सीतारमण के ऐलान के बाद ये होगी स्थिति

1. पंजाब नेशनल बैंक

-यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया

-ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स

2. केनरा बैंक

सिंडिकेट बैंक

3. इलाहाबाद बैंक

इंडियन बैंक

4. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया

आंध्रा बैंक

कॉरपोरेशन बैंक

5. बैंक ऑफ इंडिया

6. बैंक ऑफ बड़ौदा

7.बैंक ऑफ महाराष्?ट्र

8.सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया

9. इंडियन ओवरसीज बैंक

10.पंजाब एंड सिंध बैंक

11.स्?टेट बैंक ऑफ इंडिया

12.यूको बैंक
उधर सरकार के इस कदम पर ऑल इंडिया बैंक ऑफिसस एसोसिएशन ने विरोध किया है।

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