‘मनुज नहीं होत है, समय होत बलवान’

न्यूज डेस्क

मनुज नहीं होत है, समय होत बलवान। ये कहावत भी है और जीवन का एक बहुत बड़ा सत्य भी। कहते है कि आदमी को वक्त से हमेशा डरना चाहिए। कौन जाने किस घड़ी वक्त का बदले मिजाज। अब देखिये कांग्रेस के कद्दावर नेता व पूर्व गृहमंत्री पी.चिदंबरम वक्त के मारे भागे भागे घूम रहे है। उन्हें घुमा रहे है गृह मंत्रालय के सीबीआई और प्रवर्तन निर्देशालय जिनके वे कभी आका हुआ करते थे। अब वक्त का दूसरा करिश्मा देखिये कि जिन अमित शाह को चिदंबरम साहब के शासन में जेल जाना पड़ा था अब वही अमित शाह चिदम्बरम साहब को जेल भेजवाने पर अमादा है।

कांग्रेस पार्टी समेत अन्य विपक्ष सरकार पर एजेंसियों का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगा रहा है। अगर इस कहानी के फ्लैशबैक में जाएं और समय के चक्कर को घुमाएं तो कई साल पहले विपक्षी पार्टी के तौर पर बीजेपी भी यूपीए सरकार पर ऐसा ही आरोप लगाती थी और तब गृह मंत्री पी. चिदंबरम हुआ करते थे।

यूपीए सरकार में पी. चिदंबरम के गृह मंत्री के कार्यकाल के दौरान सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामला चरम पर था और इसी मामले को लेकर अमित शाह पर कार्रवाई की गई थी. 25 जुलाई 2010 को सीबीआई ने अमित शाह को गिरफ्तार कर लिया था और जेल भेज दिया था। चिदंबरम 29 नवंबर, 2008 से 31 जुलाई 2012 तक देश के गृह मंत्री रहे थे। अब समय बदला है और अमित शाह देश के गृह मंत्री हैं। सीबीआई व ईडी पी. चिदंबरम को जेल में डालने के लिए तैयारी में हैं।

अमित शाह के पीछे पड़ी थी सीबीआई

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान 25 जुलाई 2010 को सीबीआई ने अमित शाह को गिरफ्तार किया था। इसके बाद वो तीन महीने तक सलाखों के पीछे रहे। साथ ही उन्हें दो साल तक गुजरात से बाहर रहने का आदेश दिया गया। इसके बाद गुजरात की हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर, 2010 को उनको बेल दी। उनकी गिरफ्तारी के बाद बीजेपी भड़की हुई थी और भाजपाईयों ने यूपीए सरकार पर बदले की कार्रवाई करने का आरोप लगाया था।

अमित शाह को 2012 तक गुजरात के बाहर ही रहना पड़ा था। उसके बाद साल 2012 में होने वाने विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें राहत मिली और सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें गुजरात जाने की इजाजत दी। हालांकि, सीबीआई की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने इस केस की सुनवाई को गुजरात से बाहर शिफ्ट कर मुंबई भेज दिया।

बाद में इस मामले की मुंबई की अदालत में लंबी सुनवाई के बाद साल 2015 में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। उस वख्त केंद्र में बीजेपी की सरकार आ चुकी थी।

आपको बता दें कि पी. चिदंबरम पर INX मीडिया मामले में रिश्वत लेने का आरोप है। मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत देने से मना कर दिया था इसके बाद से उनपर गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है। हालांकि चिदंबरम अग्रिम जमानत लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट की शरण में हैं।

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