कर्नाटक में मध्यावधि चुनाव की चर्चा क्यों हो रही है ?


पॉलिटिकल डेस्क।

लोकसभा चुनाव के बाद से कर्नाटक में मध्यावधि चुनाव को लेकर चर्चाओं का बाजार गरमाया हुआ है। भाजपा की कर्नाटक इकाई के प्रमुख बी एस येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी के ‘ग्राम वस्तव्य’ कार्यक्रम को “नाटक” बता कर सोमवार को खारिज किया और कहा कि लोगों को कांग्रेस एवं जद (एस) के नेताओं के बीच के “रोजाना के झगड़ों” से निजात चाहिए। इस पर कांग्रेस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कहा, “कोई मध्यावधि चुनाव होने नहीं जा रहा।”

इससे कुछ दिन पहले भी पूर्व प्रधानमंत्री एवं जद(एस) प्रमुख एच डी देवगौड़ा ने मध्यावधि चुनाव होने की बात कह कर कांग्रेस में खलबली मचा दी थी।

गौरतलब है कि कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन में खटपट की खबरें आम हैं। दोनों पार्टियां कई बार आरोप लगा चुकी हैं कि बीजेपी राज्य में तख्तापलट करने की हर मुमकिन कोशिश कर रही है।

कुछ वक्त पहले विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप भी लगे थे। ऐसे में सियासी गलियारे में यह चर्चा आम हो गई है कि राज्य में कभी भी मध्यावधि चुनाव हो सकते हैं।

ये है कर्नाटक विधानसभा का गणित

बता दें कि कर्नाटक की 224 सदस्यों वाली विधानसभा के लिए पिछले साल चुनाव हुए थे। इस चुनाव में किसी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। उसने 104 सीट जीती थीं।

वहीं कांग्रेस को 80 और जेडीएस को 37 सीटें मिलीं। खंडित जनादेश के बावजूद बीजेपी ने सरकार बनाने का दावा पेश किया। बीएस येदियुरप्पा ने शपथ भी ले ली। लेकिन जब बात विधानसभा में बहुमत साबित करने की आई तो बीजेपी इसमें फेल हो गई और सरकार गिर गई। इसके बाद कांग्रेस और जेडीएस ने गठबंधन कर लिया। कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए 113 सीटों की जरूरत पड़ती है।

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