जन सूचना अधिकार में लटके हुए है 50 हजार मुकदमे

जुबिली पोस्ट ब्यूरो

लखनऊ। सूचना का अधिकार अधिनियम का मूल उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाने, सरकार के कार्य में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना, भ्रष्टाचार को नियंत्रित करना और वास्तविक अर्थों में हमारे लोकतंत्र को लोगों के लिए कामयाब बनाना है।

लेकिन ये सब कैसे संभव होगा जब सूचना ना मिलने की सुनवाई में लंबी लाइन लगी होगी। आपको जानकर हैरानी होगी कि देश के सबसे राज्य उत्तर प्रदेश में जन सूचना अधिकार के करीब 50 हज़ार मुक़दमें लंबित पड़े हुए हैं। ये चौंकाने वाला बयान खुद यूपी के सूचना आयुक्त ने दिया है।

उत्तर प्रदेश के जन सूचना आयुक्त सुभाष सिंह के अनुसार राज्य में जन सूचना अधिकार के करीब 50 हज़ार मुक़दमें लंबित हैं। सुभाष सिंह ने कहा कि लंबित मुकदमों की सुनवाई के लिए प्रतिदिन कम से कम 50 मुकदमों की दैनिक सुनवाई होती है, जो काफी नहीं है।

मुकदमों की सुनवाई के दौरान इस बात का पूरा ख़्याल रखा जाता है कि वादी को सूचना उपलब्ध करवाकर मामले का गुणवत्तायुक्त निस्तारण किया जा सके। आपको बता दे कि संसाधनों की कमी के कारण एक माह में 18-20 दिन मुकदमों की सुनवाई होती है।

सूचना आयुक्त की माने तो मुकदमों की भरमार होने के कारण यह ध्यान रखा जाता है कि आयोग न्यायपूर्वक सही सूचना उपलब्ध करवाए। यदि कोई सूचना देने में हीलाहवाली करता है तो उसके लिए दंड का प्रावधान भी है। जो मुकदमे लंबे समय से पड़े हुए है उनके लिए तारीख जल्द तय की जाती है। ताकि समय रहते उनको सही सूचनाएं मिल सके।

मानवाधिकारों के विशेष मामलों में 48 घंटो के भीतर सुनवाई होती है। सूचना आयुक्त ने बताया कि प्रथम अपील के बाद भी सूचना या भ्रामक सूचना देने पर वाद द्वारा दोबारा सूचना मांगी जा सकती है। प्रथम अपील के अंतर्गत 30 दिनों के भीतर सूचना उपलब्ध कराना अनिवार्य है।

सूचना आयुक्त की माने तो सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 एक क्रान्तिकारी एक्ट है। इस अधिनियम ने जन सामान्य को मजबूत बनाया, जिसके कारण शासन की कार्य प्रणाली में पारदर्शिता आयी है, साथ ही अधिनियम का उद्देश्य सम्बंधित की जबाबदेही भी सुनिश्चित करता है।

उन्होंने कहा कि उप्र सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 एवं उप्र सूचना का अधिकार नियमावली-2015 के प्रभावी क्रियान्वयन से लोगों में यह जागरुकता आयी है। उन्होने कहा कि सभी संबंधित जन सूचना अधिकारी व प्रथम अपीलीय अधिकारी किसी भी आवेदन को बेवजह लम्बित न रखे और उसका निस्तारण नियमों के आधार पर नियत समय में करें, जिससे उन्हे दण्ड का भागी न होना पड़े।

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