खामोश हो गई खेल जगत की एक बुलंद आवाज: अलविदा संतोष सूरी!

दिव्य नौटियाल

क्रिकेट की पिच पर जब कोई ‘क्लीन बोल्ड’ होता है, तो सिर्फ गिल्ली नहीं गिरती, बल्कि एक सन्नाटा छा जाता है। आज खेल पत्रकारिता के मैदान में भी वही सन्नाटा है। देश के विख्यात और बेहद काबिल खेल पत्रकार संतोष सूरी ने दुनिया के इस रंगमंच से अपनी आखिरी पारी खेलकर विदा ले ली है। उनका जाना केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि पत्रकारिता के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत है।

1 अप्रैल को हुई थी अंतिम मुलाकात

31 मार्च को इकाना स्टेडियम में और फिर 1 अप्रैल को लखनऊ सुपरजाइंट्स और दिल्ली कैपिटल्स के मैच के दौरान वरिष्ठ पत्रकार संतोष सुरी से मुलाकात हुई थी। उस वक्त बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं था कि यह हमारी आखिरी मुलाकात होगी।
आज दोपहर करीब 1 बजे एक करीबी से उनके निधन की खबर मिली… और कुछ पल के लिए जैसे सब थम गया। यकीन करना मुश्किल था कि सुरी भाई अब हमारे बीच नहीं रहे।

करीब 30 सालों का साथ था

करीब 30 सालों का साथ था। मैंने अपने जीवन में उनसे बेहतर खेल पत्रकार शायद ही देखा हो। खेल की उनकी समझ, विश्लेषण की सटीकता और शब्दों की ताकत हर रिपोर्ट में साफ झलकती थी। भारत की टीम चाहे देश में खेले या विदेश में, संतोष सुरी की कलम हर मैच को एक नई कहानी बना देती थी। आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन खेल पत्रकारिता की दुनिया में उनका नाम हमेशा स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज रहेगा।

कलम के धनी और क्रिकेट के पारखी

संतोष सूरी का नाम खेल जगत में किसी परिचय का मोहताज नहीं था। उन्होंने अपनी पत्रकारिता की शुरुआत करीब चार दशक पहले नवाबों के शहर लखनऊ से की थी।

भले ही उनकी रिपोर्टिंग ने सात समंदर पार के क्रिकेट मैदानों की धूल छानी हो, लेकिन उनके दिल में हमेशा लखनऊ ही बसा रहा। उनकी लेखनी में वह जादू था कि टाइम्स ऑफ इंडिया में उनकी ‘बाय-लाइन’ देखते ही पाठक पूरी खबर पढ़े बिना आगे नहीं बढ़ते थे। “पिछले कुछ सालों से वे mid-day में अपनी सेवाएं दे रहे थे और देश-विदेश में अपनी खेल पत्रकारिता का लोहा मनवा रहे थे।”

खेल पत्रकारिता में लंबा सफर तय किया था

संतोष सूरी केवल एक पत्रकार नहीं, बल्कि उभरते हुए पत्रकारों के लिए एक संस्थान थे। भारत की टीम चाहे देश में खेले या विदेश में, उनकी कलम हर मैच को एक नई कहानी बना देती थी। खेल की उनकी गहरी समझ और सटीक विश्लेषण ने उन्हें ‘टॉइम्स ऑफ इंडिया’ जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में एक खास पहचान दिलाई थी।

खेल जगत और पत्रकारों ने दी श्रद्धांजलि

बैकुंठ धाम में आयोजित अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में पत्रकार, खिलाड़ी और खेल संघों से जुड़ी हस्तियों ने उन्हें अश्रुपूरित नेत्रों से विदाई दी। खेल जगत के दिग्गजों ने कहा कि संतोष सूरी का जाना खेल पत्रकारिता के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत है।

आज खेल जगत का वह पारखी सितारा अस्त हो गया जिसकी चमक से खेल के गलियारे रोशन रहते थे। संतोष सूरी जी का असामयिक निधन पत्रकारिता के एक अध्याय का दुखद अंत है। न जाने की बेला थी, न ही कोई आहट, बस पीछे छूट गई हैं तो उनकी यादें और वो बेहतरीन रिपोर्टिंग।

ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दे और शोक संतप्त परिवार को इस असीम दुख से उबरने की शक्ति दे।

विनम्र श्रद्धांजलि!

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)

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