ईरान का पाकिस्तान को दोटूक: ’15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव’ ठुकराया; कहा- धमकियों के साये में नहीं होगी कोई बात

तेहरान/इस्लामाबाद: मध्य पूर्व (Middle East) में जारी तनाव के बीच शांति की एक और बड़ी कोशिश नाकाम होती दिख रही है। ईरान ने पाकिस्तान द्वारा तैयार किए गए 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को आधिकारिक तौर पर ठुकरा दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी ‘डेडलाइन’ या अमेरिकी धमकियों के दबाव में आकर अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा।

मुख्य हाइलाइट्स: तेहरान का ‘नो कॉम्प्रोमाइज’ स्टैंड

  • मध्यस्थ की विफलता: पाकिस्तान द्वारा तैयार 15-सूत्रीय मसौदे को ईरान ने ‘अस्वीकार्य’ बताया।
  • सीजफायर पर पेच: 45 दिनों के युद्धविराम और होर्मुज (Strait of Hormuz) खोलने की शर्त को नकारा।
  • धमकी का असर: ईरान ने कहा- ट्रंप की सैन्य धमकियां और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।
  • आत्मविश्वास का संदेश: तेहरान अपनी जायज मांगों को ‘समझौते का संकेत’ नहीं बल्कि ‘आत्मविश्वास’ मानता है।

क्यों फेल हुआ पाकिस्तान का ‘पीस प्लान’?

न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए एक विस्तृत मसौदा तैयार किया था। इसमें मुख्य रूप से 45 दिनों के अस्थायी युद्धविराम और व्यापार के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने का प्रस्ताव था।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने तेहरान की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा:

“डेडलाइन तय करना और युद्ध की धमकियां देना, कूटनीतिक बातचीत के सिद्धांतों के खिलाफ है। ईरान अपनी शर्तों और राष्ट्रीय हितों के आधार पर ही कोई फैसला लेगा।”

ट्रंप की ‘डेडलाइन’ और ईरान का पलटवार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के पावर प्लांट और बुनियादी ढांचे को तबाह करने की दी गई ‘मंगलवार तक की डेडलाइन’ ने आग में घी का काम किया है। इस्माइल बगाई ने तंज कसते हुए कहा कि तेहरान किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने साफ किया कि ईरान की स्पष्टवादिता को उसकी कमजोरी या ‘समझौते की छटपटाहट’ समझने की भूल न की जाए, बल्कि यह उसका आत्मविश्वास है।

क्षेत्रीय स्थिरता पर संकट बरकरार

पाकिस्तान की इस मध्यस्थता का विफल होना पूरे दक्षिण और पश्चिम एशिया के लिए चिंता का विषय है।

  1. होर्मुज का लॉक: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद रहने से वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में उछाल जारी रहेगा।
  2. सैन्य टकराव का खतरा: शांति प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद अब मंगलवार की ‘डेडलाइन’ को लेकर दुनिया भर की नजरें अमेरिका और ईरान की अगली सैन्य गतिविधि पर टिकी हैं।

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