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	<title>#worldnews Archives &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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	<lastBuildDate>Wed, 25 Mar 2026 15:45:18 +0000</lastBuildDate>
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		<title>ईरान का साफ इनकार: अमेरिका का शांति प्रस्ताव ठुकराया, रखीं 5 कड़ी शर्तें</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/iran-rejects-us-peace-proposal-imposes-five-strict-conditions/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Mar 2026 15:45:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच Iran ने अमेरिका के 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस प्रस्ताव को “थोपा गया” बताते हुए साफ कहा गया है कि युद्ध खत्म करने का फैसला तेहरान खुद करेगा, न कि Donald Trump। Press TV की रिपोर्ट &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच Iran ने अमेरिका के 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस प्रस्ताव को “थोपा गया” बताते हुए साफ कहा गया है कि युद्ध खत्म करने का फैसला तेहरान खुद करेगा, न कि Donald Trump।</p>



<p>Press TV की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने बिना नाम उजागर किए कहा कि मौजूदा हालात में अमेरिका का प्रस्ताव ईरान के हितों के अनुरूप नहीं है। अधिकारी ने दो टूक कहा कि “जंग का अंत हमारी शर्तों पर होगा।”</p>



<h3 class="wp-block-heading">पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भी ‘ना’</h3>



<p>इस बीच Pakistan की ओर से मध्यस्थता की कोशिशों को भी झटका लगा है। बेरूत आधारित Al Mayadeen के मुताबिक, ईरान ने पाकिस्तान को स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिकी प्रस्ताव के आधार पर किसी भी बातचीत के लिए तैयार नहीं है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"> क्यों नहीं बदलेगा ईरान का रुख?</h3>



<p>रिपोर्ट्स के अनुसार, Steve Witkoff के जरिए भेजा गया यह प्रस्ताव ईरान की प्राथमिकताओं में शामिल ही नहीं है। सूत्रों का कहना है कि मौजूदा हालात में तेहरान अपने रुख में नरमी लाने के मूड में नहीं है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"> ईरान की 5 बड़ी शर्तें:</h3>



<p>ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्ध समाप्त करने के लिए तेहरान ने पांच स्पष्ट शर्तें रखी हैं:</p>



<ol class="wp-block-list">
<li>“दुश्मन” की ओर से सभी सैन्य हमले और टारगेट किलिंग पूरी तरह बंद हों।</li>



<li>भविष्य में ईरान पर दोबारा युद्ध न थोपने की ठोस अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए।</li>



<li>युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई के लिए स्पष्ट मुआवजा दिया जाए।</li>



<li>क्षेत्र में सभी मोर्चों पर संघर्ष खत्म किया जाए, जिसमें सहयोगी समूहों पर हमले भी शामिल हों।</li>



<li>Strait of Hormuz पर ईरान के संप्रभु अधिकार को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिले।</li>
</ol>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<p>इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने के बजाय और जटिल होता जा रहा है। जहां एक ओर वॉशिंगटन समझौते की बात कर रहा है, वहीं तेहरान अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है—जिससे मिडिल ईस्ट में लंबा टकराव जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अमेरिका पर ईरान का पलटवार! USS Abraham Lincoln को निशाना बनाने का दावा</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/iran-retaliates-against-the-us-claiming-to-have-targeted-the-uss-abraham-lincoln/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Mar 2026 15:02:17 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[जुबिली वर्ल्ड]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग न्यूज़]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली स्पेशल डेस्क अमेरिका लगातार कह रहा है कि ईरान के साथ समझौता हो जाएगा। इतना ही नहीं, Donald Trump भी ईरान को लेकर बार-बार अपने बयान बदल रहे हैं। उनके मुताबिक, ईरान की सारी ताकत खत्म हो चुकी है। अमेरिका ने उसकी नेवी से लेकर सेना तक को भारी नुकसान पहुंचाया है। लेकिन इसके &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>जुबिली स्पेशल डेस्क</strong></p>



<p>अमेरिका लगातार कह रहा है कि ईरान के साथ समझौता हो जाएगा। इतना ही नहीं, Donald Trump भी ईरान को लेकर बार-बार अपने बयान बदल रहे हैं। उनके मुताबिक, ईरान की सारी ताकत खत्म हो चुकी है। अमेरिका ने उसकी नेवी से लेकर सेना तक को भारी नुकसान पहुंचाया है।</p>



<p>लेकिन इसके बावजूद ईरान द्वारा लगातार हमले किए जाना इस बात की ओर इशारा करता है कि ट्रंप के दावे पूरी तरह सही नहीं हैं। ईरानी मिसाइलें न सिर्फ मिडिल ईस्ट बल्कि Israel पर भी कहर बनकर गिर रही हैं और उसके कई अहम शहर खंडहर में तब्दील होते नजर आ रहे हैं।</p>



<p>इसी बीच, इजरायल और अमेरिका के साथ जारी जंग के दौरान ईरान ने एक ऐसा दावा किया है, जिसने सभी का ध्यान खींच लिया है। अब सवाल है कि ईरानी सेना ने ऐसा क्या दावा किया है जिसकी इतनी चर्चा हो रही है।</p>



<blockquote class="wp-block-quote is-layout-flow wp-block-quote-is-layout-flow">
<p><strong><em>दरअसल, ईरानी सेना के अनुसार तट से समुद्र की ओर दागी गई क्रूज मिसाइलों ने अमेरिकी युद्धपोत USS Abraham Lincoln को निशाना बनाया है। ईरान ने इस हमले का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जारी किया है और कहा है कि वह अभी कमजोर नहीं हुआ है। साथ ही, उसने यह भी कहा कि जब तक अपने नेताओं की मौत का बदला नहीं ले लेगा, तब तक चैन से नहीं बैठेगा।</em></strong></p>
</blockquote>



<p>इतना ही नहीं, ईरानी नेवी के कमांडर ने अमेरिका को एक बार फिर चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर USS Abraham Lincoln उनकी मिसाइल रेंज में आया, तो उसे निशाना बनाने में देर नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि वे लगातार इस युद्धपोत पर नजर बनाए हुए हैं।</p>



<p>ईरान के इस दावे पर अमेरिका ने न तो इसे खारिज किया है और न ही इसकी पुष्टि की है। इसका मतलब है कि अमेरिका ने फिलहाल इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है।</p>



<p>बता दें कि अमेरिका लगातार इस जंग से बाहर निकलने के रास्ते तलाश रहा है और Donald Trump भी अपने बयानों से पलटते नजर आ रहे हैं। उनके अनुसार, ईरान बातचीत करना चाहता है और इसके लिए अमेरिका रणनीति पर काम कर रहा है। हालांकि, ईरान ने किसी भी तरह की बातचीत से इनकार कर दिया है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Iran-US War: 26वें दिन ईरान की सख्त शर्तें, शांति वार्ता और मुश्किल; होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा तनाव</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/iran-us-war-iran-imposes-tough-conditions-on-26th-day-making-peace-talks-more-difficult-tensions-rise-in-the-strait-of-hormuz/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Mar 2026 05:09:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अमेरिका, इजरायल और Iran के बीच जारी जंग के 26वें दिन शांति वार्ता की राह और पेचीदा होती नजर आ रही है। ईरान ने मध्यस्थ देशों के जरिए United States के सामने ऐसी सख्त शर्तें रख दी हैं, जिन पर सहमति बनना फिलहाल मुश्किल माना जा रहा है। ईरान की 4 बड़ी मांगें क्या हैं? &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>अमेरिका, इजरायल और Iran के बीच जारी जंग के 26वें दिन शांति वार्ता की राह और पेचीदा होती नजर आ रही है। ईरान ने मध्यस्थ देशों के जरिए United States के सामने ऐसी सख्त शर्तें रख दी हैं, जिन पर सहमति बनना फिलहाल मुश्किल माना जा रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ईरान की 4 बड़ी मांगें क्या हैं?</h3>



<p>ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना इन शर्तों के कोई समझौता संभव नहीं:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>भविष्य में कोई सैन्य हमला न हो, इसके लिए अमेरिका और Israel से लिखित गारंटी</li>



<li>युद्ध में हुए नुकसान की पूरी भरपाई (War Reparations)</li>



<li>Strait of Hormuz पर पूर्ण नियंत्रण</li>



<li>बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन प्रोग्राम पर कोई प्रतिबंध नहीं</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading">अतिरिक्त सख्त शर्तों ने बढ़ाई मुश्किलें</h3>



<p>रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने और भी मांगें रखी हैं:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>खाड़ी क्षेत्र से अमेरिका के सभी सैन्य बेस हटाए जाएं</li>



<li>इजरायल तुरंत हिजबुल्लाह पर हमले बंद करे</li>



<li>ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध (Sanctions) खत्म किए जाएं</li>
</ul>



<p>ईरान का कहना है कि पहले धोखा मिलने के कारण अब बिना ठोस गारंटी कोई समझौता नहीं होगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ट्रंप के दावे को ईरान ने किया खारिज</h3>



<p>Donald Trump ने दावा किया था कि बातचीत सकारात्मक दिशा में है और ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। हालांकि, तेहरान ने साफ कहा है कि कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही, सिर्फ मध्यस्थ देशों—जैसे ओमान, कतर और पाकिस्तान—के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">जमीनी हालात: हमले लगातार जारी</h3>



<p>शांति वार्ता की चर्चाओं के बावजूद जंग थमी नहीं है:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>हिजबुल्लाह ने हाइफा-नाहारिया क्षेत्र पर 30+ रॉकेट दागे</li>



<li>ईरान ने इजरायल की एयरोस्पेस साइट्स पर ड्रोन हमले किए</li>



<li>इजरायल ने शिराज एयरपोर्ट समेत कई ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की</li>



<li>कुवैत एयरपोर्ट के फ्यूल टैंक में आग लगने की घटना</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading">तेल संकट और वैश्विक असर</h3>



<p>होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें 94–97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। ईरान ने साफ किया है कि वह “गैर-दुश्मन” देशों के जहाजों को ही इस रास्ते से गुजरने देगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading">भारत की भूमिका क्या है?</h3>



<p>Narendra Modi ने ट्रंप से बातचीत कर क्षेत्र में शांति और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा पर जोर दिया। भारत अपने नागरिकों और तेल सप्लाई को लेकर सतर्क नजर बनाए हुए है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">आगे क्या?</h3>



<p>ईरान की कड़ी शर्तों के बाद साफ है कि शांति समझौता फिलहाल आसान नहीं है। वहीं ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो ईरान के पावर प्लांट्स पर फिर हमला किया जा सकता है।</p>



<p> कुल मिलाकर, दुनिया को इस जंग के खत्म होने का इंतजार है, लेकिन दोनों पक्षों के सख्त रुख के चलते हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Iran-US War News: इस्लामाबाद बन सकता है बातचीत का केंद्र, ट्रंप के युद्धविराम के बीच तेज हुई कूटनीति</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/iran-us-war-news-islamabad-could-become-a-center-of-talks-diplomacy-accelerates-amid-trumps-ceasefire/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 03:33:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली/इस्लामाबाद/वॉशिंगटन ।अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अब कूटनीतिक हल की कोशिशें तेज हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान पर हमलों को 5 दिनों के लिए रोकने के ऐलान के बाद संभावित बातचीत को लेकर हलचल बढ़ गई है। खबर है कि पाकिस्तान की राजधानी Islamabad इस हाई-लेवल &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>नई दिल्ली/इस्लामाबाद/वॉशिंगटन ।</strong><br>अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अब कूटनीतिक हल की कोशिशें तेज हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान पर हमलों को 5 दिनों के लिए रोकने के ऐलान के बाद संभावित बातचीत को लेकर हलचल बढ़ गई है। खबर है कि पाकिस्तान की राजधानी Islamabad इस हाई-लेवल वार्ता का केंद्र बन सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">इस्लामाबाद में हो सकती है अहम बैठक</h3>



<p>रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल और पाकिस्तान के अधिकारी पर्दे के पीछे अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।<br>सूत्रों का कहना है कि इस हफ्ते ही Islamabad में दोनों देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की बैठक संभव है।</p>



<p>अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वांस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और Jared Kushner जैसे बड़े चेहरे शामिल हो सकते हैं। हालांकि ईरान की तरफ से कौन हिस्सा लेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"> पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र की मध्यस्थता</h3>



<p>युद्ध शुरू होने के बाद से Pakistan, Turkey और Egypt लगातार दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं।<br>इन कोशिशों के चलते इस्लामाबाद को एक “न्यूट्रल वेन्यू” के तौर पर देखा जा रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"> शहबाज शरीफ की पहल</h3>



<p>पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से फोन पर बात कर क्षेत्र में शांति बहाल करने में सहयोग की पेशकश की है।<br>पिछले एक महीने में दोनों नेताओं के बीच कई बार बातचीत हो चुकी है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"> व्हाइट हाउस ने नहीं की पुष्टि</h3>



<p>व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने संभावित बैठक पर सीधी पुष्टि से इनकार किया है। उनका कहना है कि ये “संवेदनशील कूटनीतिक बातचीत” है और आधिकारिक घोषणा से पहले किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता।</p>



<h3 class="wp-block-heading"> ट्रंप का संकेत और चेतावनी</h3>



<p>Donald Trump ने दावा किया है कि ईरान के साथ “अच्छी बातचीत” हुई है और कुछ बड़े मुद्दों पर सहमति बन सकती है।<br>हालांकि उन्होंने चेतावनी भी दी है कि अगर बातचीत विफल रही, तो सैन्य कार्रवाई फिर शुरू हो सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"> ईरान ने सीधे बातचीत से किया इनकार</h3>



<p>ईरान के संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने अमेरिका के साथ किसी भी सीधे संवाद से इनकार किया है।<br>उन्होंने इन खबरों को “फेक न्यूज” बताते हुए कहा कि इसका मकसद वैश्विक बाजार को प्रभावित करना है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"> बैकचैनल डिप्लोमेसी जारी</h3>



<p>रोपीय सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है, जिसमें खाड़ी देश, पाकिस्तान और मिस्र संदेशवाहक की भूमिका निभा रहे हैं।<br>ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi का नाम भी इन बातचीतों में सामने आया है, हालांकि उन्होंने इससे इनकार किया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण</h3>



<p>कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद जमीनी स्थिति गंभीर बनी हुई है।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स लगातार हमले कर रही हैं</li>



<li>इजरायल सैन्य कार्रवाई जारी रखने के पक्ष में है</li>



<li>प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि बातचीत की संभावना है, लेकिन ऑपरेशन नहीं रुकेगा</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading"> होर्मुज बना सबसे बड़ा मुद्दा</h3>



<p>इस पूरे संघर्ष का केंद्र Strait of Hormuz है, जहां से दुनिया की करीब 20% ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है।<br>ईरान ने इस मार्ग को लगभग बंद कर दिया है और साफ कहा है कि जब तक हमले नहीं रुकते, इसे नहीं खोला जाएगा।</p>



<p>अमेरिका और ईरान के बीच टकराव अब “जंग बनाम बातचीत” के दोराहे पर खड़ा है।<br>एक तरफ बैकचैनल डिप्लोमेसी तेज हो रही है, तो दूसरी तरफ जमीनी संघर्ष जारी है। आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि यह संकट शांति की ओर बढ़ेगा या बड़े युद्ध में बदल जाएगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बेंजामिन नेतन्याहू के बयान के मायने: क्या ईरान युद्ध से बाहर निकलना चाहते हैं अमेरिका-इजरायल?</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/meaning-of-benjamin-netanyahus-statement-do-the-us-and-israel-want-to-get-out-of-the-iran-war/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Mar 2026 17:29:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली। बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान अब परमाणु हथियार और मिसाइल विकसित करने की स्थिति में नहीं है। उनके मुताबिक अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों ने ईरान की इन क्षमताओं को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। नेतन्याहू के इस बयान को दो तरह से देखा जा रहा है। पहला, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान अब परमाणु हथियार और मिसाइल विकसित करने की स्थिति में नहीं है। उनके मुताबिक अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों ने ईरान की इन क्षमताओं को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है।</p>



<p>नेतन्याहू के इस बयान को दो तरह से देखा जा रहा है। पहला, यह संकेत कि ईरान को इस युद्ध में भारी नुकसान हुआ है। दूसरा, यह कि अमेरिका और इजरायल अपने सैन्य लक्ष्य हासिल कर चुके हैं और अब संघर्ष के खत्म होने की संभावना बढ़ रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"> ईरान को कितना नुकसान?</h3>



<p>रिपोर्ट्स के अनुसार, इस संघर्ष में ईरान को सैन्य और आर्थिक दोनों स्तर पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>सुप्रीम लीडर खामेनेई </li>



<li>सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी </li>



<li>IRGC के कमांडर-इन-चीफ मोहम्मद पाकपुर</li>



<li>रक्षा मंत्री अजीज नसीरजादेह </li>



<li>खामेनेई के करीबी सुरक्षा सलाहकार अली शमखानी</li>



<li>खुफिया विभाग के चीफ सलाह असादी </li>



<li>नए हथियारों के प्रोग्राम के चीफ हसन जबाल अमेलियन </li>



<li>बसिज पैरा मिलिट्री फोर्स के कमांडर घोलामरेजा सोलैमानी </li>



<li>मिलिट्री ब्यूरो के चीफ मोहम्मद शिराजी</li>



<li>सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ सय्यद अब्दोलरहीम मुसावी</li>
</ul>



<p><strong>1. मानव क्षति</strong></p>



<p>अमेरिकी मानवाधिकार संगठनों के आकलन के मुताबिक, अब तक करीब 3,000 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें सैन्य और आम नागरिक दोनों शामिल हैं।</p>



<p><strong>2. शीर्ष नेतृत्व पर असर</strong></p>



<p>हमलों में ईरान की सैन्य और रणनीतिक नेतृत्व संरचना को भी बड़ा झटका लगा है। कई वरिष्ठ अधिकारियों के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं, जिससे कमांड स्ट्रक्चर प्रभावित हुआ है।</p>



<p><strong>3. सैन्य ढांचे को नुकसान</strong></p>



<p>ईरान के मिसाइल ठिकानों और ड्रोन क्षमता को निशाना बनाया गया है। साथ ही समुद्री क्षेत्र में उसकी सैन्य मौजूदगी पर भी असर पड़ा है।</p>



<p><strong>4. ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला</strong></p>



<p>ईरान के तेल और गैस ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। खासतौर पर साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"> क्या खत्म होने वाली है जंग?</h3>



<p>विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और इजरायल अपने घोषित लक्ष्यों को हासिल कर चुके हैं, तो आने वाले समय में तनाव कम हो सकता है। हालांकि, क्षेत्रीय हालात अब भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।</p>
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