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	<title>Jubilee Post &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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		<title>पाकिस्तान पर अमेरिका का बड़ा आरोप: खुफिया चीफ तुलसी गबार्ड ने बताया ‘परमाणु खतरा’, चीन-रूस-ईरान भी लिस्ट में</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/tulsi-gabbards-big-statement-on-pakistan-and-china-saying-their-nuclear-weapons-are-a-threat-to-america/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Mar 2026 16:50:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वॉशिंगटन: अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की प्रमुख तुलसी गबार्ड के ताज़ा बयान ने वैश्विक सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। बुधवार को ब्रीफिंग के दौरान उन्होंने पाकिस्तान को अमेरिका के लिए उभरते बड़े परमाणु खतरों में शामिल बताया, जिससे वॉशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हलचल मच गई है। ‘सहयोगी’ से ‘खतरे’ तक बदली छविगबार्ड &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>वॉशिंगटन:</strong> अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की प्रमुख तुलसी गबार्ड के ताज़ा बयान ने वैश्विक सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। बुधवार को ब्रीफिंग के दौरान उन्होंने पाकिस्तान को अमेरिका के लिए उभरते बड़े परमाणु खतरों में शामिल बताया, जिससे वॉशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हलचल मच गई है।</p>



<p><strong>‘सहयोगी’ से ‘खतरे’ तक बदली छवि</strong><br>गबार्ड के मुताबिक, अब व्हाइट हाउस की नजरों में पाकिस्तान की छवि बदल रही है। उन्होंने साफ संकेत दिया कि अमेरिका इसे अब केवल सहयोगी देश नहीं, बल्कि संभावित जोखिम के रूप में देख रहा है।</p>



<p><strong>इन देशों का भी लिया नाम</strong></p>



<p>ब्रीफिंग में चीन, रूस, ईरान और उत्तर कोरिया का भी जिक्र किया गया। गबार्ड ने कहा कि ये देश तेजी से ऐसे उन्नत मिसाइल सिस्टम विकसित कर रहे हैं, जो पारंपरिक और परमाणु दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम हैं और अमेरिका तक पहुंच सकते हैं।</p>



<p><strong>नए ‘गठजोड़’ पर भी चिंता</strong></p>



<p>उन्होंने चेतावनी दी कि उत्तर कोरिया, रूस और चीन के बीच बढ़ती साझेदारी वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। यह संभावित गठजोड़ अंतरराष्ट्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है।</p>



<p><strong>ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर दावा</strong></p>



<p>गबार्ड ने जून 2025 में अमेरिकी हमलों का जिक्र करते हुए दावा किया कि ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को उस समय भारी नुकसान पहुंचाया गया था। उनके अनुसार, तब से अब तक ईरान ने अपनी परमाणु क्षमता को दोबारा खड़ा करने की कोई बड़ी कोशिश नहीं की है।</p>



<p><strong>खतरा अभी टला नहीं</strong></p>



<p>हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। गबार्ड के मुताबिक, ईरान धीरे-धीरे अपनी सैन्य ताकत फिर से बढ़ाने की कोशिश कर सकता है और मिडिल ईस्ट में अमेरिका व उसके सहयोगियों को निशाना बना सकता है।</p>



<p></p>
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			</item>
		<item>
		<title>ग्रीनलैंड विवाद पर ट्रंप की टैरिफ धमकियों से पश्चिमी एकजुटता पर संकट</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/trump-greenland-tariff-europe-crisis/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 18 Jan 2026 04:43:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जुबिली स्पेशल डेस्क ट्रंप के शासनकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रह चुके जॉन बोल्टन ने ग्रीनलैंड को पश्चिमी देशों के लिए बेहद अहम बताया है। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से इस बात पर जोर देते रहे हैं कि ग्रीनलैंड की रणनीतिक अहमियत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि, बोल्टन ने ट्रंप की &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p data-start="202" data-end="735"><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली स्पेशल डेस्क </strong></span></p>
<p data-start="202" data-end="735">ट्रंप के शासनकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रह चुके जॉन बोल्टन ने ग्रीनलैंड को पश्चिमी देशों के लिए बेहद अहम बताया है। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से इस बात पर जोर देते रहे हैं कि ग्रीनलैंड की रणनीतिक अहमियत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।</p>
<p data-start="202" data-end="735"><span style="color: #ff6600;"><em><strong> हालांकि, बोल्टन ने ट्रंप की हालिया बयानबाजी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात के बदले अपने ही सहयोगी देशों पर टैरिफ लगाने की धमकियां पूरी तरह बेतुकी हैं। उनके मुताबिक, इस तरह के कदम आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता स्थापित करने को और मुश्किल बना रहे हैं।</strong></em></span></p>
<p data-start="737" data-end="1272"><span style="color: #ff6600;"><em><strong>ट्रंप की टैरिफ धमकियों पर यूरोपीय यूनियन की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात का सबसे ज्यादा फायदा चीन और रूस उठा रहे होंगे।</strong></em></span></p>
<p data-start="737" data-end="1272">सहयोगी देशों के बीच बढ़ती फूट का लाभ उन्हीं ताकतों को मिलता है, जो वैश्विक व्यवस्था को चुनौती देना चाहती हैं। काजा कैलास ने इशारों में चेतावनी दी कि अगर पश्चिमी देशों की एकजुटता कमजोर होती है, तो इसका सीधा फायदा विरोधी शक्तियों को मिलेगा। उन्होंने साफ कहा कि अगर ग्रीनलैंड की सुरक्षा को कोई खतरा है, तो इस मुद्दे को NATO के भीतर रहकर ही सुलझाया जाना चाहिए।</p>
<p data-start="1274" data-end="1485">EU नेता ने यह भी कहा कि टैरिफ लगाने से न तो अमेरिका को फायदा होगा और न ही यूरोप को। इससे दोनों ही पक्ष आर्थिक रूप से कमजोर होंगे, साझा समृद्धि को नुकसान पहुंचेगा और ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों में दरार और गहरी होगी।</p>
<p data-start="1487" data-end="1560"><span style="color: #800000;"><strong data-start="1487" data-end="1560">यूक्रेन या ग्रीनलैंड में कोई धमकी हमें प्रभावित नहीं कर सकती: मैक्रों</strong></span></p>
<p data-start="1562" data-end="1882">फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्रंप की टैरिफ धमकियों को सख्त लहजे में खारिज किया है। उन्होंने कहा कि फ्रांस राष्ट्रों की संप्रभुता और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मैक्रों ने कहा,<br data-start="1771" data-end="1774" />“ना तो यूक्रेन में, ना ही ग्रीनलैंड में और ना ही कहीं और किसी तरह की धमकी या दबाव हमें प्रभावित कर सकता है।”</p>
<p data-start="1884" data-end="2203">मैक्रों ने टैरिफ धमकियों को ‘अस्वीकार्य’ बताते हुए कहा कि अगर ये वास्तव में लागू की जाती हैं, तो यूरोपीय देश एकजुट और समन्वित तरीके से जवाब देंगे।</p>
<p data-start="1884" data-end="2203">उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फ्रांस डेनमार्क के साथ मिलकर ग्रीनलैंड में सैन्य अभ्यास में शामिल है, क्योंकि यह आर्कटिक और यूरोप की सीमाओं की सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा है।</p>
<p data-start="2205" data-end="2248"><span style="color: #800000;"><strong data-start="2205" data-end="2248">ब्रिटेन के पीएम कीर स्टारमर का कड़ा रुख</strong></span></p>
<p data-start="2250" data-end="2701">ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने भी ट्रंप की टैरिफ धमकियों को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है और उसका भविष्य केवल ग्रीनलैंड के लोगों और डेनमार्क के फैसले पर निर्भर करता है।</p>
<p data-start="2250" data-end="2701">स्टारमर ने कहा कि आर्कटिक की सुरक्षा NATO के सभी सहयोगी देशों के लिए महत्वपूर्ण है और रूस के खतरे से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। लेकिन NATO सहयोगियों पर टैरिफ लगाना, जो साझा सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं, बिल्कुल गलत कदम है।</p>
<p data-start="2703" data-end="2738"><span style="color: #800000;"><strong data-start="2703" data-end="2738">ट्रंप की 25 फीसदी टैरिफ की धमकी</strong></span></p>
<p data-start="2740" data-end="3045">डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए घोषणा की थी कि डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड्स और फिनलैंड पर 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ग्रीनलैंड को लेकर कोई समझौता नहीं होता, तो 1 जून 2026 से यह टैरिफ बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया जाएगा।</p>
<p data-start="3047" data-end="3407">ट्रंप ने लिखा कि अमेरिका ने वर्षों तक डेनमार्क और यूरोपीय यूनियन के देशों को बिना टैरिफ या किसी भुगतान के सब्सिडी दी है और अब “वापस देने का समय आ गया है।”</p>
<p data-start="3047" data-end="3407">उन्होंने दावा किया कि दुनिया की शांति दांव पर है और चीन तथा रूस ग्रीनलैंड पर नजर बनाए हुए हैं। ट्रंप ने डेनमार्क की सुरक्षा क्षमताओं पर भी तंज कसते हुए कहा कि उसके पास सुरक्षा के लिए सिर्फ दो डॉगस्लेड हैं।</p>
<p data-start="3409" data-end="3455"><span style="color: #800000;"><strong data-start="3409" data-end="3455">वैश्विक शांति के लिए कड़े कदम जरूरी: ट्रंप</strong></span></p>
<p data-start="3457" data-end="3631">ट्रंप ने कहा कि वैश्विक शांति और सुरक्षा की रक्षा के लिए कड़े और निर्णायक कदम उठाना जरूरी है, ताकि किसी संभावित खतरनाक स्थिति को जल्दी और बिना किसी संदेह के खत्म किया जा सके।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>रूस-ईरान समेत 75 देशों की वीज़ा एंट्री पर अमेरिका की रोक</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/people-from-these-75-countries-including-russia-and-iran-will-not-be-allowed-entry-into-the-us-visa-processing-has-been-stopped/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Jan 2026 15:36:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जुबिली स्पेशल डेस्क अमेरिका ने 75 देशों से आने वाले आवेदकों के लिए वीज़ा प्रोसेसिंग पर बड़ा कदम उठाया है। रूस, ईरान और अफगानिस्तान समेत इन देशों के नागरिकों की वीज़ा प्रक्रिया अस्थायी रूप से रोक दी गई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला उन आवेदकों पर कड़ी निगरानी रखने के उद्देश्य से लिया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली स्पेशल डेस्क</strong></span></p>
<p>अमेरिका ने 75 देशों से आने वाले आवेदकों के लिए वीज़ा प्रोसेसिंग पर बड़ा कदम उठाया है। रूस, ईरान और अफगानिस्तान समेत इन देशों के नागरिकों की वीज़ा प्रक्रिया अस्थायी रूप से रोक दी गई है।</p>
<p>अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला उन आवेदकों पर कड़ी निगरानी रखने के उद्देश्य से लिया गया है, जिनके अमेरिका में ‘पब्लिक चार्ज’ बनने की संभावना अधिक मानी जा रही है।</p>
<p>अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे इमिग्रेशन कानून के तहत ऐसे मामलों में वीज़ा देने से इनकार करें। जिन देशों पर यह रोक लगाई गई है, उनमें रूस, सोमालिया, अफगानिस्तान, इराक, मिस्र, ब्राजील, ईरान, नाइजीरिया, थाईलैंड और यमन जैसे देश शामिल हैं। यह रोक 21 जनवरी से प्रभावी होगी।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>सोमालिया पर विशेष निगरानी</strong></span></p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, मिनियापोलिस में सामने आए एक बड़े धोखाधड़ी मामले के बाद सोमालिया को लेकर अमेरिकी प्रशासन सतर्क है।</p>
<p>इस मामले में टैक्सपेयर्स के पैसों से चलने वाले सरकारी बेनिफिट प्रोग्राम्स के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का खुलासा हुआ था। जांच में शामिल कई आरोपी सोमाली नागरिक या सोमाली-अमेरिकी बताए जा रहे हैं।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-334567" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2026/01/trump-2.jpg" alt="" width="570" height="375" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2026/01/trump-2.jpg 570w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2026/01/trump-2-300x197.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2026/01/trump-2-310x205.jpg 310w" sizes="(max-width: 570px) 100vw, 570px" /></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>क्यों लिया गया यह फैसला?</strong></span></p>
<p>दरअसल, नवंबर 2025 में अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने दुनिया भर के दूतावासों को एक केबल भेजकर कांसुलर अधिकारियों को इमिग्रेशन कानून के ‘पब्लिक चार्ज’ प्रावधान के तहत नए स्क्रीनिंग नियम लागू करने के निर्देश दिए थे।</p>
<p>इस गाइडलाइन के तहत उन आवेदकों को वीज़ा देने से इनकार किया जा सकता है, जिनके सरकारी सहायता और पब्लिक बेनिफिट्स पर निर्भर रहने की आशंका हो।</p>
<p>स्क्रीनिंग के दौरान आवेदक की सेहत, उम्र, अंग्रेजी दक्षता और लंबी अवधि की मेडिकल देखभाल की संभावित जरूरतों जैसे कई पहलुओं का मूल्यांकन किया जाएगा।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>स्टेट डिपार्टमेंट का बयान</strong></span></p>
<p>स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा है कि वह अपनी लंबे समय से चली आ रही कानूनी अथॉरिटी का इस्तेमाल करते हुए ऐसे अप्रवासियों को अयोग्य ठहराएगा, जो अमेरिका पर ‘पब्लिक चार्ज’ बन सकते हैं और सार्वजनिक संसाधनों पर बोझ डालेंगे।</p>
<p>विभाग के अनुसार, इन 75 देशों से इमिग्रेशन तब तक रोका जाएगा, जब तक इमिग्रेशन प्रोसेसिंग प्रक्रियाओं की समीक्षा पूरी नहीं हो जाती, ताकि केवल योग्य आवेदकों को ही प्रवेश दिया जा सके।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ग्रीनलैंड पर ट्रंप के दावे से बढ़ी हलचल, इटली की PM मेलोनी क्या बोलीं?</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/trumps-claim-on-greenland-creates-stir-what-did-italian-pm-meloni-say/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 Jan 2026 11:21:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जुबिली स्पेशल डेस्क वॉशिंगटन/रोम। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि अमेरिका हर हाल में इस द्वीप पर नियंत्रण हासिल करेगा, चाहे यूरोपीय देश सहमत हों या नहीं। ट्रंप का कहना है कि अगर अमेरिका ऐसा नहीं करता, तो रूस या चीन वहां &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली स्पेशल डेस्क</strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>वॉशिंगटन/रोम।</strong></span> अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि अमेरिका हर हाल में इस द्वीप पर नियंत्रण हासिल करेगा, चाहे यूरोपीय देश सहमत हों या नहीं। ट्रंप का कहना है कि अगर अमेरिका ऐसा नहीं करता, तो रूस या चीन वहां अपना प्रभाव बढ़ा सकते हैं, जिसे अमेरिका किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगा।</p>
<p>ट्रंप के इस बयान के बाद इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की प्रतिक्रिया सामने आई है। मेलोनी ने कहा कि उन्हें भरोसा नहीं है कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाने के लिए सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपनाएगा। साथ ही उन्होंने आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए नाटो की मजबूत भूमिका पर जोर दिया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-334495" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2026/01/जॉर्जिया-मेलोनी1-e1768044033659.jpg" alt="" width="600" height="340" /></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>‘ग्रीनलैंड में सैन्य कार्रवाई किसी के हित में नहीं’</strong></span></p>
<p><em><span style="color: #ff6600;"><strong>समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, मेलोनी ने साफ कहा कि ग्रीनलैंड में सैन्य कार्रवाई किसी भी देश के हित में नहीं होगी और इसके नाटो के लिए गंभीर नतीजे हो सकते हैं। उन्होंने दोहराया कि इटली इस तरह के किसी कदम का समर्थन नहीं करेगा और अब भी उन्हें विश्वास नहीं है कि अमेरिका सैन्य बल का इस्तेमाल करेगा।</strong></span></em></p>
<p>इस बीच व्हाइट हाउस ने मंगलवार को कहा कि अमेरिकी प्रशासन ग्रीनलैंड जैसे रणनीतिक और खनिज-समृद्ध द्वीप पर नियंत्रण के लिए विभिन्न ‘विकल्पों’ पर विचार कर रहा है, जिनमें सैन्य कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। ग्रीनलैंड फिलहाल नाटो सहयोगी डेनमार्क का हिस्सा है।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>ट्रंप का फोकस सुरक्षा और रणनीतिक हितों पर: मेलोनी</strong></span></p>
<p>मेलोनी ने कहा कि ट्रंप प्रशासन अपने कुछ आक्रामक बयानों के जरिए ग्रीनलैंड और पूरे आर्कटिक क्षेत्र के रणनीतिक महत्व को रेखांकित कर रहा है। उनके मुताबिक, यह ऐसा इलाका है जहां कई वैश्विक शक्तियां सक्रिय हैं और अमेरिका का संदेश साफ है कि वह किसी भी विदेशी ताकत के बढ़ते प्रभाव को स्वीकार नहीं करेगा।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि नाटो की मजबूत मौजूदगी अमेरिका की सुरक्षा चिंताओं को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>ट्रंप की करीबी मानी जाती हैं मेलोनी</strong></span></p>
<p>जॉर्जिया मेलोनी को यूरोप में डोनाल्ड ट्रंप की करीबी नेताओं में गिना जाता है। वे अक्सर अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच टकराते हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती रही हैं।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>पहले कार्यकाल से ग्रीनलैंड पर नजर</strong></span></p>
<p>गौरतलब है कि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में भी डेनमार्क से ग्रीनलैंड खरीदने का प्रस्ताव रखा था। हाल के घटनाक्रमों और वैश्विक रणनीतिक बदलावों के बीच उन्होंने एक बार फिर ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की मांग को हवा दी है।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यूरोपीय देशों का विरोध</strong></span></p>
<p>ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड और स्पेन समेत कई यूरोपीय देशों ने डेनमार्क के साथ मिलकर ग्रीनलैंड की संप्रभुता का समर्थन किया है। अमेरिका ने भी 20वीं सदी में ग्रीनलैंड पर डेनमार्क के अधिकार को मान्यता दी थी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>रूस का अल्टीमेटम: परमाणु परीक्षण किया तो देंगे ‘तुरंत जवाब’, अमेरिका पर नजर</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/russias-ultimatum-will-respond-immediately-to-nuclear-tests-eyes-on-us/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Oct 2025 13:38:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जुबिली स्पेशल डेस्क दुनिया इस समय राजनीतिक और सैन्य अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। इसी बीच रूस ने परमाणु परीक्षण करने की सोच रखने वाले देशों को कड़ी चेतावनी दी है। रूस के उपविदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने कहा है कि अगर कोई देश परमाणु परीक्षण करने का “गलत और अस्थिर करने वाला” &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली स्पेशल डेस्क</strong></span></p>
<p>दुनिया इस समय राजनीतिक और सैन्य अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। इसी बीच रूस ने परमाणु परीक्षण करने की सोच रखने वाले देशों को कड़ी चेतावनी दी है।</p>
<p>रूस के उपविदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने कहा है कि अगर कोई देश परमाणु परीक्षण करने का “गलत और अस्थिर करने वाला” फैसला लेता है, तो रूस तुरंत और कड़े कदम उठाएगा।</p>
<p><span style="color: #ff6600;"><em><strong>रयाबकोव ने बिना नाम लिए अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि वॉशिंगटन लंबे समय से अपने परमाणु परीक्षण ढांचे को “युद्धकालीन स्थिति” में तैयार रखता आया है। उन्होंने कहा, “हमने पहले भी इस पर ध्यान दिया था, खासकर जब हमने न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी (New START) पर निर्णय लिया था।”</strong></em></span></p>
<p>रूस की यह बयानबाज़ी उस समय आई है जब पश्चिमी देशों में परमाणु कार्यक्रमों को लेकर हलचल बढ़ी है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में वल्दाई इंटरनेशनल डिस्कशन क्लब में कहा था कि “हमें जानकारी है कि कुछ देश परमाणु परीक्षणों की तैयारी कर रहे हैं। अगर ऐसा हुआ, तो रूस भी पीछे नहीं रहेगा।”</p>
<p>रूस की यह चेतावनी सीधे तौर पर अमेरिका को संबोधित मानी जा रही है। दरअसल, यूक्रेन युद्ध के चलते दोनों देशों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हैं। अमेरिकी नेतृत्व रूस पर युद्ध समाप्त करने का दबाव बना रहा है, जबकि रूस साफ कर चुका है कि वह अपनी शर्तों पर ही युद्ध विराम चाहता है।</p>
<p>कूटनीतिक हलकों में इसे रूस का संदेश माना जा रहा है कि अगर अमेरिका या उसके सहयोगी परमाणु ताकत के ज़रिए दबाव बनाने की कोशिश करते हैं, तो मॉस्को भी “संतुलित जवाब” देने से पीछे नहीं हटेगा।</p>
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