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	<title>Jubilee Post &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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	<description>News &#38; Information Portal</description>
	<lastBuildDate>Tue, 31 Jan 2023 04:28:54 +0000</lastBuildDate>
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		<title>IMF ने बताया साल 2023 में भारत की GDP क्या रहेगी ?</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/inflation-in-india-to-decline-to-5-in-2023-4-in-2024-imf/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 31 Jan 2023 04:28:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[अर्थ संवाद]]></category>
		<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
		<category><![CDATA[Global economy]]></category>
		<category><![CDATA[IMF]]></category>
		<category><![CDATA[India GDP Prediction]]></category>
		<category><![CDATA[International Monetary Fund]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली स्पेशल डेस्क वाशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड,IMF) ने मंगलवार भारत की मुद्रास्फीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया है कि वित्तवर्ष में मुद्रास्फीति क्या रह सकती है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की माने तो 31 मार्च को खत्म हो रहे वित्तवर्ष में मुद्रास्फीति 6.8 फीसदी से घटकर 5 फीसदी जा सकती &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली स्पेशल डेस्क</strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>वाशिंगटन।</strong></span> अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड,IMF) ने मंगलवार भारत की मुद्रास्फीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया है कि वित्तवर्ष में मुद्रास्फीति क्या रह सकती है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की माने तो 31 मार्च को खत्म हो रहे वित्तवर्ष में मुद्रास्फीति 6.8 फीसदी से घटकर 5 फीसदी जा सकती है। इतना ही नहीं 2024 में यह और घटकर 4 फीसदी पर आ सकती है।</p>
<p>IMF के रिसर्च डिपार्टमेंट में डिवीज़न चीफ़ डैनियल ली ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, &#8220;अन्य देशों की ही तरह भारत में भी मुद्रास्फीति के 2022 में 6.8 फीसदी से घटकर 2023 में 5 फीसदी पर आने का अनुमान है, और फिर 2024 में यह 4 फीसदी तक जा सकती है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-233241" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/08/GDP-e1630427100422.jpg" alt="" width="600" height="339" /></p>
<p>विश्व अर्थव्यवस्था को लेकर IMF ने बताया है कि ग्लोबल ग्रोथ साल 2023 में पहले की अपेक्षा में कम रहने की संभावना है। IMF के मुताबिक वर्ल्ड इकोनॉमी साल 2023 में 2.9 फीसदी की दर से बढ़ेगी।</p>
<p>जबकि 2022 में इसका अनुमान 3.4 फीसदी था। वहीं साल 2024 की बात करें तो में विश्व की अर्थव्यवस्था में फिर एक बार तेजी देखी जा सकती है और यह 3.1 फीसदी के दर से बढ़ सकती है।</p>
<p>वहीं भारत की अर्थव्यवस्था की बात करें तो इस तिमाही में भारत की इकोनॉमी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली इकोनॉमी होगी। भारत की अर्थव्यवस्था मौजूदा तिमाही में 6.8 फीसदी की दर से बढ़ रही है, जो अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 6.1 फीसदी रहने की संभावना है।</p>
<p>कोरोना संकट के बीच देश की अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर आती नज़र आ रही है। भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) में भी सुधर देखने को मिल रहा है। वित्त वर्ष 2021 -22 की दूसरी तिमाही में 8.4 प्रतिशत GDP ग्रोथ के आंकड़े सामने आए हैं।</p>
<p>बता दे कि मोदी सरकार के लिए कोरोना संकट के बीच लगातार दूसरी तिमाही में जीडीपी के मोर्चे को लेकर अच्छी खबर आ रही है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के जारी आंकड़े के अनुसार चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 8.4 फीसदी जा पहुंची है।</p>
<p>इससे पहले कोरोना संकट के बीच देश की अर्थव्यवस्था में चालू वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही जुलाई- सितंबर में 7.5 प्रतिशत की गिरावट आई थी. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के जारी आंकड़े के अनुसार इससे पूर्व वित्त वर्ष 2019-20 की इसी तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 4.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>क्या 10 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बन सकता है INDIA</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/can-india-become-a-10-trillion-dollar-economy/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 14 Oct 2022 04:58:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[अर्थ संवाद]]></category>
		<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
		<category><![CDATA[#india News in Hindi]]></category>
		<category><![CDATA[IMF]]></category>
		<category><![CDATA[indian economy]]></category>
		<category><![CDATA[National News In Hindi]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली स्पेशल डेस्क नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने एक बड़ा बयान दिया है। दरसअल भारत इस वक्त 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए लगा हुआ लेकिन अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) का कुछ और कहना है। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के अनुसार इसमें 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था पाने का हुनर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली स्पेशल डेस्क</strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>नई दिल्ली।</strong></span> भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने एक बड़ा बयान दिया है। दरसअल भारत इस वक्त 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए लगा हुआ लेकिन अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) का कुछ और कहना है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के अनुसार इसमें 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था पाने का हुनर है। आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे ओलिवर गोरिंचेस ने बुधवार को भारत के डिजिटलीकरण के प्रयासों की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि यह कदम बहुत बड़ा बदलाव लाने वाला रहा है क्योंकि इससे भारत सरकार के लिए ऐसे काम करना संभव हुआ है जो अन्यथा बेहद कठिन होते।</p>
<p>आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री भारत को लेकर जो कहा है वो शायद भारत का हौंसला बढ़ा सकता है। गोरिंचेस ने कहा कि भारत ऐसे वक्त में एक चमकदार रोशनी की तरह उभरा है जब दुनिया मंदी के आसन्न संकट का सामना कर रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि 10,000 अरब डॉलर (10 ट्रियल डॉलर) की अर्थव्यवस्था बनने के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पाने के लिए भारत को महत्वपूर्ण ढांचागत सुधार करने होंगें।</p>
<p>हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस लक्ष्य को पाया जा सकता है।अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा कि देश जटिल मुद्दों का समाधान निकालने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने के लिहाज से सबसे प्रेरणादायी मिसाल पेश कर रहा है और इस देश की बहुत सी बातें सीखने लायक हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-200811" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/12/economy-package-e1631100995914.jpg" alt="" width="600" height="337" /></p>
<p>आईएमएफ के प्रवक्ता गेरी राइस ने इससे पहले पिछले साल कहा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था क्रमिक सुधार की राह पर है और 2020 की चौथी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि फिर से सकारात्मक हो सकती है। ऐसा महामारी की शुरुआत के बाद पहली बार होगा और यह सकल, स्थिर पूंजी निर्माण में बढ़ोतरी द्वारा समर्थित है।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>ये भी पढ़े:<a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/vigilance-on-holi-check-infection-of-people-coming-from-other-states-cm-yogi/">होली पर बरते सतर्कता, दूसरे राज्यों से आने वालों में संक्रमण की करें जांच: CM योगी</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>ये भी पढ़े:<a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/player-gets-his-home-pda-gives-relief-after-up-minister-self-cognizance/">नेशनल हॉकी खिलाड़ी घर से हुआ था बेघर लेकिन अब मिली राहत</a></strong></span></p>
<p>राइस ने कहा था इसके अलावा, इस साल की पहली तिमाही में पीएमआई व्यापार और गतिशीलता सहित उच्च आवृत्ति संकेतक लगातार सुधार के संकेत दे रहे हैं। हालांकि, हाल में आए वेरिएंट और स्थानीय स्तर पर लागू होने वाले लॉकडाउन के चलते जोखिम भी पैदा हुए हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जलवायु परिवर्तन के लिहाज़ से जी 7 सम्मेलन ने फेरा उम्मीदों पर पानी</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/g7-disappointed-climate-change/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Utkarsh Sinha]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Jun 2021 10:29:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[ओपिनियन]]></category>
		<category><![CDATA[जुबिली डिबेट]]></category>
		<category><![CDATA[IMF]]></category>
		<category><![CDATA[TRIPS]]></category>
		<category><![CDATA[ग्रीनपीस]]></category>
		<category><![CDATA[जलवायु परिवर्तन]]></category>
		<category><![CDATA[जी7 सम्मेलन]]></category>
		<category><![CDATA[जेनिफ़र मॉर्गन]]></category>
		<category><![CDATA[रेचल कायट]]></category>
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					<description><![CDATA[डॉ. सीमा जावेद   अब तक ऐसा सोचा जा रहा था कि जलवायु परिवर्तन रोकने में  जी7 सम्मेलन मील का पत्थर साबित होगा लेकिन सम्मलेन ने इन  तमाम उम्मीदों पर पानी फेर दिया ।   G7 नेताओं ने जलवायु, कोविड और प्रकृति के पतन के तिहरे संकटों से निपटने का एक ऐतिहासिक अवसर को खो दिया है, यह मानना है प्रमुख विश्लेषकों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>डॉ. सीमा जावेद  </strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft wp-image-199221 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/12/seema-bhabhi-150x150-1.jpg" alt="" width="150" height="150" />अब तक ऐसा सोचा जा रहा था कि जलवायु परिवर्तन रोकने में  जी7 सम्मेलन मील का पत्थर साबित होगा लेकिन सम्मलेन ने इन  तमाम उम्मीदों पर पानी फेर दिया ।   G7 नेताओं ने जलवायु, कोविड और प्रकृति के पतन के तिहरे संकटों से निपटने का एक ऐतिहासिक अवसर को खो दिया है, यह मानना है प्रमुख विश्लेषकों का कॉर्नवाल शिखर सम्मेलन के समापन के बाद।</p>
<p>उनका कहना है कि यदि ये नेतागण अक्टूबर में होने वाली G20 बैठक तक एकजुट नहीं होते हैं, तो COP26 बैठक का विफल होना तय है। फ़िलहाल सितंबर में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा अब COP26 से पहले G7 नेताओं के लिए महत्वपूर्ण तारीख के रूप में निर्धारित की गई है।</p>
<p>अपनी प्रतिक्रिया देते हुए <strong>ग्रीनपीस की कार्यकारी निदेशक</strong><strong>, </strong><strong>जेनिफ़र मॉर्गन</strong><strong>, </strong><strong>कहती हैं</strong>, “हर कोई कोविड-19 और बिगड़ते जलवायु प्रभावों की चपेट में आ रहा है, लेकिन G7 नेताओं के इस रवैय्ये से सबसे ज़्यादा परेशानी होगी उन्हें जो सबसे कमज़ोर हैं और सबसे ख़राब स्थिति में है। G7 बैठक एक सफ़ल COP26 के लिए भूमिका स्थापित करने में विफल रही है क्योंकि अमीर और विकासशील देशों के बीच विश्वास की कमी है। इस आवश्यक बहुपक्षीय भरोसे के पुनर्निर्माण का अर्थ है पीपुल्स वैक्सीन (जनता के टीके) के लिए TRIPS छूट का समर्थन करना, सबसे कमज़ोर देशों के लिए जलवायु वित्त के लिए प्रतिबद्धताओं को पूरा करना और जीवाश्म ईंधन को हमेशा के लिए राजनीति (के दायरे) से बाहर करना।&#8221;</p>
<p>आगे, <strong>टफ्ट्स फ्लेचर स्कूल में डीन और संयुक्त राष्ट्र की पूर्व जलवायु प्रतिनिधि रेचल कायट</strong>, कहती हैं, &#8221; हमें संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा क्लाइमेट एक्शन के लिए $ 100 बिलियन को एक वास्तविकता बनाने के लिए एक विस्तृत योजना की आवश्यकता है। यह जलवायु कूटनीति के लिए एक बड़ा वर्ष है और G7 सदस्यों को जुलाई में G20 वित्त बैठक, सितंबर में UNGA, कुनमिंग में COP15, नवंबर में ग्लासगो पहुंचने से पहले अक्टूबर में IMF (आईएमएफ)/विश्व बैंक की वार्षिक बैठकें और G20 में अच्छा ख़ासा प्रभाव बनाना होगा।”</p>
<p>इसी क्रम में,<strong> </strong><strong>तस्नीम एस्सोप</strong><strong>, </strong><strong>कार्यकारी निदेशक</strong><strong>, </strong><strong>क्लाइमेट एक्शन इंटरनेशनल</strong><strong>, </strong><strong>के मुताबिक़</strong>, &#8220;G7 शिखर सम्मेलन के परिणाम दुनिया के सामने आने वाले वैश्विक संकटों को दूर करने के लिए सक्षम नहीं हैं। और यह संकट हैं एक ऐतिहासिक महामारी जिसने चार मिलियन लोगों की जान ले ली है और अरबों को जोखिम में डाला है, विशेष रूप से गरीब देशों में बिना टीका लगी हुए आबादी; और तीव्र होते विनाशकारी जलवायु प्रभाव और तेल और गैस सहित जीवाश्म ईंधन पर विनाशकारी निर्भरता से जुड़ी हानि और क्षति। सबसे अमीर देशों को तत्काल कोविड-19 टीकों और उपचारों पर पेटेंट हटाने के लिए सहमत होना चाहिए और वैश्विक स्तर पर वैक्सीन निर्माण में तेज़ी लाने के लिए संसाधन और प्रौद्योगिकी प्रदान करने की योजना को लागू करना चाहिए।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-200881 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/12/climate-jubilee-2.jpg" alt="" width="740" height="582" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/12/climate-jubilee-2.jpg 740w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/12/climate-jubilee-2-300x236.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 740px) 100vw, 740px" /></p>
<p>टीकों की खुराक दान करना, हालांकि इरादा अच्छा है, पर इस महामारी को खत्म करने के लिए एक कुशल, न्यायसंगत या तेज़ रास्ता नहीं है। जलवायु वित्त पर, एक दशक पहले वादा किया गया था $100 बिलियन का लेकिन आज तक वो पूरा नहीं हुआ सही मायनों में। COP26 से पहले विश्वास बनाने और पिछले दायित्वों को पूरा करने के लिए यह एक आवश्यक न्यूनतम राशि है। अमीर देशों को मौजूदा दायित्वों को दोहराने से परे जाना चाहिए और नया और अतिरिक्त वित्त आगे बढ़ाना चाहिए। हमें याद रखना चाहिए के  $100 बिलियन एकमुश्त भुगतान नहीं है। यह एक सतत वार्षिक प्रतिबद्धता है जिसकी अमीर देशों द्वारा पेरिस समझौते में सहमति व्यक्त की गई है ताकि वे अपना उचित हिस्सा करें और खरबों में वित्त जुटाएं ताकि हम इस दशक में वार्मिंग को 1.5C डिग्री के भीतर रखना चाहते हैं ।&#8221;</p>
<p>कॉर्नवाल में हुई इस बैठक में प्रत्येक G7 देश ने 2025 तक जलवायु वित्त को बढ़ाने और सुधारने के लिए प्रतिबद्धता तो दी, लेकिन केवल कुछ ने ही स्पष्ट नई प्रतिज्ञा की पेशकश की। कनाडा भी जलवायु वित्त योगदान में वृद्धि करने वाले देशों में शामिल है, जबकि अन्य ने कहा कि वे COP26 से पहले के वादों की समीक्षा करेंगे। नेताओं ने 2021 तक कोयले के सार्वजनिक वित्तपोषण को समाप्त करने पर सहमति तो व्यक्त की &#8211; कनाडा, जर्मनी, यूके और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा  $ 2 बिलियन का कोयला संक्रमण कोष वापस करने के लिए सहमत होने के साथ। यह सौदा चीन को दुनिया के सबसे गंदे जीवाश्म ईंधन के दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक समर्थक के रूप में अकेला छोड़ देता है।</p>
<p>G7 नेताओं ने चीन के बेल्ट एंड रोड के लिए एक हरित विकल्प की पेशकश की &#8211; लेकिन G7 &#8216;मार्शल प्लान&#8217; या &#8216;बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड&#8217; पहल को तत्काल विवरण की आवश्यकता है, जिसे सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दिया जाना चाहिए।</p>
<blockquote><p><strong><span style="color: #ff0000;">इस पर हॉफमैन डिस्टिंग्विश्ड फेलो फॉर सस्टेनेबिलिटी एंड रिसर्च डायरेक्टर &#8211; फ्यूचर्स एट चैथम हाउस, बर्नीस ली ने कहा, “G7 को कोयले के साम्राज्य का मुंह मोड़ते देखना अच्छा है &#8211; लेकिन केवल शब्द पर्याप्त नहीं हैं। उन्हें अब वैश्विक स्वच्छ साझेदारी के बारे में गंभीर होने की जरूरत है जो विकासशील देशों के लिए फायदेमंद हो। हम जिन अनेक संकटों का सामना कर रहे हैं, उन्हें देखते हुए G7 और चीन को 2020 तक भागीदारी बनानी होगा &#8211; यदि बीजिंग और कॉर्नवाल के नेताओं को सहयोग करने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा है, तो हम एक अंधकारमय भविष्य का सामना कर रहे हैं।”</span></strong></p></blockquote>
<p>आगे,<strong> E3G </strong><strong>वरिष्ठ सहयोगी</strong><strong>, </strong><strong>एल्डन मेयर</strong>, ने कहा, &#8221;बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड पहल बयानबाजी पर ज़ररदस्त है, लेकिन इस बारे में विवरण पर संक्षिप्त है कि वे अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक खरबों डॉलर कैसे जुटाएंगे। G7 नेता इस नवंबर में ग्लासगो में जलवायु शिखर सम्मेलन के लिए बहुत सारे होमवर्क के साथ कॉर्नवाल छोड़ते हैं, अगर उन्हें नेतृत्व दिखाना है तो दुनिया को जलवायु आपातकाल का सामना करने की सख्त जरूरत है।”</p>
<p>विश्लेषकों के मत जान यक़ीनन ऐसा लगता है कि वादे करना तो आसान है, उन्हें निभाना मुश्किल। और ऐसा ही कुछ जी7 प्रतिनिधियों ने किया है। जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ जंग में एक मोर्चे पर शायद हार दर्ज हुई इस सम्मेलन की शक्ल में।</p>
<p><em>(लेखिका वरिष्ठ पत्रकार और पर्यावरणविद हैं )</em></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भारतीय अर्थव्यवस्था सुधार के रास्ते पर: IMF</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/indian-economy-on-the-path-of-reform-imf/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ali Raza]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Mar 2021 12:47:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अर्थ संवाद]]></category>
		<category><![CDATA[economy]]></category>
		<category><![CDATA[gdp]]></category>
		<category><![CDATA[GDP growth may be positive for Indian economy on path of reform: IMF]]></category>
		<category><![CDATA[Gerry Rice]]></category>
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		<category><![CDATA[कारात्मक हो सकती है GDP वृद्धिः IMF]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज़ डेस्क अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने विश्व बैंक के साथ अगले महीने होने वाली बैठक से पहले कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था क्रमिक सुधार के रास्ते पर है। आईएमएफ के प्रवक्ता गेरी राइस ने कहा भारतीय अर्थव्यवस्था क्रमिक सुधार की राह पर है और 2020 की चौथी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि फिर से सकारात्मक &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #333399;"><strong>जुबिली न्यूज़ डेस्क</strong> </span></p>
<p>अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने विश्व बैंक के साथ अगले महीने होने वाली बैठक से पहले कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था क्रमिक सुधार के रास्ते पर है। आईएमएफ के प्रवक्ता गेरी राइस ने कहा भारतीय अर्थव्यवस्था क्रमिक सुधार की राह पर है और 2020 की चौथी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि फिर से सकारात्मक हो सकती है। ऐसा महामारी की शुरुआत के बाद पहली बार होगा और यह सकल, स्थिर पूंजी निर्माण में बढ़ोतरी द्वारा समर्थित है।</p>
<p>राइस ने कहा इसके अलावा, इस साल की पहली तिमाही में पीएमआई व्यापार और गतिशीलता सहित उच्च आवृत्ति संकेतक लगातार सुधार के संकेत दे रहे हैं। हालांकि, हाल में आए वेरिएंट और स्थानीय स्तर पर लागू होने वाले लॉकडाउन के चलते जोखिम भी पैदा हुए हैं। आईएमएफ छह अप्रैल को अपना विश्व आर्थिक परिदृश्य जारी करने वाला है।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>ये भी पढ़े:<a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/vigilance-on-holi-check-infection-of-people-coming-from-other-states-cm-yogi/">होली पर बरते सतर्कता, दूसरे राज्यों से आने वालों में संक्रमण की करें जांच: CM योगी</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>ये भी पढ़े:<a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/player-gets-his-home-pda-gives-relief-after-up-minister-self-cognizance/">नेशनल हॉकी खिलाड़ी घर से हुआ था बेघर लेकिन अब मिली राहत</a></strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-91456" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/imf.jubilee.jpg" alt="" width="829" height="559" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/imf.jubilee.jpg 550w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/imf.jubilee-300x202.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/imf.jubilee-110x75.jpg 110w" sizes="auto, (max-width: 829px) 100vw, 829px" /></p>
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<p>मालूम हो कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कर्ज में डूबे पाकिस्तान को 50 करोड़ डॉलर का कर्ज देने को मंजूरी दे दी है। पाक अखबार डॉन ने आईएमएफ के अधिकारियों के हवाले से बताया कि पाक को आने वाले समय में दी जाने वाली यह रकम पहले मंजूर किए गए कर्ज की तीसरी किश्त के तौर पर दी जाएगी।</p>
<p>पाकिस्तान को छह अरब डॉलर के ऋण कार्यक्रम की समीक्षा करने के बाद ये फैसला आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने लिया है। हालांकि समीक्षा कई बार टाले जाने के बाद अब जाकर पूरी हुई है। आईएमएफ ने कहा है कि इस कार्यक्रम को जुलाई 2019 में मंजूरी मिली थी।</p>
<p>इससे पहले मूडीज एनालिटिक्स ने यह अनुमान लगाया था कि देश की अर्थव्यवस्था 2021 के कैलेंडर वर्ष में 12 फीसदी की वृद्धि दर्ज करेगी। मूडीज ने कहा था कि पिछले साल 7.1 फीसदी की गिरावट के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था की निकट भविष्य की संभावनाएं अधिक अनुकूल हो गई हैं।</p>
<p>दिसंबर 2020 को समाप्त तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 0.4 फीसदी रही है। यह प्रदर्शन उम्मीद से कहीं बेहतर है। इससे पिछली तिमाही में अर्थव्यवस्था में 7.5 फीसदी की गिरावट आई थी। मूडीज ने कहा कि अंकुशों में ढील के बाद देश और विदेश की मांग सुधरी है। इससे हालिया महीनों में विनिर्माण उत्पादन बढ़ा है।</p>
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		<title>आर्थिक सुस्ती के बीच IMF ने भारत को फिर चेताया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Ali Raza]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Dec 2019 06:25:30 +0000</pubDate>
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<p>भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कुछ दिन पहले कहा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय सुस्ती के चंगुल में फंसी है और इसमें बेचैनी और अस्वस्थता के गहरे संकेत दिखायी दे रहे हैं। इसे फिर से पटरी पर लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत को जल्द से जल्द बड़े कदम उठाने के लिए कहा है।</p>
<p>आईएमएफ का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था, ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ाने वाली अर्थव्यवस्था में से एक है, इसीलिए भारत को तेजी से कदम उठाने होंगे। आईएमएफ ने अपनी सालाना समीक्षा में बताया कि खपत और निवेश में गिरावट, टैक्स राजस्व में कमी से भारत की आर्थिक ग्रोथ को झटका लगा है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-91456 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/imf.jubilee.jpg" alt="" width="550" height="371" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/imf.jubilee.jpg 550w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/imf.jubilee-300x202.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/imf.jubilee-110x75.jpg 110w" sizes="auto, (max-width: 550px) 100vw, 550px" /></p>
<p>आईएमएफ की एशिया और प्रशांत की हेड रानिल सालगाडो का कहना है कि लाखों को गरीबी से बाहर लाने के बाद भारत अब आर्थिक सुस्ती के बीच है। मौजूदा स्लोडाउन को दूर करने और फिर से आर्थिक ग्रोथ की पटरी पर लौटने के लिए भारत को तुरंत नीतिगत उपायों की आवश्यकता है। हालांकि सरकार के पास डेवल्पमेंट पर खर्च के जरिए बढ़ावा देने के लिए सीमित विकल्प हैं।</p>
<p>आईएमएफ की चीफ इकोनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ ने कहा कि वित्त वर्ष 2019-20 की दिसंबर और मार्च तिमाही में भी आर्थिक ग्रोथ कमजोर बनी रहेगी। गोपीनाथ ने कहा कि पहले हमें मौजूदा वित्त वर्ष की बाकी दो तिमाहियों में तेजी की उम्मीद थी। लेकिन अब रिकवरी मुश्किल नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए हमें पुराने अनुमान बदलने पड़े हैं। आईएमएफ 20 जनवरी 2020 को भारत के आर्थिक ग्रोथ के आउटलुक पर एक रिपोर्ट जारी करेगा।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-142059 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/12/modi-cabinate-2.jpg" alt="" width="629" height="362" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/12/modi-cabinate-2.jpg 629w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/12/modi-cabinate-2-300x173.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 629px) 100vw, 629px" /></p>
<p>गीता गोपीनाथ का मानना है कि कुछ मुश्किलें आसानी से दूर नहीं हो सकती हैं। इनमें बैंकिंग सेक्टर की समस्याएं हैं जो सिर्फ इंडिया नहीं बल्कि दुनिया भर की हैं। उन्होंने कहा, भारत के मामले में कुछ मसले ऐसे हैं जिन्हें इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड कोड के जरिए ठीक किया जा सकता है।</p>
<p>बैंकिंग सेक्टर के आसपास कई तरह की अनिश्चितताएं हैं जिनकी वजह से बैंकों की रिस्क लेने की क्षमता घटी हैं और इसका असर क्रेडिट ग्रोथ पर भी नजर आ रहा है। ग्रामीण इलाकों में आमदनी और पैदावार घटने की वजह से उपभोग भी घटा है।</p>
<p>गोपीनाथ ने कहा कि रिजर्व बैंक ने इस साल रेपो रेट में कुल 1.35 फीसदी की कटौती की है। उन्होंने कहा कि सिस्टम की रफ्तार बढ़ाने के लिए बहुत है। गोपीनाथ ने यह भी कहा है कि इस फिस्कल ईयर में नहीं लेकिन अगले फिस्कल ईयर में रिवाइवल की उम्मीद हैं।</p>
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