<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Jubilee Post &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
	<atom:link href="https://www.jubileepost.in/tag/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.jubileepost.in/</link>
	<description>News &#38; Information Portal</description>
	<lastBuildDate>Wed, 25 Nov 2020 09:44:03 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>
	<item>
		<title>क्या वाकई बंगाल में ममता को चुनौती दे पाएंगे ओवैसी ?</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/will-owaise-gave-a-tough-fight-to-mamata/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Utkarsh Sinha]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Nov 2020 09:44:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[तुष्टिकरण]]></category>
		<category><![CDATA[बंगाल में मुस्लिम वोटर]]></category>
		<category><![CDATA[बांग्ला राष्ट्रवाद]]></category>
		<category><![CDATA[ममता बनर्जी]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दू राष्ट्रवाद]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.jubileepost.in/?p=198122</guid>

					<description><![CDATA[उत्कर्ष सिन्हा जब से बिहार में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने 5 सीटें जीती हैं तब से ये कयास लगाए जाने लगे हैं कि वे बंगाल में ममता बनर्जी के मजबूत किले में दरार डाल देंगे, मगर क्या वाकई ओवैसी कि ताकत इतनी बड़ी है ? ये एक सवाल है जिसका जवाब बंगाल के नतीजों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>उत्कर्ष सिन्हा</strong></span></p>
<p>जब से बिहार में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने 5 सीटें जीती हैं तब से ये कयास लगाए जाने लगे हैं कि वे बंगाल में ममता बनर्जी के मजबूत किले में दरार डाल देंगे, मगर क्या वाकई ओवैसी कि ताकत इतनी बड़ी है ? ये एक सवाल है जिसका जवाब बंगाल के नतीजों में मिलेगा ।</p>
<p>तात्कालिक परिस्थितियों के अनुसार तो पहली प्रतिक्रिया यही मिल रही है कि ओवैसी बंगाल में मुसलमान वोटरों को लुभाने में कामयाब होंगे , मगर आँकड़े समझने वाले लोग इसे नहीं मानते।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>बिहार में जिन 20 सीटों पर ओवैसी के उम्मीदवार मैदान में थे उनमे से 5 जीते जरूर, मगर ये भी एक तथ्य है कि 14 सीटों पर जमानत भी जब्त हो गई। जिन 5 सीटों पर ओवैसी को कामयाबी मिली थी वे प्रत्याशी स्थानीय स्तर के मजबूत नेता थे जिनके पास अपना भी वोट बैंक था।</strong></span></p></blockquote>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का एक धड़ा इस बात को सामने रख कर यह कह रहा है कि 5 सीटों की ये कामयाबी बताती है कि दरअसल ओवैसी का कोई बड़ा प्रभाव नहीं बन पा रहा है।</p>
<p><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-198123 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/Mamta-owaisi.jpg" alt="" width="1024" height="576" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/Mamta-owaisi.jpg 1024w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/Mamta-owaisi-300x169.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/Mamta-owaisi-768x432.jpg 768w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<p>बंगाल में ममता बनर्जी ने भी इसे शायद ठीक से समझ लिया है और इसीलिए उन्होंने ओवैसी की पार्टी के बड़े नेताओं को अपने पाले में खींचना शुरू कर दिया है।</p>
<p>ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के 20 बड़े नेताओं को अपने पाले में कर लिया है जिनमे एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अनवर पाशा भी शामिल हैं।</p>
<p>तृणमूल में शामिल होने के वक्त पाशा ने कहा &#8211; &#8220;ममता बनर्जी भारत में सबसे अधिक धर्मनिरपेक्ष नेता हैं. वह देश की अकेली नेता हैं जो एनआरसी का विरोध करने के लिए सड़क पर उतरी थीं.&#8221;</p>
<p>इतना ही नहीं अनवर पाशा ने विपक्ष के उन आरोपों को भी दुहराया दिया जिसके मुताबिक एआईएमआईएम वोटों का ध्रुवीकरण कर बीजेपी को मदद पहुंचा रही है, और ये बीजेपी की बी टीम की तरह काम करती है।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>बंगाल में मुस्लिम वोटरों की अहमियत को इस तरह से समझा जा सकता है कि बंगाल में मुसलमानों की आबादी कुल आबादी का करीब 30 फीसदी मुस्लिम वोटर विधानसभा की 100 से 110 सीटों पर निर्णायक स्थिति में हैं। मुर्शिदाबाद में 67 प्रतिशत, उत्तर दिनाजपुर में 51 प्रतिशत, मालदा में 52 प्रतिशत और दक्षिण दिनाजपुर में 49.92 प्रतिशत मुस्लिम वोटर हैं। इस इलाके में  विधानसभा की 34 सीटें हैं। बंगाल में वामपंथी किला ढहने के बाद बीते कई सालों से ये तृणमूल कांग्रेस का ठोस वोट बैंक बन चुका है।</strong></span></p></blockquote>
<p>तृणमूल इस खतरे को ठीक से समझती है कि ओवैसी ने अगर इन सीटों पर मजबूत स्थानीय नेता उतारे तो उसकी राहें बहुत मुश्किल हो जाएंगी, इसी लिए ममता बैनर्जी ने फिलहाल एआईएमआईएम  के नेताओं को अपने पाले में लाने की कवायद शुरू कर दी है।</p>
<p>भाजपा के हिन्दू राष्ट्रवाद के खिलाफ बांग्ला राष्ट्रवाद को अपना हथियार बना रही ममता का ये भी मानना है कि बंगाली मुसलमानों पर ओवैसी का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और वे अपने बूते ही 200 से ज्यादा सीटें जीतने की स्थिति में हैं इसलिए ओवैसे जैसों से गठबंधन करने का कोई प्रश्न ही नहीं पैदा होता।</p>
<p>इस बीच ममता बनर्जी ने अल्पसंख्यकों के लिए दर्जनों योजनाएं शुरू कर दी हैं जिसमे  अल्पसंख्यकों के मदरसों को सरकारी सहायता, इस तबके के छात्रों के लिए स्कॉलरशिप और मौलवियों को आर्थिक मदद भी शामिल है। इसी वजह से बीजेपी समेत तमाम राजनीतिक दल उनके खिलाफ तुष्टिकरण की राजनीति के आरोप लगाते रहे हैं।</p>
<p>लेकिन इसके बरक्स ममता ने बंगाल के सबसे बड़े धार्मिक उत्सव दुर्गा पूजा में लगाने वाले पंडालों को भी दिल खोल कर रकम दी है।</p>
<p>बंगाल फतह करने को बेचैन बीजेपी की उम्मीदें भी ओवैसी पर लगी हुई हैं। यदि ओवैसी की पार्टी ने 100 सीटों पर तृणमूल को 5 प्रतिशत वोटों का भी नुकसान कर दिया तो ममता बनर्जी के लिए हालात मुश्किल हो जाएंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>हिन्दू राष्ट्रवाद बनाम बांग्ला राष्ट्रवाद की लड़ाई में फंसा बंगाल </title>
		<link>https://www.jubileepost.in/hindu-vs-bangla-nationalism/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Utkarsh Sinha]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 May 2019 10:08:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[ओपिनियन]]></category>
		<category><![CDATA[जुबिली डिबेट]]></category>
		<category><![CDATA[अमित शाह]]></category>
		<category><![CDATA[ईश्वर चंद्र विद्यासागर]]></category>
		<category><![CDATA[नागरिकता रजिस्टर]]></category>
		<category><![CDATA[बंगाली]]></category>
		<category><![CDATA[बांग्ला राष्ट्रवाद]]></category>
		<category><![CDATA[ममता बनर्जी]]></category>
		<category><![CDATA[सोशल मीडिया]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दू राष्ट्रवाद]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.jubileepost.in/?p=103985</guid>

					<description><![CDATA[उत्कर्ष सिन्हा  कभी बंगाल कम्युनिष्टो के लाल झंडे से भरा रहता था  लेकिन फिलहाल चल रहे लोकसभा चुनावो में बंगाल की जमीन हिंसा से लाल हो रही है। कोलकाता में मंगलवार को अमित शाह के रोड शो के दौरान हुई हिंसा के बीच ईश्वरचंद विद्यासागर की मूर्ति तोड़े जाने पर लोगों का विरोध प्रदर्शन जारी है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>उत्कर्ष सिन्हा </strong></span></p>
</div>
<div>
<p>कभी बंगाल कम्युनिष्टो के लाल झंडे से भरा रहता था  लेकिन फिलहाल चल रहे लोकसभा चुनावो में बंगाल की जमीन हिंसा से लाल हो रही है।</p>
<p>कोलकाता में मंगलवार को अमित शाह के रोड शो के दौरान हुई हिंसा के बीच ईश्वरचंद विद्यासागर की मूर्ति तोड़े जाने पर लोगों का विरोध प्रदर्शन जारी है। वामदलों के विरोध के बाद अब तृणमूल कांग्रेस(टीएमसी) का छात्र विंग सड़कों पर उतरा है। योगी आदित्यनाथ की रैली भी नहीं हो पाई और इलेक्शन कमीशन भी बंगाल में असहाय हालत में दिखाई देने लगा है।</p>
<p>लेकिन इन सबके बीच बंगाल में होने वाले आखिरी चरण के चुनावो में अचानक ईश्वर चंद्र विद्यासागर महत्वपूर्ण हो गए हैं।  मंगलवार की हिंसा में ईश्वर चंद्र विद्यासागर कालेज में लगी उनकी मूर्ति क्या टूटी, ममता बनर्जी की रणनीति में भी अचानक तब्दीली आ गई। ममता ने पहले भाजपा पर इस मूर्ति को तोड़ने का आरोप लगाया और बुधवार की सुबह सोशल मीडिया पर ममता सहित पूरी तृणमूल कांग्रेस के डीपी में ईश्वर चंद्र विद्यासागर की तस्वीर दिखाई देने लगी है। सत्ता का दुरूपयोग करने का आरोप झेल रही ममता बनर्जी ने आखिर ऐसा क्यों किया?</p>
<p>जरा ममता के ट्विटर पेज को देखिये तो उनकी रणनीति साफ़ हो जाएगी। काली माँ  की पूजा करती तस्वीर के साथ अब ईश्वर चंद्र विद्या सागर है।  एक तस्वीर उनपर हिन्दू विरोधी होने के दावे की काट है और दूसरी बंगाल की अस्मिता की।  ममता इसके जरिये पूरी लड़ाई को बंगाली बनाम बाहरी बनाने में जुटी हैं।</p>
</div>
<div><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-103986 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/05/mamata.jpg" alt="" width="752" height="386" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/05/mamata.jpg 752w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/05/mamata-300x154.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 752px) 100vw, 752px" /></div>
<div></div>
<div>
<p>ममता का ये कदम अनायास नहीं है।  ईश्वर चंद्र विद्यासागर की तस्वीर के बहाने वे एक बार फिर से बांग्ला राष्ट्रवाद का दांव खेलने में जुट गई है। अंतिम रण की 9 सीटों पर होने वाले चुनावो के पहले ममता पूरी लड़ाई को भाजपा के हिन्दू राष्ट्रवाद बनाम बांग्ला राष्ट्रवाद की ओर ले जा रही हैं।</p>
<p>ममता के किले में सेंध लगाने के लिए भाजपा ने भी जम कर हिन्दू कार्ड खेला है। बीते 5 सालों से अमित शाह की टीम बंगाल में मुस्लिम तुष्टिकरण को एक बड़ा मुद्दा बनाने में लगी हुई है। दुर्गापूजा बनाम मुहर्रम का नारा योगी आदित्यनाथ भी लगते रहे हैं।  अमित शाह ने तो उत्तर भारत में करीब करीब निष्प्रभावी हो चुके जय श्री राम के नारे को बंगाल में नए सिरे से प्रतीक बनाने की कोशिश की है।</p>
<p>भाजपा को इसका फायदा भी हुआ है, जहाँ चुनाव दर चुनाव उसके वोटो के प्रतिशत में इजाफा दिखाई दे रहा है। मगर समस्या ये है कि ममता बनर्जी के वोट भी काम होने की बजाय लगातार बढ़ रहे हैं। भाजपा &#8211; तृणमूल की इस लड़ाई में असल नुकसान वाम दलों और कांग्रेस का हुआ है।ऐसा नहीं है कि ममता पहली बार बांग्ला राष्ट्रवाद का सहारा ले रही है। स्थानीय पत्रकार जतिन डेका का कहना है कि &#8211; &#8220;नागरिकता रजिस्टर के बाद उठे बवंडर में भी ममता ने इसे बंगाली बनाम उत्तर भारतीय बना दिया था और इस के जरिये वे बंगाल में होने वाले नुकसान से बच गई।  अब एक बार फिर बांग्ला राष्ट्रवाद ममता का हथियार बना है, ये कितना कामयाब होता है ये 23 मई को आने वाले नतीजे ही बताएँगे।&#8221;</p>
<p>बंगाल के एक कालेज में प्रोफ़ेसर शांतनु धर बताते हैं- &#8220;बांग्ला राष्ट्रवाद की जड़े बहुत मजबूत हैं और उसमें ईश्वर चंद्र विद्यासागर की भूमिका भी बड़ी रही है, बंगाल में समाज सुधार, शिक्षा, बाल विवाह और छुआछूत मिटाने में उन्होंने बहुत काम किया। बंगाल के अब तक सांप्रदायिक राजनीति से बचे रहने का एक कारण ये भी है कि बंगालियों में हिन्दू &#8211; मुसलमान के बीच शादियाँ भी बहुत होती है।  यहाँ  धर्म  से ज्यादा बंगाली होना महत्वपूर्ण है।&#8221;</p>
</div>
<div>
<p>मगर ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति के टूटने के बाद भाजपा रक्षात्मक जरूर हो गयी है।  अमित शाह लगातार कह रहे हैं कि ये मूर्ति तृणमूल के लोगो ने तोड़ी  और ममता का आरोप है कि कोई बंगाली  ईश्वर चंद्र विद्यासागर का अपमान नहीं कर सकता, अमित शाह ने दूसरे राज्यों से जो गुंडे बुलाये थे, वे ही बंगाल की संस्कृति को नहीं जानते और उन्होंने ही ये मूर्ति तोड़ दी।</p>
<p>अमित शाह और ममता में से किसकी बात बंगाल का वोटर मानेगा?</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>

<!--
Performance optimized by W3 Total Cache. Learn more: https://www.boldgrid.com/w3-total-cache/?utm_source=w3tc&utm_medium=footer_comment&utm_campaign=free_plugin

Page Caching using Disk: Enhanced 

Served from: www.jubileepost.in @ 2026-05-21 06:48:46 by W3 Total Cache
-->