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	<title>रैलियां Archives &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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		<title>क्या इशारा कर रही है बिहार मे तेजस्वी की रैलियां !</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/hint-of-tejashwi-rallies-in-bihar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ali Raza]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 26 Oct 2020 07:46:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चंद्र प्रकाश राय बिहार मे तेजस्वी की रैलियां तो नम्बर एक का इशारा कर रही है पर रैलियो मे सुनने की गम्भीरता का अभाव भी दिख रहा है और तेजस्वी के बोलते वक्त भी लगातार होता हुडदंग मेरे राजनीतिक चिन्तन और आकलन को थोड़ा विचलित भी कर रहा है । कांग्रेस मे तो भस्मासुरों की &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #000080;"><strong>चंद्र प्रकाश राय</strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft wp-image-181550 size-thumbnail" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/08/c-p-rai-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/08/c-p-rai-150x150.jpg 150w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/08/c-p-rai-300x300.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/08/c-p-rai-768x768.jpg 768w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/08/c-p-rai.jpg 853w" sizes="auto, (max-width: 150px) 100vw, 150px" /></p>
<p>बिहार मे तेजस्वी की रैलियां तो नम्बर एक का इशारा कर रही है पर रैलियो मे सुनने की गम्भीरता का अभाव भी दिख रहा है और तेजस्वी के बोलते वक्त भी लगातार होता हुडदंग मेरे राजनीतिक चिन्तन और आकलन को थोड़ा विचलित भी कर रहा है ।</p>
<p>कांग्रेस मे तो भस्मासुरों की भरमार है और चिराग रोशनी के बजाय विपरीत हवा बहा रहा है।</p>
<p>कभी भाजपा के खिलाफ प्रधानमंत्री मटेरियल माने जाने वाले नितीश मुख्यमंत्री के लिए भी महंगे होते दिख रहे है तो सत्ता की मलाई चाट कर भाजपा ने बड़ी चालाकी से चाटा हुये दोने की गन्दगी नितीश के मत्थे मढ़ने मे कामयाबी पा ली है, ऐसा लगता है।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>कई बार नये हो या पुराने छोटे खिलाड़ी भी मैदान मे थका देते है और उनसे जीतने वाला भी उस थकान मे बराबरी के पहलवान से मार खा जाता है।</strong></span></p></blockquote>
<p>वैसे ये बिहार है जिससे एक जमाने तक देश को दिशा दिखाने और देश के लिए लड़ाई छेड़ने की उम्मीद की जाती रही है पर श्री बाबू, दिनकर, जयप्रकाश, कर्पूरी जैसो की धरती में राजनीतिक खाद की जगह यूरिया ने उर्वरा शक्ति उत्पादकता को शायद बहुत चोट पहुंचाया है।</p>
<p>गम्भीर बहस चुनाव से गायब है और अपने-अपने पुराने हथियार पर ही शान चढ़ाने की सभी की कोशिश दिख रही है जो एकतरफ़ा फैसलाकुन तो नही दिख रही है। इस बार कुर्सी खाली करो की जनता आती है नारा अभी तक तो किसी भी कोने से सुनायी नही दिया।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>दुष्यंत की पंक्तियाँ कि सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नही मेरी कोशिश है की कुछ सूरत बदलनी चाहिये जैसी आवाज भी अभी तक कही से नही आई है जबकी चुनाव प्रचार उठान ले चुका है और सारे महारथी अपने रथो पर सवार हो चुके है।</strong></span></p></blockquote>
<p>ऐसा भी नही सुना अब तक कि &#8220;पक गई है आदते बातो से सर होंगी नही, कोई हंगामा करो ऐसे गुजर होगी नही”।</p>
<p>तो कैसा हो गया ये बिहार? ये वो बिहार तो नही जहां जयप्रकाश ने जेल तोड़ कर अंग्रेजो को चुनौती दिया था और ये वो बिहार भी नही है जहा के गांधी मैदान मे सशक्त नेता इन्दिरा गांधी को तार्किक और फैसलाकुन चुनौती दिया था।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/tejashwi-yadav-comments-on-upper-caste-rohtas-election-rally/">‘लालू राज में गरीब बाबूसाहब के सामने सीना तान के चलता था’</a></strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-191885 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/10/bihar-jubilee.jpg" alt="" width="882" height="441" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/10/bihar-jubilee.jpg 660w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/10/bihar-jubilee-300x150.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 882px) 100vw, 882px" /></p>
<p>अब अगर किसी भी तरह चाहे धर्म या जाति, धन या धमकी, शराब या ताड़ी ही सरकार बनने की बुनियाद हो जाये और मुद्दो पर बहस और जवाबदेही कोसी की बाढ़ मे बह गई हो और नंगा भूखा मतदाता भी जाति और धर्म मे ही आत्मसम्मान और भविष्य तलाश रहा हो तो क्या बात करना। इस चुनाव की और क्या आकलन करना की क्या होगा और इस चुनाव के परिणाम का बिहार के भविष्य पर देश की राजनीति के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>जो जीतेगा वो लूटेगा और बिहार तथा यहा का किसान मजदूर वैसे ही एक रोटी और कपड़े के लिए देश भर मे भटकेगा। शिकायत करने का अधिकार भी कहा है फिर जनता को की सत्ता ने उसके लिए क्या किया ? क्योंकी आपने पूछा ही नही किसी भी चुनाव मे की पिछ्ले 5 साल मे क्या किया और फिर ये भी नही की बताओ की अगले 5 साल मे कौन-कौन क्या करेगा ? वो सुन कर और गुन कर वोट डालते तो वो होता और उसके लिए सबकी जवाबदेही होती।</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>जो बोवोगे वही तो काटोगे आप चाहे जनता हो, कार्यकर्ता हो या नेता हो।</strong></span></p></blockquote>
<p>तो आईये इन्तजार करते है बिहार के चुनाव मे पाकिस्तान, मुस्लमान, कश्मीर, अगड़ा, पिछड़ा, यादव, कुर्मी, पासवान, माझी, ठाकुर, ब्राह्मण, भूमिहार, कायस्थ जैसे महत्वपूर्ण मुद्दो पर मतदान का। बाढ? ये क्या होती है ,चमकी बुखार? ये क्या होता है, बेकारी ? ये क्या होती है, मजदूरो का पलायन या फिर सड़क पर हजारो मील का सफर याद नही, अपराध देखा नही, पढाई चाहिये नही। छोड़िए इन फालतू चाय या काफी के समय की चर्चाओ को।</p>
<p>आईये बिहार को और बदतर बिहार बनाये। क्या लगता है आपको ? क्या है संभावनाए ?</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/bollywood-bold-actress-join-this-political-party/">अब ये अभिनेत्री इस पार्टी से करने जा रही है राजनीति में एंट्री</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/bhim-army-chief-chandrashekhar-azad-claims-bullets-fired/">किसने चलाई चंद्रशेखर आजाद के काफिले पर गोली ?</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/bjp-became-aggressive-on-mehboobas-tricolor-statement/">महबूबा के तिरंगा वाले बयान पर आक्रामक हुई बीजेपी</a></strong></span></p>
<p><iframe loading="lazy" title="इन 5 बिहारी नेताओं ने भी की दूसरे धर्म-जाति में शादी, मिसाल बनीं जोडि़यां | Jubilee Tv" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/x-UgkynjtJk?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe></p>
<p><strong>(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक चिंतक हैं)</strong></p>
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		<item>
		<title>नागरिकता कानून पर सुप्रीम फैसले का इंतज़ार</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/wait-for-supreme-decision-on-citizenship-law/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ali Raza]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Jan 2020 12:08:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कृष्णमोहन झा नागरिकता संशोधन कानून को लेकर केंद्र की मोदी सरकार और विपक्षी दलों के बीच जारी टकराव कब तक रहेगा, इस बारे में कुछ भी निश्चित नहीं कहा जा सकता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गत दिवस कहा है कि वह डंके की चोट पर घोषणा करते हैं कि यह कानून हर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #000080;"><strong>कृष्णमोहन झा</strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft wp-image-101308 size-thumbnail" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/05/km-jha-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" /></p>
<p>नागरिकता संशोधन कानून को लेकर केंद्र की मोदी सरकार और विपक्षी दलों के बीच जारी टकराव कब तक रहेगा, इस बारे में कुछ भी निश्चित नहीं कहा जा सकता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गत दिवस कहा है कि वह डंके की चोट पर घोषणा करते हैं कि यह कानून हर हाल में लागू किया जाएगा। उधर दूसरी ओर विपक्षी दल इसके प्रति अपना विरोध व्यक्त करने के लिए नित नए तरीके अपना रहे हैं।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>प्रदर्शनों, धरनों एवं रैलियों से आगे बढ़कर यह विरोध अब विधानसभाओं के अंदर भी दाखिल हो चुका है। गैर भाजपा शासित राज्यों की सरकारों ने इस कानून को अपने राज्यों में लागू न करने की घोषणा पहले ही कर दी थी और इससे भी आगे जाकर राज्य विधानसभाओं के अंदर इस कानून के विरोध में प्रस्ताव किए जा चुके है।</strong></span></p></blockquote>
<p>केरल और पंजाब इस मामले में सबसे आगे रहे हैं और पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार भी विधानसभा में ऐसा ही प्रस्ताव लाने जा रही है। दूसरे अन्य गैर भाजपा शासित राज्यों की सरकारें इसी रास्ते पर चलने का फैसला कर चुकी है। यह भी एक विडंबना है कि जब सारे देश में गणतंत्र दिवस के आयोजन को उल्लास से मनाने की तैयारी होनी थी, तब यह समय रैलियों, धरना प्रदर्शनों ने ले लिया। यह पर्व हमें संविधान के प्रति सम्मान प्रदर्शित करने का पुनीत अवसर उपलब्ध कराता है, परंतु इस बार का गणतंत्र दिवस हमसे यह सवाल कर रहा है कि क्या संविधान के प्रति हमारी निष्ठा और आस्था के मायने बदल गए है।</p>
<p><strong><span style="color: #000080;">यह भी पढ़ें : <a style="color: #000080;" href="https://www.jubileepost.in/man-brandishes-gun-in-jamia-area-of-delhi/">जामिया गोलीकांड : तो गोपाल ही गोडसे है !</a></span></strong></p>
<p>सबसे बड़े आश्चर्य की बात यह है कि केंद्र सरकार और विपक्ष दोनों ही इस कानून के समर्थन और विरोध के लिए संविधान की दुहाई दे रहे हैं। कोई भी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है। संविधान की अलग-अलग व्याख्या अपने ढंग से की जा रही है। देश की सर्वोच्च अदालत ने नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर पर रोक लगाने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दोनो पर रोक लगाने से अभी इंकार कर दिया है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-149914 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/01/sc.jpg" alt="" width="808" height="424" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/01/sc.jpg 1200w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/01/sc-300x158.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/01/sc-1024x538.jpg 1024w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/01/sc-768x403.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 808px) 100vw, 808px" /></p>
<p><strong><span style="color: #000080;">यह भी पढ़ें : <a style="color: #000080;" href="https://www.jubileepost.in/kanshi-ram-alliance-opinion-mayawati-caa/">“गठजोड़” पर मायावती से जुदा थी आंबेडकर की राय</a></span></strong></p>
<p>सर्वोच्च अदालत ने साफ कहा कि इस मामले में सरकार का पक्ष सुने बगैर कोई भी एक तरफा फैसला नहीं करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है। जाहिर सी बात है कि तब तक यथास्थिति बनी रहेगी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट चार सप्ताह तक रोजाना सुनवाई भी कर सकता है।</p>
<p>अब सवाल यह उठता है कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, तब क्या नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के समर्थन और विरोध में जारी रैलियों और प्रदर्शनों का सिलसिला स्थगित नहीं कर किया जाना चाहिए। सरकार कह चुकी है कि अब यह कानून वापस नहीं लिया जाएगा और दूसरी ओर विपक्ष को इसका विरोध करने में अपने राजनीतिक हित दिखाई दे रहे हैं। इसलिए विपक्ष अपने विरोध का अभियान जारी रखेगा इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन क्या इस सवाल को नजरअंदाज किया जा सकता है कि महंगाई और बेरोजगारी की समस्या पर ध्यान आकर्षित करने के लिए विरोध प्रदर्शनों को इतने लंबे समय तक जारी क्यों रखा जाना चाहिए।</p>
<p>विपक्ष सरकार पर आरोप लगा रहा है कि महंगाई ,बेरोज़गारी और अर्थव्यवस्था की सुस्ती पर से जनता का ध्यान हटाने के लिए सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून लाने की चाल चली है।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>विपक्ष खुद भी इस बात पर विचार क्यों नहीं करता की उसने इस कानून का विरोध करके सरकार को भी दूसरी समस्याओं से ध्यान हटाने में परोक्ष मदद कर दी है। आख़िर सरकार की भी यही मंशा थी, तब तो विपक्ष ने उसका काम आसान कर दिया है। बेहतर तो यही होगा कि विपक्ष इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रतीक्षा करें और फैसला आने तक अपने विरोध प्रदर्शनों को विराम दे दे, ताकि उसे भी महंगाई बेरोजगारी और आर्थिक सुस्ती जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने का मौका मिल सके। </strong></span></p></blockquote>
<p>इस पूरे मामले में कांग्रेस सबसे अधिक दुविधा में फंसी दिखाई दे रही है। कांग्रेस चाह रही थी कि सारे विपक्षी दल नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का विरोध करने के लिए उसके बैनर तले एकजुट हो जाए, परंतु सोनिया गांधी द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल न होकर विपक्षी दलों ने यह साफ कर दिया है कि वे सीएए और एनपीआर का विरोध तो करते हैं, परंतु कांग्रेस के बैनर तले एकजुट होने के लिए कतई तैयार नहीं है।</p>
<p>केंद्र की राजग सरकार भी यही चाह रही है कि सारे विपक्षी दल अलग-अलग लड़ाई लड़े और धीरे-धीरे उनका विरोध धीमा होकर शांत पड़ जाए। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं सुप्रीम कोर्ट के वकील कपिल सिब्बल भी अब यह मानने लगे हैं कि केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानून को राज्य सरकारें अपने यहां लागू करने से इनकार नहीं कर सकती हैं ।</p>
<p><strong><span style="color: #000080;">यह भी पढ़ें : <a style="color: #000080;" href="https://www.jubileepost.in/docter-kafeel-ahmad-arrested-by-up-stf-in-mumbai/">भड़काऊ भाषण देने के आरोप में डॉक्टर कफील खान गिरफ्तार</a></span></strong></p>
<p>कपिल सिब्बल स्वयं विधिवेत्ता है, इसलिए उन्होंने कांग्रेस नेता होते हुए भी इस कड़वी हकीकत से अपने दल को अवगत करा दिया है। इससे इस कानून के विरोध में उनकी पार्टी का अभियान वैसे भी बेमानी सिद्ध हो जाता है। गौर करने लायक बात यह है कि कपिल सिब्बल के विचारों का कांग्रेस के ही एक वरिष्ठ नेता एवं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने भी समर्थन किया है।</p>
<p>ऐसी स्थिति में क्या कांग्रेस पार्टी के लिए उचित होगा कि वह नागरिकता संशोधन कानून का विरोध जारी रखें। अतः अब इस मामले में काग्रेस सहित सारे विपक्षी दलों को केवल सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट जो फैसला दे उसे स्वीकार करना चाहिए।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="पीएफआई की फंडिंग के पीछे कौन | jubilee tv" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/YWhCpgkdCW4?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe></p>
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