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	<title>Jubilee Post &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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		<title>आज़म को पुरसा देने चले जाएं अखिलेश !</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/akhilesh-should-go-to-award-azam/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 Dec 2022 14:17:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
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					<description><![CDATA[नवेद शिकोह यूपी की सियासत की समझ रखने वाले कुछ सियासी पंडित कहते रहे हैं कि आज़म ख़ान हर दौर में समाजवादी पार्टी के लिए नुकसानदायक रहे हैं। मुस्लिम समाज में भी किसी दौर में भी रामपुर के अलावा उनका जनाधार नहीं रहा। वो मुस्लिम समाजवादियों/मंत्रियों/विधायकों/पदाधिकारियों और मुस्लिम कार्यकर्ताओं का भी अपमान करते थे। मौलाना &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-196550 alignleft" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/navad.jpg" alt="" width="114" height="115" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/navad.jpg 187w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/navad-150x150.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 114px) 100vw, 114px" />नवेद शिकोह</strong></span></p>
<p>यूपी की सियासत की समझ रखने वाले कुछ सियासी पंडित कहते रहे हैं कि आज़म ख़ान हर दौर में समाजवादी पार्टी के लिए नुकसानदायक रहे हैं।</p>
<p>मुस्लिम समाज में भी किसी दौर में भी रामपुर के अलावा उनका जनाधार नहीं रहा। वो मुस्लिम समाजवादियों/मंत्रियों/विधायकों/पदाधिकारियों और मुस्लिम कार्यकर्ताओं का भी अपमान करते थे। मौलाना बुखारी और मौलाना कल्बे जव्वाद तक से उनका छत्तीस का आंकड़ा रहा। उलेमाओं यहां तक कि इमामे काबा तक के बारे में उन्होंने अपशब्द कहे थे।</p>
<p>मुलायम से लेकर अखिलेश तक पर आज़म दबाव बनाते रहे। कुछ ख़ास विधानसभा-लोकसभा सीटों का टिकट आज़म खान की रज़ामंदी से ही दिया जाता था। कहा जाता है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद अखिलेश समाजवादी पार्टी के किसी भी वरिष्ठ की नहीं सुनते पर आज़म खान का दबाव उनपर हावी रहा।</p>
<p>यदि ये बातें सही हैं तो हेट स्पीच में सजायाफ्ता होने के बाद आज़म की विधायकी रद्द होने, रामपुर की दुबारा हार (पहले लोकसभा उप चुनाव और फिर विधानसभा उपचुनाव में शिकस्त) के बाद उनके सियासी सफर पर विराम लगने से अखिलेश यादव की मुसीबत टल जाना चाहिए थी।</p>
<p>लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मुसीबत टली नहीं बढ़ गई है। यूपी में समाजवादी पार्टी का सबसे बड़ा बीस फीसद वोट बैंक मुस्लिम समाज का है। और इतने बड़े वोटबैंक के हिसाब से इतना बड़ा मुस्लिम चेहरा समाजवादी पार्टी के पास नहीं है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-269160" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/12/AZAM-VS-AKHLISH-1024x555.jpg" alt="" width="618" height="335" /></p>
<blockquote><p><span style="color: #ff6600;"><strong> भले ही सूबे के मुसलमान आज़म को मुस्लिम नुमाइंदा या कौम का हमदर्द नहीं मानते हों लेकिन उनकी बेचारगी को देखकर उनसे हमदर्दी पैदा हो गई है। जब भी कभी लगा कि सपा का शीर्ष नेतृत्व आज़म को नजरंदाज कर रहा है तो माना गया कि मुस्लिम क़ौम को नजरंदाज किया जा रहा है। इसलिए अभी भी सपा को आज़म खान के नाज़-नखरे उठाना पड़ेंगे।</strong></span></p></blockquote>
<p>रामपुर में उपचुनाव में आज़म खान के सपा उम्मीदवार आसिम रज़ा की हार के बाद अखिलेश यादव और सपा गठबंधन के साथी जयंत चौधरी को आज़म ख़ान को पुरसा (दुख प्रकट करने-सांत्वना देने) रामपुर जाना पड़ेगा।</p>
<p>सूत्र बताते हैं कि ये लोग जल्द ही आज़म खान से मिलने रामपुर जाएं। जयंत ने खतौली जीतने के बाद आज़म खान की हार पर दुख प्रकट करके राजनीतिक दक्षता दिखाई। अखिलेश चुनावी प्रचार के लिए रामपुर गए भी थे। लेकिन इसे नाकाफी माना जा रहा है।</p>
<p>मुस्लिम समाज में यादव परिवार के ख़िलाफ़ सपा के लिए घातक चर्चा शुरू हो गई है। कहा जा रहा है कि खतौली और ख़ासकर मैनपुरी की एतिहासिक जीत के बाद सपाइयों में खुशी की लहर के बीच आज़म को उनकी नाकामियों और बेचारागी के साथ तन्हा छोड़ दिया गया है।</p>
<p>मुस्लिम समाज में जो बड़ा सवाल उठ रहा है वो तर्कसंगत भी है। सत्ता पर पक्षपात, बेइमानी और चुनाव आयोग पर गहरा आरोप लगाने वाले अखिलेश यादव अपने इन आरोपों में ही फंस गए हैं। शासन के इशारे पर प्रशासन ने सपाई मतदाताओं को वोट डालने से रोकने की भरपूर कोशिश की।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-268421" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/11/28_11_2022-azam_khan_in_rampur_23232802-1024x576.jpg" alt="" width="618" height="348" /></p>
<blockquote><p><span style="color: #ff6600;"><strong> लाठी चलाई, मुक़दमे दर्ज किए, बेराकेटिंग लगा दी। वोटरों को घायल कर दिया। जेल में ठूंस दिया। समाजवादियों के ऐसे कथित आरोपों के बीच रालोद के जांबाजों ने प्रशासन की लाख सख्तियो़ के आगे डट कर भाजपा विरोधी वोटरों को वोट डालने से रोकने की कोशिश को नाकाम कर दिया। इसी तरह अखिलेश यादव, शिवपाल यादव और पूरा यादव परिवार मैनपुरी में डंका रहा। ज़मीनी संघर्ष करता रहा।</strong></span></p></blockquote>
<p>जिसकी वजह से समाजवादी कार्यकर्ताओं में जोश-जज्बा और हिम्मत पैदा हुई। हजारों कार्यकर्ताओं का हुजूम भी मैनपुरी में डटा रहा। कथित पुलिस प्रशासन की सख्तियों से मुकाबला करके वोट डलवाए गए और डिंपल यादव के पक्ष में इतने वोट पड़े कि ऐतिहासिक जीत दर्ज हुई।</p>
<p>अखिलेश-शिवपाल सहित समस्त नेताओं का आरोप था कि रामपुर में आजम खान को टार्गेट बनाकर वहां प्रशासन ज्यादा ज्यादती कर रहा है। ताकि रामपुर में सपा को हराकर आज़म की बची-खुची सियासत को ध्वस्त करने का संदेश देकर भाजपा इनका राजनीतिक लाभ उठा सकें।</p>
<p>आरोपों के मुताबिक तो सपा के शीर्ष नेताओं को मैनपुरी की तरह रामपुर में भी डटना चाहिए था। यदि सपा का ऐसा ही हुजूम रामपुर में भी प्रशासन की कथित ज्यादतियों के आगे सीना ताने खड़ा होता तो रामपुर में भी सपा के पक्ष के वोटर वोट इतनी कम संख्या में मतदान नहीं करते।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-266900" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/10/azam-akhlish-1024x516.jpg" alt="" width="618" height="311" /></p>
<p>या काउंटिंग में कथित बेइमानी नहीं होती। मुस्लिम समाज में ऐसी बातों की सुगबुगाहट के बीच अखिलेश यादव का रामपुर में सपा की शिकस्त की क़ब्र पर सूरे फातिहा पढने जाना चाहिए है। ऐसी चर्चाओं के बीच सपा और गठबंधन के शीर्ष नेताओं को आज़म खान से मिलने रामपुर जाना पड़ेगा।</p>
<p>नाकामियों के अंधेरों में मैनपुरी और खतौली की कामयाबी समाजवादियो के लिए आशा की किरण है। जोश और जज्बे से भरे समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और ख़ासकर यादव परिवार को एहसास होने लगा है कि एकता में बल है, मेहनत रंग लाती है, मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिए।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff6600;"><strong> मैनपुरी के उपचुनाव में भाजपा के उम्मीदवार को शर्मनाक हार दिलवाने वाली डिंपल यादव सिर्फ जीती नहीं हैं। अपने ससुर मुलायम सिंह यादव जैसे जिगगज नेता की बड़ी से बड़ी हर जीत का भी उन्होंने रिकार्ड तोड़कर इतिहास रच दिया है। बातें ये भी होने लगी हैं कि अखिलेश यादव जो चुनाव जीतना चाहते हैं वो जीत लेते हैं। परिवार में एकता भी पैदा कर देते हैं और ज़मीनी संघर्ष से भाजपा जैसी शक्ति को शिकस्त देने की ताक़त दिखा ही देते हैं। पर जब नहीं चाहते हैं तो चुनावी सभा तक नहीं करते।</strong></span></p></blockquote>
<p>फिलहाल मौजूदा सफलता के उत्साह और खुशी में रामपुर की हार और आज़म खान की बेचारगी मैनपुरी-खतौली की जीत की थाल में किरकिरी ही नहींं बल्कि ज़हर पैदा कर सकती है। क्योंकि यूपी विधानसभा चुनाव में सपा को बीस फीसद मुस्लिम समाज का बल्क वोट मिला था।</p>
<p>आज़म की बेचारगी को देखकर आगामी लोकसभा चुनाव में यदि मुस्लिम समाज कांग्रेस या बसपा की दावत की सुगंध की तरफ आकर्षित हो गया तो सपा के लिए पांच-सात सीटें भी जीतना मुश्किल होगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ऐसे तो बसपा संग नहीं जाएगा मुसलमान !</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/in-this-way-muslims-will-not-go-with-the-bsp/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Oct 2022 11:44:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[ओपिनियन]]></category>
		<category><![CDATA[जुबिली डिबेट]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मनिरपेक्ष दल]]></category>
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		<category><![CDATA[मुसलमान]]></category>
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					<description><![CDATA[नवेद शिकोह, @naved.shikoh अपना आधे से ज्यादा आधार दलित वोट बैंक गंवा चुकी बहुजन समाज पार्टी की सियासत इन दिनों मुस्लिम समाज की हिमायत और भाजपा विरोध पर केंद्रित नजर आ रही है। इससे शंकाएं गहरी हो रही हैं कि बसपा भाजपा का विरोध कर भाजपा की मदद करने लिए मुस्लिम समाज की एकजुट वोट &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-196550 alignleft" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/navad.jpg" alt="" width="133" height="134" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/navad.jpg 187w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/navad-150x150.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 133px) 100vw, 133px" />नवेद शिकोह, @naved.shikoh</strong></span></p>
<p>अपना आधे से ज्यादा आधार दलित वोट बैंक गंवा चुकी बहुजन समाज पार्टी की सियासत इन दिनों मुस्लिम समाज की हिमायत और भाजपा विरोध पर केंद्रित नजर आ रही है।</p>
<p>इससे शंकाएं गहरी हो रही हैं कि बसपा भाजपा का विरोध कर भाजपा की मदद करने लिए मुस्लिम समाज की एकजुट वोट की ताकत को बिखेरने का एसाइनमेंट तो नहीं कर रही !</p>
<p>डा.अम्बेडकर के मिशन को ज़मीनी संघर्ष से आगे बढ़ाने वाले कांशीराम के दलित मूमेंट ने जिस राजनीतिक दल बसपा की सूरत इख्तियार की थी उस बसपा का एक इशारा दलित समाज का जनसैलाब लाने की ताक़त रखता था। लेकिन अब वो ज़माने लद गए, ट्वीटर में सिमटे बसपा सुप्रीमो के दस ट्वीट में सात ट्वीट मुसलमान-मुसलमान चिल्ला रहे हैं।</p>
<p>लेकिन मुस्लिम समाज में पैदा हो चुकी सियासी समझ बसपा की मुस्लिम हिमायत की अति को नई चाल समझ रही है। इस समाज के जानकारों का मानना है कि मुसलमान उस धर्मनिरपेक्ष दल को चुनता है जो खुद के आधार और हिन्दु समाज का समर्थन पानी का संघर्ष करता दिखता है।‌</p>
<p>समतल जमीन पर अल्पसंख्यकों का भरोसा क़ायम होता है। बसपा की दलित वोट बैंक की जमीन फिलहाल समतल नहीं है, बसपाई जमीन पर भाजपा ने इतने गड्ढे कर दिए हैं इस जमीन पर आकर अकलियत और भी गड्ढे में गिरना पसंद नहीं करेगी।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-266758" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/10/muslim-1024x540.jpg" alt="" width="618" height="326" /></p>
<blockquote><p><span style="color: #ff6600;"><strong>बसपा मुसलमानों की पैरवी की ट्यूटबाजी ना करके यदि अपने आधार बीस से पच्चीस फीसद दलित वोट बैंक को वापस हासिल करने का संघर्ष करती दिखे तो मुस्लिम समाज खुद बा खुद बसपा के समर्थन में एकतरफा भरोसा क़ायम कर सकता है। ये सच है कि एम वाई से अधिक असरदार ताक़त दलित-मुस्लिम गठजोड़ हो सकती है ऐसा तब संभव है जब दलित समाज की बसपा में घर वापसी हो या इसकी कोशिश की जाए। पर अपने आधार वोट बैंक को नजरंदाज कर भाजपा के विरोध की झड़ी लगाने वाली बसपा सुप्रीमो की इस नई राजनीतिक को भी भाजपा की मदद की शंका के नजर से देखा जा रहा है। ताकि यूपी की अक़लियत की एकजुटता-एकता टूटे‌, बिखरे और इनके वोटों का विभाजन भाजपा के लिए लाभकारी साबित हो।</strong></span></p></blockquote>
<p>अल्पसंख्यक समाज से जुड़े दानिशमंदों (बुद्धिजीवियों) का कहना है कि भाजपा ने काफी वक्त के बाद राजनीति में अकलियत को अछूत साबित करने की कोशिश में कामयाबी हासिल की।</p>
<p>इसके बाद पश्चिम बंगाल और यूपी के विधानसभा चुनावों में मुस्लिम समाज ने जिस तरह बिना बिखरे एकजुट होकर किसी एक दल को भाजपा के खिलाफ लड़ने की ताकत दी इसे देखकर भाजपा ने अकलियत के वोटों में विभाजन-बिखराव की योजना तैयार की है।</p>
<p>याद दिला दें कि क़रीब आठ-दस बरस पहले मुस्लिम समाज का भारतीय सियासत में सिक्का चलता था, जाति का भेद मिटाकर सनातनियों की एकता स्थापित कर भाजपा की कुशल रणनीति ने इस सिक्के को खोटा साबित कर दिया।</p>
<p>हाशिए पर आया मुस्लिम समाज अपने खैरख्वाह दलों की भी उपेक्षा की आग में तप कर राजनीतिक समझ का कुंदन बनता दिख रहा है।</p>
<p>ये समाज समझने लगा है कि भाजपा की रणनीति ने धर्मनिरपेक्ष दलों को जाहिरी तौर पर मुस्लिम हितों की बात ना करने पर मजबूर किया है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-266390" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/10/Prabhatkhabar_2021-12_3c2f6f4d-56c3-4ac8-a032-e115e2dd44c4_Mayawati1.webp" alt="" width="875" height="483" /></p>
<p>अल्पसंख्यक बिरादरी समझने लगी है कि प्रत्यक्ष रूप से उनकी ज्यादा बात करने वाले दलों पर तुष्टिकरण के आरोपों के रंग गहरे करके भाजपा उन दलों से बहुसंख्यकों को दूर करती रहेगी।</p>
<p>इसलिए सियासत की समझ रखने वाले अक़लियत के लोगों ने अपनी बिरादरी में ये बात आम कर दी कि वही दल भाजपा को हरा सकता है जो जाहिरी तौर पर (प्रत्यक्ष रूप से) उनकी बात नहीं करे और बहुसंख्यक समाज का वोट हासिल करने का संघर्ष करता दिखे।</p>
<p>यही वजह थी कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत मुस्लिम समाज को नजरंदाज किया और वो ग़ैर यादव पिछड़ी जातियों को साथ लाने के लिए भाजपा के पिछड़ी जातियों के बड़े नेताओं, विधायक-मंत्री तोड़कर सपा लाने में कामयाब रहे।</p>
<p>धुआंधार ज़मीनी प्रचार करके हिन्दू समाज का विश्वास जीतने का संघर्ष करते दिखे। उधर बसपा ने अपने आधार दलित समाज का विश्वास कायम रखने और भाजपा से दलित समाज की वापसी के लिए चुनाव से पूर्व भी ऐसा संघर्ष नहीं किया जैसा जमीनी संघर्ष पहले बसपा करती थी।</p>
<p>बल्कि अपने आधार दलित वोट को एकजुट करने के बजाय खूब सारे मुस्लिम उम्मीदवार उतारने की बसपाई मंशा को जानकर मुस्लिम समाज ने बिना बंटे, बिना बिखरे एकतरफा समाजवादी पार्टी को वोट किया। भले ही सपा गठबंधन नहीं जीत सका पर उसे जितने फीसद वोट मिले इतने फीसद सपा ने कभी भी किसी भी चुनाव में वोट हासिल नहीं किए थे।</p>
<p>अस्सी-बीस की लहर में कुछ ग़ैर यादव पिछड़ी जातियों के वोट हासिल कर अखिलेश यादव ने पैंतीस फीसद से अधिक वोट हासिल कर हार कर भी जीत का पैग़ाम दिया। गैर यादवों पिछड़ी जातियों का कुछ वोट हासिल करना और एक तरह मुस्लिम समाज का समर्थन भी भाजपा को हराने में कामयाबी नहीं दिला सका। और ये साबित हो गया कि किसी भी दल को बहुसंख्यकों के विश्वास के बिना अल्पसंख्यक वर्ग नहीं जिता सकता।</p>
<p>एक ज़माना था जब मुस्लिम समाज को किंग मेकर माना जाता था,ये ऐसा वोट बैंक था जिसकी तिज़ोरी की चिरौरी में तमाम दल कोई कसर नहीं छोड़ते थे। ख़ासकर यूपी में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और देश के और भी तमाम क्षेत्रीय दल मुस्लिम वोटरों को लुभाने की ख़ूब कोशिश करते थे।</p>
<p>2014 के बाद मोदी लहर और भाजपा की राजनीति सफलता के दौर ने मुस्लिम वोट बैंक की सारी दौलत के सारे सिक्कों को जैसे खोटा साबित कर दिया। लगभग एक दशक के मौजूदा दौर में भाजपा ने सिर्फ कांग्रेस को ही हाशिए पर नहीं डाला बल्कि पिछड़ों, दलितों का भी दिल जीत कर अस्सी- बीस की सियासत में जाति की राजनीति से सत्ता हासिल करने वाले क्षेत्रीय दलों की कमर तोड़ दी।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-250605" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/03/mayawati-kashi.jpg" alt="" width="644" height="371" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/03/mayawati-kashi.jpg 644w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/03/mayawati-kashi-300x173.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 644px) 100vw, 644px" /></p>
<p>धर्मनिरपेक्ष विचारधारा वाले दलों से हिन्दू समाज छिटकने लगा। ऐसे में कुछ दलों ने दूर होते बहुसंख्यक समाज को क़रीब लाने के लिए साफ्ट हिन्दुत्व का दिखावा किया तो किसी ने मुस्लिमों का नाम लेने से भी परहेज करना शुरू कर दिया।</p>
<p>वजह ये भी थी इस दौर में भाजपा को शिकस्त देने वाले मुलायम सिंह यादव और कांशीराम जैसे नेताओं का दौर खत्म होने के बाद नई पीढ़ी में ऐसे नेताओं का कोई विकल्प नहीं रहा।</p>
<p>नब्बे के दशक में अयोध्या विवाद और कार सेवकों पर गोली चलने की घटना के बाद ही भाजपा के पाले में गेंद आ चुका था। अस्सी-बीस डिवाइड हो चुका था। समाजवादी पार्टी मुखिया से बहुसंख्यक वर्ग में इतनी नाराजगी थी कि यदि मुलायम सिंह यादव की सियासत दशकों तक हाशिए पर चली जाती तो ताज्जुब नहीं था।</p>
<p>लेकिन चंद वर्षों बाद ही मुलायम और कांशीराम ने दलितों, मुसलमानों, यादवों और कुछ गैर यादव पिछड़ी जातियों को एकजुट करके हिन्दुत्व और राम मंदिर आंदोलन की लहर को पीछे करके गठबंधन सरकार बना ली। सपा-बसपा गठबंधन चल नहीं चला।</p>
<p>इसके बाद माया-मुलायम ने क्रमशः दलित-मुस्लिम, मुस्लिम-यादव फार्मूले पर कमजोर ही सही पर सरकारें बनाईं। ये वो दौर था जब त्रिकोणीय या चौतरफा मुकाबले में पच्चीस से तीस फीसद वोट से इतनी सीटें आ जाती थी कि सरकार बनाने का दावा पेश किया जाया जा सकता था।</p>
<p>आज पूरा परिदृश्य बदल चुका है। भाजपा इतनी मजबूत हो गई है कि 37-38 प्रतिशत वोट हासिल करके भी कोई भाजपा को हराया नहीं जा सकता।</p>
<p>बसपा का आधार दलित वोट आधे से ज्यादा भाजपा का समर्थक हो गया है इसलिए दलित-मुस्लिम फार्मूला कैसे कारगर होगा ?</p>
<p>सपा का आधार यादव उसके साथ है और गैर यादव पिछड़ी जातियों को साधने के लिए सपा ने विधानसभा चुनाव से पूर्व मेहनत की, यही कारण था कि मुस्लिम समाज एकजुट होकर सपा का वोट प्रतिशत बढ़ाने में तो कामयाब हो गया लेकिन भाजपा को हराने के लिए सपा चालीस प्लस फीसद लाने में नाकाम रही।</p>
<p>लेकिन यदि बसपा सुप्रीमों अपने कोर वोट दलित वोट की घर वापसी करने का संघर्ष करें तो ताज्जुब नहीं कि सपा के बजाय बसपा के समर्थन में मुस्लिम समाज एकजुट हो जाए।लेकिन फिलहाल ऐसा इसलिए संभव नहीं क्योंकि दलितों की घर वापसी के लिए बसपा सुप्रीमो ज़मीनी संघर्ष करती नज़र नहीं आ रहीं !</p>
<p>(लेखक वरिष्ठ पत्रकार है और ये उनके निजी विचार हैं)</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अमेरिका में साध्वी ऋतंभरा के प्रवचन का विरोध, हो रही वीज़ा रद्द करने की मांग</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/opposition-to-sadhvi-ritambharas-discourse-in-america/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Supriya Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Aug 2022 12:13:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जुबिली वर्ल्ड]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका]]></category>
		<category><![CDATA[बाबरी मस्जिद]]></category>
		<category><![CDATA[भड़काऊ भाषण]]></category>
		<category><![CDATA[मुसलमान]]></category>
		<category><![CDATA[साध्वी ऋतंभरा]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.jubileepost.in/?p=262818</guid>

					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज डेस्क बाबरी मस्जिद तोड़ने के मामले में आरोपी रहीं और मुसलमानों के खिलाफ भड़काऊ भाषणों के लिए कुख्यात साध्वी ऋतंभरा को अमेरिका में प्रवचन के लिए बुलाये जाने पर इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल ने जमकर विरोध जताया है.अमेरिका के इस सबसे बड़े एडवोकेसी संगठन के अध्यक्ष सैयद अली ने इसे अमेरिका में हिंदुत्ववादी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #993366">जुबिली न्यूज डेस्क</span></strong></p>
<p>बाबरी मस्जिद तोड़ने के मामले में आरोपी रहीं और मुसलमानों के खिलाफ भड़काऊ भाषणों के लिए कुख्यात साध्वी ऋतंभरा को अमेरिका में प्रवचन के लिए बुलाये जाने पर इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल ने जमकर विरोध जताया है.अमेरिका के इस सबसे बड़े एडवोकेसी संगठन के अध्यक्ष सैयद अली ने इसे अमेरिका में हिंदुत्ववादी जहर फैलाने के आरएसएस प्रोजेक्ट का हिस्सा बताते हुए अमेरिकी विदेश विभाग से ऋतंभरा का वीजा तुरंत रद्द करने की मांग की है.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-262821 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/08/sadhvi_ritambhara.webp" alt="" width="1000" height="700" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/08/sadhvi_ritambhara.webp 1000w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/08/sadhvi_ritambhara-300x210.webp 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/08/sadhvi_ritambhara-768x538.webp 768w" sizes="auto, (max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
<h3><span style="color: #3366ff"><strong>30 और 31 साध्वी ऋतंभरा के प्रवचन का आयोजन</strong></span></h3>
<p>बता दे कि साध्वी ऋतंभरा के प्रवचन का आयोजन 30 और 31 अगस्त को जॉर्जिया के नॉरक्रास स्थित एक मॉल में है. IAMC के अध्यक्ष सैयद अली ने कहा कि अमेरिका में भारत से आये हिंदू और मुसलमान शांति से रहते हैं. दोनों समुदाय एक दूसरे के सुख-दुख के साथी हैं. ऐसा लगता है आरएसएस को यह मेल-मिलाप पसंद नहीं आ रहा है, इसीलिए एक डिज़ायन के तहत पहले न्यू जर्सी में योगी आदित्यनाथ की तस्वीरों के साथ बुल्डोज़र परेड निकाली गयी और अब ऋतंभरा को प्रवचन देने के लिए बुलाया गया है. योगी आदित्यनाथ और ऋतंभरा दोनों भारत में मुस्लिमों से नफ़रत के प्रतीक हैं. उन्होंने कहा कि आरएसएस भारत में चल रहे अपने नफ़रती प्रोजेक्ट की आँच अमेरिका तक पहुँचाना चाहता है, जिसे अमेरिकी सरकार को बेहद गंभीरता से लेना चाहिए.</p>
<h3><strong><span style="color: #3366ff">वीज़ा रद्द करने की मांग की</span></strong></h3>
<p>सैयद अली ने आगे कहा कि संत का भेष धर लेने से कोई संत नहीं हो जाता. संत-महात्माओं का प्रवचन लोगों में प्यार और शांति का भाव भरते हैं, लेकिन ऋतंभरा के तमाम वीडियो बताते हैं कि उसने सिर्फ़ मुस्लिमों और ईसाईयों के ख़िलाफ़ घृणा फैलाई है. जब बाबरी मस्जिद तोड़ने के लिए आरएसएस के लोग पूरे भारत में अभियान चला रहे थे तो ऋतंभरा के ज़हरीले भाषणों के कैसेट शहर-शहर बजाये जा रहे थे ताकि दंगा भड़के. यूट्यूब में वो वीडियो अभी भी मौजूद है जिसमें वह क़ानून की परवाह न करते हुए अयोध्या में बाबरी मस्जिद तोड़ने की बात साफ़तौर पर कह रही है. अली ने कहा, ”क्या ऐसी महिला का न्याय, स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के नागरिक और मानवाधिकार की गारंटी करने वाले देश अमेरिका में स्वागत होना चाहिए? अमेरिकी विदेश विभाग को बिना देर किये इसका वीज़ा रद्द कर देना चाहिए और प्रवचन के आयोजकों की जाँच करानी चाहिए.”</p>
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<p>सैयद अली ने बताया कि सीबीआई ने जिन 32 लोगों को बाबरी मस्जिद तोड़ने का दोषी बताया था उसमें ऋतंभरा का भी नाम था, लेकिन मोदी राज में अदालतें पूरी तरह आरएसएस की गिरफ़्त में हैं, ये हिंदुओं में मुस्लिम और ईसाई विरोधी ज़हर फैलाने के आरएसएस के प्रोजेक्ट का हिस्सा है. पिछले दिनों इसने हरिद्वार की धर्मसंसद में साफ़ कहा था कि हिंदू चार बच्चे पैदा करें और दो आरएसएस को दे दें! पूरी दुनिया जानती है कि आरएसएस एक फ़ासिस्ट संगठन है जो मुसलमानों और ईसाईयों के ख़िलाफ़ युद्ध चला रहा है. ऋतंभरा इसी फ़ासिस्ट सेना को मज़बूत बनाने की अपील कर रही हैं.</p>
<h3><strong><span style="color: #3366ff">अमेरिका की शांति और सद्भाव भंग करने की साज़िश</span></strong></h3>
<p>सैयद अली ने कहा कि ऐसी नफ़रती महिला का स्वागत और उसके प्रवचन की तैयारी में जुटे लोगों की ख़ासतौर पर जाँच की जानी चाहिए. यह धार्मिक आयोजन की आड़ में अमेरिका की शांति और सद्भाव भंग करने की साज़िश है. बुल्डोज़र रैली के बाद ऋतंभरा का प्रवचन सिर्फ़ मुसलमानों के लिए नहीं, अमेरिका में रह रहे उन तमाम हिंदुओं के लिए भी ख़तरे की घंटी है.अली ने उम्मीद जतायी कि अमेरिकी सरकार अपने देश में बढ़ रहे आरएसएस के इस अभियान पर तवज्जो देगी और विदेश विभाग ऋतंभरा का वीज़ा तत्काल रद्द करेगा.</p>
<p><span style="color: #993366"><strong>ये भी पढ़ें-<a style="color: #993366" href="https://www.jubileepost.in/twitter-war-broke-out-between-delhi-and-assam-cm-read-who-said-what/">दिल्ली और असम के सीएम में छिड़ा ट्विटर वॉर, पढ़ें किसने क्या कहा</a></strong></span></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अब इस राज्य में धर्म संसद में हिंदुओं से की गई अधिक बच्चे पैदा करने की अपील</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/now-in-this-state-in-the-parliament-of-religions-an-appeal-has-been-made-to-the-hindus-to-produce-more-children/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 18 Apr 2022 05:57:46 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
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		<category><![CDATA[अब इस राज्य में धर्म संसद में हिंदुओं से की गई अधिक बच्चे पैदा करने की अपील]]></category>
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		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश प्रभारी यति सत्यदेवानंद सरस्वती]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज डेस्क कुछ महीने पहले हरिद्वार धर्म संसद में मुसलमानों के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने का मामला सामने आया था। इस पर खूब विवाद हुआ था। अब एक बार फिर धर्म संसद में भड़काऊ भाषण देने का मामला सामने आया है। इस बार हिमाचल प्रदेश के ऊना में आयोजित धर्म संसद में भड़काऊ भाषण &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #000080;"><strong>जुबिली न्यूज डेस्क</strong></span></p>
<p>कुछ महीने पहले हरिद्वार धर्म संसद में मुसलमानों के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने का मामला सामने आया था। इस पर खूब विवाद हुआ था।</p>
<p>अब एक बार फिर धर्म संसद में भड़काऊ भाषण देने का मामला सामने आया है। इस बार हिमाचल प्रदेश के ऊना में आयोजित धर्म संसद में भड़काऊ भाषण दिया गया है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-253552 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/dharm-sansad-111.jpg" alt="" width="681" height="365" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/dharm-sansad-111.jpg 681w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/dharm-sansad-111-300x161.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/dharm-sansad-111-310x165.jpg 310w" sizes="auto, (max-width: 681px) 100vw, 681px" /></p>
<p>रविवार को विवादित महंत यति नरसिंहानंद के संगठन ने हिंदुओं से अपील की है कि वो भारत को इस्लामी देश बनने से रोकने के लिए अधिक से अधिक संख्या में बच्चे पैदा करें।</p>
<p>हरिद्वार धर्म संसद में मुसलमानों के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के मामले के अभियुक्त यति नरसिंहानंद भी मौजूद थे। यति नरसिंहानंद फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर हैं।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/bjp-mp-blames-party-for-defeat-in-bengal-by-election-said-learned-from-tmc/">BJP सांसद ने पार्टी पर फोड़ा बंगाल उपचुनाव में हार का ठीकरा, कहा-TMC से सीख…</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/ahead-of-himachal-elections-now-aap-has-given-a-blow-to-bjp/">हिमाचल चुनाव से पहले अब आप ने दिया बीजेपी को झटका</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/conch-shell-of-peace-in-the-intensifying-winds-of-world-war/">विश्वयुध्द की तेज होती बयार में शांति का शंखनाद</a></strong> </span></p>
<p>पिछले सप्ताह यति नरसिंहानंद दिल्ली के बुराड़ी में आयोजित हिंदू महापंचायत में भी मौजूद थे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि अगर कोई मुसलमान भारत का प्रधानमंत्री बन गया तो 50 प्रतिशत हिंदू धर्मांतरण कर लेंगे।</p>
<p>अखिल भारतीय संत परिषद के हिमाचल प्रदेश प्रभारी यति सत्यदेवानंद सरस्वती ने कहा कि भारत लोकतांत्रिक देश इसलिए है क्योंकि यहां हिंदू बहुसंख्यक हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">Increasing population of Muslims in the country indicates the decline of the Hindus&#8230;Hindus should strengthen their families,they should give birth to more children to protect their families,humanity&amp; Sanatan Dharm:Yati Satyadevanand Saraswati at Una, Himachal Pradesh y&#8217;day <a href="https://t.co/QQUt9uConT">pic.twitter.com/QQUt9uConT</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1515894759168307204?ref_src=twsrc%5Etfw">April 18, 2022</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>सरस्वती ने कहा, &#8220;लेकिन मुसलमान योजना के तहत अधिक बच्चे पैदा कर के अपनी आबादी बढ़ा रहे हैं।&#8221;</p>
<p>हिमाचल के ऊना में मुबारकपुर में इस तीन दिवसीय धर्म संसद का आयोजन किया गया है।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/there-is-no-electricity-in-this-village-of-up-for-five-years-still-the-bill-has-to-be-paid/">यूपी के इस गांव में पांच साल से नहीं है बिजली फिर भी देना पड़ रहा बिल</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/attention-coronas-speed-increased-in-india/">सावधान! भारत में बढ़ी कोरोना की रफ्तार</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :   <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/sc-gives-a-blow-to-ashish-mishra-will-have-to-surrender-in-a-week/">आशीष मिश्रा को SC ने दिया झटका, एक हफ्ते में करना होगा सरेंडर</a></strong></span></p>
<p>संसद में सरस्वती ने कहा, &#8220;इसलिए हमारा संगठन हिंदुओं से अधिक बच्चे पैदा करने की अपील कर रहा है, ताकि भारत को इस्लामी देश बनने से रोक सकें।&#8221;</p>
<p>वहीं इस धर्म संसद को देखते हुए हिमाचल प्रदेश पुलिस ने सत्यदेवानंद सरस्वती को नोटिस जारी करते हुए ये निर्देश दिया है कि किसी भी धर्म और संप्रदाय के खिलाफ भड़काऊ बयान का इस्तेमाल न किया जाए।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सुन भाई रमज़ान भी यही है&#8230;</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/listen-brother-this-is-also-ramazan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 03 Apr 2022 13:07:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[लिट्फेस्ट]]></category>
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		<category><![CDATA[राम किंकर]]></category>
		<category><![CDATA[हम हैदर अली]]></category>
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					<description><![CDATA[चंचल जमुना बिन्नी को हम भी नहीं जानते थे, क्योंकि हमारे जानने का दायरा, दिल्ली की कुछ कुर्सियों, बम्बई के लिपे- पुते चेहरों, या लकड़ी के फट्टे से मार खाई एक गेंद के पीछे भागते मस्तंडों तक ही महदूद कर दिया गया है. हम कैसे जानेंगे जमुना-बिन्नी को ? हमको तो गहरी खाई के सामने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft wp-image-252289 size-thumbnail" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/chanchal-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/chanchal-150x150.jpg 150w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/chanchal-300x300.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/chanchal-1024x1024.jpg 1024w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/chanchal-768x768.jpg 768w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/chanchal.jpg 1276w" sizes="auto, (max-width: 150px) 100vw, 150px" />चंचल</strong></span></p>
<p>जमुना बिन्नी को हम भी नहीं जानते थे, क्योंकि हमारे जानने का दायरा, दिल्ली की कुछ कुर्सियों, बम्बई के लिपे- पुते चेहरों, या लकड़ी के फट्टे से मार खाई एक गेंद के पीछे भागते मस्तंडों तक ही महदूद कर दिया गया है. हम कैसे जानेंगे जमुना-बिन्नी को ? हमको तो गहरी खाई के सामने खड़ा कर दिया गया है, कहा जा रहा है &#8211; “जानो मत, सवाल मत पूछो, बस मिटाओ”.</p>
<p>जमुना बिन्नी को हम भी नहीं जानते, क्योंक़ि हम दुनिया के सबसे बड़े जानकार हैं. अचानक किसी ने कान की ललरी पर सिटकी लगा कर ज़ोर से दबाया &#8211; “ हम तुम्हारे भगत सिंह, सुभाषचंद बोस, अज्ञेय, बिरजू महराज, राजेश खन्ना, गावस्कर को जानते हैं. तुम हमारे ( पूर्वोत्तर के सातों राज्यों ) के कितने लोगों को जानते हो ? यह थी जमुना बिन्नी जी. अरुणाचल प्रदेश में राजीव गांधी विश्वविद्यालय में हिंदी की प्रोफ़ेसर और कविता में महारत. अभी हाल में एक और बड़े अलंकरण से पुरस्कृत हुई हैं- “ तिलका माँझी पुरस्कार ”. कविता है &#8211; जब आदिवासी गाता है.</p>
<p>&#8211; तिलका माँझी ?</p>
<p>हम नहीं जानते, जब हम हैदर अली, टीपू सुल्तान, महाराजा रणजीत सिंह, राम किंकर, ऋत्विक घटक को नहीं जानते, किताबों से इनके पाठ हटा दिए गये तो आप हमसे तिलका माँझी के बारे में पूछ रहे हैं ?</p>
<p>एक गहरी साज़िश के तहत, हमें आत्मकेंद्रित किया जा रहा है, तुर्रा यह कि हम बेहद आत्म मुग्ध हुए, जयकारा कर रहे हैं.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-252290 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/Ramzaan.jpg" alt="" width="640" height="480" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/Ramzaan.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/Ramzaan-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>रमज़ान मुबारक हो</p>
<p>&#8211; रमज़ान क्या है ?</p>
<p>&#8211; यह तो मुसलमानों का त्योहार है, हमसे क्या मतलब ?</p>
<p>&#8211; मुसलमान को कितना जानते हो ?</p>
<p>बरगद ठहाका लगाता है &#8211; किससे पूछते हो, क़ि वह मुसलमान को कितना जानता है? जब वह खुद अपने को नहीं जानता तो मुसलमान को कितना जानेगा ? इससे इंसानियत के मूल स्वरूप पर बात करो, इसकी ज़ुबान में.</p>
<p>“ गर्मी के तपते महीने में एक अभावग्रस्त इंसान चुपचाप सड़क किनारे धूप में बैठा है, कोई कुछ दे दे तो पेट की आग शांत हो ?”</p>
<p>सामने से गुजरने वाले अलग अलग मानसिकता के होंगे. अलहदा उनकी सोच होगी, लेकिन एक बात पर सब एक मत होंगे क़ि यह भिखारी है. इस पहली राय के बाद ही दूसरी कोई बात उठेगी. उस डगर से गुजरने वालों की एक सूची देखिए &#8211;</p>
<p>1- इन्हें न सड़क दिख रही है न वह &#8211; इन्हें अपना दम्भ और ग़ुरूर दिख रहा है. नाक पर रूमाल रख कर आगे बढ़ जायेंगे.</p>
<p>2- हाथ पाँव सलामत हैं, काम क्यों नहीं करते ? ये उपदेशक जी हैं, राजनीति में नहीं हैं लेकिन नेता बाबू के खर्चे पर सब्ज़ी ख़रीदते हैं. सरकारी गल्ला की दुकान पर क़तार बद्ध होकर.</p>
<p>“ मुफ़्त” वाला नमक और रिफ़ाइन उठाते हैं और जिसका नमक खाते हैं उसका हक़ मज़बूत करते हैं.</p>
<p>3- माफ़ करे उपरवाला ! यह दिन न दिखलाए ! मरजी उसकी कब क्या कर दे ? लो भाई और खीसे से कुछ निकाल कर इज्जत के साथ उसके हाथ पर रख दिया.</p>
<p>4- उसे देखा , उसमें खुद को पाया, हम भी इस हालात से गुज़रे हैं. चुपचाप जो कुछ था निकाल कर उसके सामने रख कर आगे बढ़ गया, बुदबुदाता गया &#8211; वक्त बदलता है मित्र !</p>
<p>&#8211; आप किस क़तार में हैं ?</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>भारतीय वांगमय इमदाद की बात करता है, दधीच, कर्ण, की कथा में वह ज़िंदा रखता है अपनी तहज़ीब. धूप बैठा रह गया है, तपती धूप में, बारिश में, ठंड में, संदेश देता है आत्म नियंत्रण, समय बोध. इंद्रियों की पिपासा पर नकले लगाओ उसे अंकुश में रखो. सारे सलीके एक हैं नाम अलग अलग हैं. सुन भाई ! रमज़ान भी यही है. अपने पर नियंत्रण और दूसरे की इमदाद. “ मुफ़्त “ विशेषण के साथ वाला इमदाद नहीं. रहीम वाला इमदाद &#8211;</strong></span></p></blockquote>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>देनदार कोउ और है, भेजत सो दिन रैन । </strong></span><br />
<span style="color: #0000ff;"><strong>लोग भरम हम पै धरें, याते नीचे नैन ॥</strong></span></p>
<p>ओ अभाव में है उसकी इमदाद कर दो, चुपचाप. रमज़ान में इसे ज़कात कहते हैं.</p>
<p>स्वाभिमान और सलीका समाज देता है तब कर्ण दधीच, रहीम बुद्ध और गांधी पैदा होते हैं. स्वाभिमान स्व से ऊपर उठकर समष्टि तक जाता है. पाव भर चना और नमक के मुफ़्त (?) पर, दाता जब अपना नाम और चेहरा दिखाने लगे और समाज उससे उपकृत होने लगे तो वह समाज भिखमंगे पैदा कर सकता है, स्वाभिमानी नहीं.</p>
<p>बापू ने चुपचाप अपनी चादर, अभाव में खड़ी महिला की ओर बढ़ा दिया था, आँखें नीचे ही नहीं थीं नम भी थीं.</p>
<p>हम तो इंसानी सभ्यता को मुबारकबाद दे रहे हैं.</p>
<p>आत्म नियंत्रण और परहित है रमज़ान.</p>
<p>ज़कात में उतर कर देखिए, किसी का अभाव दूर करके आपको एक आंतरिक सुख मिलेगा. ज़कात की भाषा अलग हो सकती है लेकिन भारतीय उप महाद्वीप का गाँव इसी ज़कात पर ज़िंदा है.</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/love-is-in-immortality-not-in-fleeting/">प्रेम अमरता में है क्षणभंगुरता में नहीं</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/better-if-the-kashmir-files-becomes-a-ointment/">डंके की चोट पर : द कश्मीर फाइल्स मरहम बने तो बेहतर वर्ना…</a></strong></span></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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