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	<title>मिशन चंद्रयान-2 Archives &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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	<description>News &#38; Information Portal</description>
	<lastBuildDate>Sun, 08 Sep 2019 10:44:22 +0000</lastBuildDate>
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		<title>लैंडर ‘विक्रम’ के चंद्रमा की सतह पर होने का पता चला : ISRO</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/lander-vikram-detected-on-lunar-surface-isro/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ali Raza]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 08 Sep 2019 10:00:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली। ऑर्बिटर से मिली तस्वीरों से इसरो को लैंडर विक्रम का पता चल गया है। इसरो चीफ के सिवन के मुताबिक चांद की सतह पर विक्रम लैंडर की लोकेशन मिल गई है और ऑर्बिटर ने लैंडर की एक थर्मल इमेज क्लिक की है। हालांकि अभी तक कोई संपर्क नहीं हो पाया है। हम संपर्क &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> ऑर्बिटर से मिली तस्वीरों से इसरो को लैंडर विक्रम का पता चल गया है। इसरो चीफ के सिवन के मुताबिक चांद की सतह पर विक्रम लैंडर की लोकेशन मिल गई है और ऑर्बिटर ने लैंडर की एक थर्मल इमेज क्लिक की है। हालांकि अभी तक कोई संपर्क नहीं हो पाया है। हम संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। जल्द ही इससे संपर्क कर लिया जाएगा।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone  wp-image-126097" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/09/1-7.jpg" alt="" width="833" height="536" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/09/1-7.jpg 650w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/09/1-7-300x193.jpg 300w" sizes="(max-width: 833px) 100vw, 833px" /></p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के प्रमुख के. सिवन ने कहा कि चंद्रयान-2 के लैंडर ‘विक्रम’ के चंद्रमा की सतह पर होने का पता चला है। सिवन ने कहा, ‘जी हां, हमें लैंडर ‘विक्रम’ के चंद्रमा की सतह पर होने का पता चला है।’</strong></span></p></blockquote>
<p>‘हार्ड लैंडिंग’ की वजह से उसे नुकसान पहुंचने के सवाल पर सिवन ने कहा, ‘हमें इस बारे में अभी कुछ नहीं पता।’ उन्होंने कहा कि ‘विक्रम’ मॉड्यूल से संपर्क स्थापित करने के प्रयास जारी हैं।</p>
<p>https://twitter.com/ANI/status/1170610654232731648?s=20</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>गौरलतब है कि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो द्वारा चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ का अभियान शनिवार को अपनी तय योजना के मुताबिक पूरा नहीं हो पाया था।</strong></span></p></blockquote>
<p>लैंडर को शुक्रवार देर रात लगभग एक बजकर 38 मिनट पर चांद की सतह पर उतारने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन चांद पर नीचे की तरफ आते समय 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर जमीनी स्टेशन से इसका संपर्क टूट गया। इसरो के अधिकारियों के मुताबिक चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर पूरी तरह सुरक्षित और सही है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आज चांद पर कदम रखेगा भारत, बच्चों संग लाइव देखेंगे पीएम मोदी</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/today-india-will-step-on-the-moon-pm-modi-will-watch-live-with-children/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ali Raza]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Sep 2019 02:59:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
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		<category><![CDATA[आज तक कोई देश लैंडिंग नहीं कर सका]]></category>
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		<category><![CDATA[चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारा जाएगा]]></category>
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		<category><![CDATA[पहियों पर उकेरा गया राष्ट्रचिह्न चांद की सतह पर अंकित हो जाएगा]]></category>
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					<description><![CDATA[न्यूज़ डेस्क नई दिल्ली। दो दिन से चंद्रमा के चारों ओर 35 किमी की ऊंचाई पर मंडरा रहा भारत का चंद्रयान-2 छह और सात सितंबर की दरमियानी रात चंद्रमा की सतह पर कदम रखेगा। लैंडिंग का समय करीब आते ही इसरो के वैज्ञानिकों सहित सभी की धड़कनें तेज होने लगी हैं। 978 करोड़ लागत वाले &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>न्यूज़ डेस्क</strong></span></p>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> दो दिन से चंद्रमा के चारों ओर 35 किमी की ऊंचाई पर मंडरा रहा भारत का चंद्रयान-2 छह और सात सितंबर की दरमियानी रात चंद्रमा की सतह पर कदम रखेगा। लैंडिंग का समय करीब आते ही इसरो के वैज्ञानिकों सहित सभी की धड़कनें तेज होने लगी हैं।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>978 करोड़ लागत वाले इस मिशन पर भारत सहित पूरी दुनिया की निगाह है। 1471 किलो के लैंडर ‘विक्रम’ की सॉफ्ट लैंडिंग सफल रही तो भारत ऐसा करने वाले दुनिया के चार देशों में शामिल हो जाएगा।</strong></span></p></blockquote>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-125731" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/09/1-6.jpg" alt="" width="833" height="490" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/09/1-6.jpg 580w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/09/1-6-300x176.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 833px) 100vw, 833px" /></p>
<p>चंद्रमा पर अब तक अमेरिका, रूस और चीन ही अपने यान उतार सके हैं। बंगलूरू स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) के वैज्ञानिक लैंडिंग की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, सभी का ध्यान विक्रम की गतिविधि पर टिका है।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>इसरो अध्यक्ष के. सिवन भी लैंडिंग को बेहद चुनौतीपूर्ण बता चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसरो पहुंचकर 70 स्कूली बच्चों के साथ सॉफ्ट लैंडिंग का सीधा प्रसारण देखेंगे।</strong></span></p></blockquote>
<p>https://twitter.com/isro/status/1169650015347732481?s=20</p>
<h3><span style="color: #800000;"><strong>  ऐसे होगी लैंडिंग</strong></span></h3>
<ul>
<li>रात 1 से 2 बजे के बीच विक्रम और इसमें रखे रोवर ‘प्रज्ञान’ को बूस्टर प्रोपल्शन सिस्टम की मदद से लैंडिंग के लिए तैयार किया जाएगा।</li>
<li>1:30 से 2:30 के बीच विक्रम को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारा जाएगा। ध्रुव के इस हिस्से में आज तक कोई देश लैंडिंग नहीं कर सका है।</li>
<li>5:30 से 6:30 के बीच छह पहिये वाला 27 किलो का प्रज्ञान लैंडर से निकलेगा। यह चांद की सतह पर 500 मीटर चलेगा।</li>
<li>इसके पहियों पर उकेरा गया राष्ट्रचिह्न चांद की सतह पर अंकित हो जाएगा।</li>
</ul>
<h3><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-125732" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/09/2-5.jpg" alt="" width="835" height="626" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/09/2-5.jpg 595w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/09/2-5-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 835px) 100vw, 835px" /></h3>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>इसरो के पूर्व अध्यक्ष एएस किरण कुमार के अनुसार सॉफ्ट लैंडिंग मिशन का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। अब तब सब योजना के अनुसार हुआ है, आगे भी ऐसा ही होगा। </strong></span></p></blockquote>
<p>चंद्रयान-1 मिशन के निदेशक रहे ए अन्नादुरई ने कहा, इसरो के पास 40 से अधिक जियोसिंक्रोनस इक्वेटेरियल ऑर्बिट (जीओ) मिशन संभालने का अनुभव है। ऐसे में सॉफ्ट लैंडिंग सफल होने की पूरी उम्मीद है। करीब 35 किमी ऊंचाई से विक्रम 15 मिनट में उतरेगा।</p>
<h3><span style="color: #800000;"><strong>चांद धरती के राज खंगालेंगे विक्रम और प्रज्ञान</strong></span></h3>
<p>विक्रम और प्रज्ञान एक चंद्र दिवस (पृथ्वी के 14 दिन) तक काम करेंगे। चांद की परिक्रमा करते हुए ऑर्बिटर एक वर्ष शोध व अध्ययन करता रहेगा। मिशन का उद्देश्य चांद पर मौजूद खनिजों- धातुओं और तत्वों की खोज और अध्ययन, चंद्रमा की मैपिंग और पानी की खोज करना है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>चांद के करीब पहुंचा चंद्रयान-2, देखकर हो जाएंगे दंग</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/chandrayaan-2-closer-to-the-moon-will-be-shocked-by-seeing/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ali Raza]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 26 Aug 2019 14:49:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[न्यूज़ डेस्क नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का मिशन Chandrayaan-2 धीरे- धीरे सरप्राइज और घटनाक्रम भेज रहा है। इसी के साथ वह चांद के साऊथ पोल की ओर भी तेजी से बढ़ रहा है। ISRO समय- समय पर इससे जुड़ी अपडेट्स भी साझा कर रहा है। ताजे घटनाक्रम में Chandrayaan-2 ने चांद के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #0000ff;">न्यूज़ डेस्क</span> </strong></p>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का मिशन Chandrayaan-2 धीरे- धीरे सरप्राइज और घटनाक्रम भेज रहा है। इसी के साथ वह चांद के साऊथ पोल की ओर भी तेजी से बढ़ रहा है। ISRO समय- समय पर इससे जुड़ी अपडेट्स भी साझा कर रहा है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-124091" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/4-7.jpg" alt="" width="832" height="564" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/4-7.jpg 580w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/4-7-300x203.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/4-7-110x75.jpg 110w" sizes="auto, (max-width: 832px) 100vw, 832px" /></p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>ताजे घटनाक्रम में Chandrayaan-2 ने चांद के सतह की कुछ तस्वीरें और भेजी है। दरअसल, चंद्रयान-2 के कैमरे ने चांद की कुछ और तस्वीरें भेजी हैं, जिसे ISRO साझा की हैं। </strong></span></p></blockquote>
<p>चंद्रयान-2 के टेरेन मैपिंग कैमरा (टीएमसी -2) द्वारा चांद की सतह की लगभग 4375 किमी की ऊंचाई पर से तस्वीरें ली हैं। इसरो के अनुसार इन तस्वीरों में जैक्सन, मच, कोरोलेव और मित्रा नामक स्थान दिखाई दे रहा है।</p>
<p>जैक्सन एक प्रभाव गड्ढा है जो चंद्रमा के सबसे दूर के उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। यह 22.4 ° N और 163.1 ° W (इनसेट में दिखाया गया) पर 71 किमी व्यास का गड्ढा है। मच क्रेटर के पश्चिमी बाहरी रिम में दिलचस्प विशेषता एक और प्रभाव गड्ढा, मित्रा (92 किमी व्यास) है। इसका नाम प्रो।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-124092" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/5-6.jpg" alt="" width="833" height="778" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/5-6.jpg 700w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/5-6-300x280.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 833px) 100vw, 833px" /></p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>शिशिर कुमार मित्रा के नाम पर रखा गया है, जो एक भारतीय भौतिक विज्ञानी और पद्म भूषण प्राप्तकर्ता थे, जिन्हें आयनमंडल और रेडियोफिजिक्स के क्षेत्र में अग्रणी काम के लिए जाना जाता था। </strong></span></p></blockquote>
<p>छवि में देखा गया कोरोलेव गड्ढा 437 किमी का गड्ढा है जिसमें कई छोटे आकार के अलग-अलग गड्ढे हैं। सोमरफेल्ड एक बड़ा प्रभाव गड्ढा है जो चंद्रमा के फ़ार्साइड उत्तरी अक्षांश में स्थित है। यह 65.2 ° N और 162.4 ° W पर 169 किमी व्यास का गड्ढा है। इसमें अपेक्षाकृत समतल आंतरिक भाग है जो रिंग पर्वत से घिरा हुआ है और कई छोटे क्रेटर रिम किनारे पर स्थित हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-124093" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/6-6.jpg" alt="" width="834" height="704" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/6-6.jpg 771w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/6-6-300x253.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/6-6-768x648.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 834px) 100vw, 834px" /></p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>क्रेटर का नाम डॉ. अर्नोल्ड सोमरफेल्ड के नाम पर रखा गया है, जो एक जर्मन भौतिक विज्ञानी परमाणु और क्वांटम भौतिकी के क्षेत्र में अग्रणी है। </strong></span></p></blockquote>
<p>इस क्रेटर के उत्तर पूर्व में अमेरिकी खगोलशास्त्री डैनियल किर्कवुड के नाम पर कर्कवुड क्रेटर स्थित है, जो एक अन्य सुव्यवस्थित प्रभाव वाला गड्ढा है जो लगभग 68 किमी व्यास का है।</p>
<p>https://twitter.com/isro/status/1165955024008048641?s=20</p>
<p>गौरतलब है कि अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने भारत के चंद्रयान-दो उपग्रह से ली गई चंद्रमा की पहली तस्वीर गुरुवार को जारी की। यह उपग्रह वर्तमान में चंद्रमा की कक्षा में मौजूद है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के शहर में स्थित मुख्यालय ने बताया कि चंद्रयान-2 के एलआई4 कैमरा ने चंद्रमा की यह तस्वीर उसकी सतह से 2,650 किलोमीटर की ऊंचाई से 21 अगस्त को ली थी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>चंद्रयान-2: सात सितम्बर को उतरेगा चंदा मामा के घर</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/chandrayaan-2-chanda-mamas-house-will-descend-on-september-7/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ali Raza]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Aug 2019 10:00:36 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[7 सितम्बर को चांद पर फाइनल लैंडिंग की जाएगी]]></category>
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		<category><![CDATA[चंद्रमा की सतह से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर चंद्र ध्रुवों के ऊपर से गुजर रही]]></category>
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		<category><![CDATA[चंद्रयान-2: सात सितम्बर को उतरेगा चंदा मामा के घर]]></category>
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		<category><![CDATA[लैंडर के सभी सिस्टम सही काम कर रहे हैं]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से शुरू हुआ था]]></category>
		<category><![CDATA[साउथ पोल पर सतह पर लैंड करेगा]]></category>
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					<description><![CDATA[न्यूज़ डेस्क नई दिल्ली। चंद्रयान-2 ने मंगलवार सुबह 9:02 मिनट पर चन्द्रमा की कक्षा में प्रवेश कर लिया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने आज चंद्रयान-2 के तरल रॉकेट इंजन को दाग कर उसे चांद की कक्षा में पहुंचाने के अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। लैंडर के सभी सिस्टम सही काम कर रहे हैं। उसके &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #0000ff;">न्यूज़ डेस्क</span> </strong></p>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> चंद्रयान-2 ने मंगलवार सुबह 9:02 मिनट पर चन्द्रमा की कक्षा में प्रवेश कर लिया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने आज चंद्रयान-2 के तरल रॉकेट इंजन को दाग कर उसे चांद की कक्षा में पहुंचाने के अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। लैंडर के सभी सिस्टम सही काम कर रहे हैं। उसके बाद 7 सितम्बर को चांद पर फाइनल लैंडिंग की जाएगी।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone  wp-image-122905" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/chandryaan-2.jpg" alt="" width="830" height="534" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/chandryaan-2.jpg 620w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/chandryaan-2-300x193.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 830px) 100vw, 830px" /></p>
<p>इससे पहले इसरो ने कहा था कि इसके बाद यान को चंद्रमा की सतह से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर चंद्र ध्रुवों के ऊपर से गुजर रही इसकी अंतिम कक्षा में पहुंचाने के लिए चार और कक्षीय प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जाएगा। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि इसके बाद लैंडर &#8216;विक्रम दो सितंबर को ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा।</p>
<p>इसरो के प्रमुख के. सिवन के अनुसार अगला अहम कदम दो सितम्बर को होगा, जब लैंडर को ऑरबिटर से अलग किया जाएगा। तीन सितम्बर को लगभग तीन सेकंड की एक छोटी-सी प्रक्रिया होगी, ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि लैंडर के सभी सिस्टम सही काम कर रहे हैं। उसके बाद सात सितम्बर को फाइनल लैंडिंग की जाएगी।</p>
<p>https://twitter.com/isro/status/1163675516898910209</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>इसरो के मुखिया के सिवन ने बताया कि सात सितम्बर को सुबह 1:55 बजे लैंडर चंद्रमा के साउथ पोल पर सतह पर लैंड करेगा। चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले लैंडर संबंधी दो कक्षीय प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जाएगा। </strong></span></p></blockquote>
<p>चंद्रयान-2 ने 22 जुलाई को लॉन्चिंग के बाद पहली बार अपने एलआई4 कैमरे से पृथ्वी की तस्वीरें भेजीं थीं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट चंद्रयान-2 का सफर सोमवार को दिन के 2 बजकर 43 मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से शुरू हुआ था। चंद्रयान-2 मिशन की लॉन्चिंग की तारीख पहले 15 जुलाई थी। बाद में इसे 22 जुलाई को लॉन्च किया गया था।</p>
<p>https://twitter.com/isro/status/1163670742908563456</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>मिशन की लॉन्चिंग की तारीख पहले आगे बढ़ाने के बावजूद चंद्रयान-2 चांद पर तय तारीख सात सितम्बर को ही पहुंचेगा। मंगलवार को चंद्रयान-2 ने चंद्रमा की कक्षा में सफलता पूर्वक प्रवेश कर लिया है।</strong></span></p></blockquote>
<p>इसरो का चंद्रयान-2 मंगलवार सुबह चांद की कक्षा में स्थापित हो गया। इस तरह अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत ने बहुत बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। इसरो के मुताबिक चंद्रयान-2 के सभी सिस्टम बिल्कुल सही तरीके से काम कर रहे हैं।</p>
<p>https://twitter.com/isro/status/1163638230693994496</p>
<p>इसरो ने कहा कि इस विशेष कार्यक्रम का काल 1,738 सेकेंड का था, जिसमें चंद्रयान-2 सफलतापूर्वक चांद की कक्षा में प्रवेश कर गया। कक्षा 114 किलोमीटर गुणा 18,072 किलोमीटर की है। इसके बाद, चंद्रयान-2 को कई कक्षाओं में प्रवेश कराने के बाद, चांद की सतह से लगभग 100 किलोमीटर दूर चांद के ध्रुवों से गुजरते हुए इसकी अंतिम कक्षा में प्रवेश कराना होगा।</p>
<p>अंतरिक्ष यान पर बेंगलुरू स्थित इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क स्थित मिशन ऑपरेशंस कॉम्प्लेक्स (एमओएक्स) द्वारा बेंगलुरू के पास बेलालू स्थित इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (आईडीएसएन) एंटीना की मदद से नजर रखी जा रही है। चंद्रयान-2 भारतीय जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल-मार्क तृतीय (जीएसएलवी-एमके तृतीय) द्वारा 22 मई को प्रक्षेपित किया गया था।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>चंद्रयान-2 ने LI4 कैमरे से भेजीं पृथ्वी की तस्वीरें</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/chandrayaan-2-photos-of-earth-sent-from-li4-camera/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ali Raza]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 04 Aug 2019 09:12:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
		<category><![CDATA[2019]]></category>
		<category><![CDATA[6 अगस्त को यह धरती की अगली कक्षा में प्रवेश करेगा]]></category>
		<category><![CDATA[chandyan-2]]></category>
		<category><![CDATA[isro]]></category>
		<category><![CDATA[LI4 कैमरे]]></category>
		<category><![CDATA[इसरो]]></category>
		<category><![CDATA[चंद्रयान 2 LI4 कैमरा द्वारा क्लिक की गई पृथ्वी]]></category>
		<category><![CDATA[चंद्रयान-2]]></category>
		<category><![CDATA[चंद्रयान-2 अब पृथ्वी के चारों तरफ 5 के बजाय 4 ही चक्कर लगाएगा]]></category>
		<category><![CDATA[चांद की सतह पर विभिन्न प्रयोग करने के लिए उतरेगा]]></category>
		<category><![CDATA[दक्षिणी ध्रुव की तरफ यात्रा शुरू करेगा]]></category>
		<category><![CDATA[पृथ्वी]]></category>
		<category><![CDATA[पृथ्वी की तस्वीरें]]></category>
		<category><![CDATA[पृथ्वी की सुंदर तस्वीरों का पहला सेट 3 अगस्त]]></category>
		<category><![CDATA[पृथ्वी से दूरी]]></category>
		<category><![CDATA[मिशन चंद्रयान-2]]></category>
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					<description><![CDATA[न्यूज़ डेस्क नई दिल्ली। चंद्रयान-2 ने 22 जुलाई को लॉन्चिंग के बाद पहली बार अपने एलआई4 कैमरे से पृथ्वी की तस्वीरें भेजीं हैं जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने रविवार को अपने ट्विटर हैंडल पर जारी की हैं। पहली तस्वीर के कैप्शन में लिखा है- &#8216;चंद्रयान 2 में विक्रम लैंडर द्वारा क्लिक की गई &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #0000ff;">न्यूज़ डेस्क</span> </strong></p>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> चंद्रयान-2 ने 22 जुलाई को लॉन्चिंग के बाद पहली बार अपने एलआई4 कैमरे से पृथ्वी की तस्वीरें भेजीं हैं जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने रविवार को अपने ट्विटर हैंडल पर जारी की हैं।</p>
<p>पहली तस्वीर के कैप्शन में लिखा है- &#8216;चंद्रयान 2 में विक्रम लैंडर द्वारा क्लिक की गई पृथ्वी की सुंदर तस्वीरों का पहला सेट 3 अगस्त, 2019 17:28 UT पर चंद्रयान 2 LI4 कैमरा द्वारा क्लिक की गई पृथ्वी।&#8217; दूसरी तस्वीर के कैप्शन में इसरो ने लिखा है- &#8216;3 अगस्त, 2019 17:29 UT पर चंद्रयान 2 LI4 कैमरे ने कुछ ऐसी देखी पृथ्वी।&#8217;</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone  wp-image-120289" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/chandyan-2.jpg" alt="" width="829" height="622" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/chandyan-2.jpg 750w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/chandyan-2-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 829px) 100vw, 829px" /></p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट चंद्रयान-2 का सफर सोमवार को दिन के 2 बजकर 43 मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से शुरू हुआ था। </strong></span></p></blockquote>
<p>चांद के दक्षिणी ध्रुव तक का सफर तय करने निकला चंद्रयान-2 अब पृथ्वी के चारों तरफ 5 के बजाय 4 ही चक्कर लगाएगा क्योंकि 24 जुलाई को पृथ्वी की कक्षा में जाने का समय करीब एक मिनट बढ़ा दिया गया है। इसरो ने 24, 26 और 29 जुलाई को चंद्रयान-2 का धरती की पहली, दूसरी और तीसरी कक्षा में परिवर्तन कराया था।</p>
<p>https://twitter.com/isro/status/1157902981431357440?s=20</p>
<p>चंद्रयान-2 ने शुक्रवार को धरती की चौथी कक्षा में सफलता पूर्वक प्रवेश करके चांद तक पहुंचने के 15 अहम पड़ावों में से चार को पूरा कर लिया है। इसरो के मुताबिक चंद्रयान-2 लगातार पृथ्वी की कक्षा से आगे बढ़ रहा है, इसीलिए 2 अगस्त (शुक्रवार) को 3 बजकर 27 मिनट पर चंद्रयान-2 की कक्षा में चौथी बार सफलतापूर्वक बदलाव किया था।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>अभी तक की सारी गतिविधियां सामान्य हैं और चार दिन बाद 6 अगस्त को यह धरती की अगली कक्षा में प्रवेश करेगा। चंद्रयान-2 की पेरिजी (पृथ्वी से कम दूरी) 277 किलोमीटर और एपोजी (पृथ्वी से ज्यादा दूरी) 89,472 किमी कर दी गई है। </strong></span></p></blockquote>
<p>https://twitter.com/isro/status/1157903612862844928?s=20</p>
<p>चांद के गुरुत्व क्षेत्र में प्रवेश करने पर चंद्रयान-2 के प्रोपेलिंग सिस्टम का इस्तेमाल इसकी रफ्तार धीमी करने के लिए किया जाएगा, ताकि यह चांद की प्रारंभिक कक्षा में प्रवेश कर सके। पृथ्वी के प्रभाव वाले क्षेत्र से चांद के आभामंडल में यह 14 अगस्त को प्रवेश करेगा। 14 अगस्त से 20 अगस्त तक चांद की तरफ जाने वाली लंबी कक्षा में प्रवेश करेगा।</p>
<p>https://twitter.com/isro/status/1157904014421311488?s=20</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>इसके बाद चंद्रयान-2 चांद की तरफ जाने वाली कक्षा में यात्रा करके 20 अगस्त को चांद की कक्षा में पहुंचेगा। इसके बाद 31 अगस्त तक वह चांद के चारों तरफ चक्कर लगाएगा। </strong></span></p></blockquote>
<p>1 सितम्बर को विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग होने के बाद चांद के दक्षिणी ध्रुव की तरफ यात्रा शुरू करेगा। 5 दिन की यात्रा के बाद 6 सितम्बर को विक्रम लैंडर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। लैंडिंग के करीब 4 घंटे बाद रोवर प्रज्ञान चांद की सतह पर विभिन्न प्रयोग करने के लिए उतरेगा।</p>
<p>https://twitter.com/isro/status/1157901184520167424?s=20</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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