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	<title>भारतीय राजनीति Archives &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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	<item>
		<title>राज्यपालों की भूमिका पर फिर उठ रहे सवाल</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/questions-are-again-being-raised-on-the-role-of-governors/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 08 May 2026 12:31:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[यशोदा श्रीवास्तव तमिलनाडु में राज्यपाल की ओर से जिस तरह सबसे बड़े दल टीबी के को सरकार बनाने से रोकने की कोशिश हो रही है, उससे फिर एक बार भारत में राज्यपालों की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है। यह कहना मुश्किल है कि राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ऐसा स्वयं कर रहे हैं &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-vivid-red-color has-text-color has-link-color has-medium-font-size wp-elements-258749f2403c55ec98c811ff5c6b7b8d wp-block-paragraph"><strong>यशोदा श्रीवास्तव</strong></p>



<p class="has-medium-font-size wp-block-paragraph">तमिलनाडु में राज्यपाल की ओर से जिस तरह सबसे बड़े दल टीबी के को सरकार बनाने से रोकने की कोशिश हो रही है, उससे फिर एक बार भारत में राज्यपालों की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है। </p>



<p class="has-medium-font-size wp-block-paragraph">यह कहना मुश्किल है कि राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ऐसा स्वयं कर रहे हैं या केंद्र सरकार के इशारे पर? लेकिन चूंकि राज्यपालों की नियुक्ति केंद्र में सत्तारूढ़ दल की अनुकंपा पर ही होता है इसलिए राज्यपालों को केंद्र सरकार की कठपुतली भी कह सकते हैं।</p>



<p class="has-medium-font-size wp-block-paragraph">पूर्व में एक नहीं दर्जनों ऐसे उदाहरण है जब राज्यपालों ने केंद्र सरकार की मर्जी पर ही काम किया है।</p>



<p class="has-medium-font-size wp-block-paragraph">तमिलनाडु में भाजपा का केवल एक विधायक है तो क्या इसी एक को मुख्यमंत्री बनाने की कोशिश हो रही है? यदि हां तो राजयपाल को सर्वाधिक 108 विधायकों वाली पार्टी को बहुमत सिद्ध कर पाने में संदेह है तो एक अकेले पर कैसे भरोसा कर सकते हैं? और वहां जिस गठबंधन में भाजपा है वह पार्टी भी बहुमत से कोसों दूर है।</p>



<p class="has-medium-font-size wp-block-paragraph">एक्टर से नेता बने थलापति विजय के नेतृत्व में टीबी के को बहुमत सिद्ध करने के लिए केवल आठ विधायकों की जरूरत है। कांग्रेस ने विजय की पार्टी को अपना समर्थन दे दिया है। डीएमके चीफ व निवर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी विजय को सरकार बनाने में किसी भी रुकावट को नामंजूर कर दिया है,दो तीन छोटी पार्टियों के विधायकों के समर्थन मिलने की पूरी संभावना भी है बावजूद राज्यपाल की ओर से यह रुकावट समझ से परे है। राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर यह तो जानते ही होंगे कि किसी मुख्यमंत्री को बहुमत सिद्ध करने की जगह राजभवन नहीं विधानसभा मंडप होता है।<br>पूर्व में राज्यपालों की ऐसी हठधर्मिता पर न्यायालय से भी दिशा निर्देश पारित किए गए हैं इसमें एस आर बोम्मई का मामला सुर्खियों में रहा है। फिलहाल तमिलनाडु के राज्यपाल का किसी दल की सरकार को रोकने को लेकर केंद्र सरकार पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।</p>



<p class="has-medium-font-size wp-block-paragraph"><br>प्रदेशों में यदि केंद्र सरकार के मनमाफिक सरकार नहीं है तो राज्यपालों द्वारा उसे तंग करने या बर्खास्त तक कर देने के ढेरों उदाहरण है ।आजादी के बाद स्वतंत्र भारत के इतिहास के अंदर झांके तो केंद्र सरकार द्वारा राज्यपालों के अपने तरीके से इस्तेमाल करने के उदाहरण बहुतेरे हैं। ऐसे भी उदाहरण है जब उनके जबरदस्ती की रिपोर्ट पर अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल कर सरकारें गिरा दी गई।<br>राज्यपालों के मनमानी के अजीब मामले देखे गए। राजस्थान का मामला याद होगा जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राज्य पाल कलराज मिश्र के घेराव तक का ऐलान करना पड़ा था। राज्यपाल प्रदेशों में केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में काम करते हैं लेकिन इन्हीं में से सत्य पाल मलिक जैसे राज्य पाल भी होते हैं जो सरकार से टकराते भी हैं। प्रदेशों में केंद्र सरकार द्वारा नामित राज्यपालों का उपयोग केंद्र सरकार ऐसे प्रदेशों में खूब करती हैं जहां उनके दल की सरकार नहीं होती है। यह परंपरा नई नहीं है। पूर्व में कई प्रदेशों में राज्यपालों की भूमिका पर उठ रहे सवालों से पता चला है कि किस तरह कठपुतली की तरह उनका इस्तेमाल किया गया है। </p>



<p class="has-medium-font-size wp-block-paragraph">कठपुतली की तरह राज्यपालों के इस्तेमाल की शुरूआत नेहरू के शासन काल से ही हो चुकी थी। उसके बाद जैसे राज्यपालों को ताश के पत्ते की तरह फेंटने की परंपरा ही चल पड़ी। हैरत है तमाम राज्यपाल अपनी गरिमा की तनिक भी परवाह किए बिना वह सब करते रहे जो केंद्र सरकार की मर्जी रही। उदाहरण के तौर पर हरियरणा में जेडी तपासे,सिक्किम में तलयार खान, जम्मू कश्मीर में जगमोहन और ऐसे ही उस काल के तमाम राज्यपालों का स्मरण किया जा सकता है।<br>राज्यपालों के केंद्र सरकार के प्रति अंधभक्ति की वजह से कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे राम कृष्ण हेगड़े ने अपने यहां के तत्कालीन राज्यपाल एएन बनर्जी को केंद्र सरकार का नौकर तक कह डाला था तो आंध्र प्रदेश के राज्यपाल रामलाल को लोग गुंडा बेइमान और डकैत तक कहने से बाज नहीं आए थे। कांग्रेस के शासन काल में राज्यपालों को मोहरा बनाए जाने के ढेरों उदाहरण है। भाजपा ने राज्यपालों का सर्वाधिक उपयोग प्रदेशों में दूसरे दलों की सरकार गिराकर एन केन प्रकारेण अपनी सरकार बनाने में किया। </p>



<p class="has-medium-font-size wp-block-paragraph">सिक्किम,मेघालय,मिजोरम,नागालैंड,गोवा जैसे प्रदेशों में बीजेपी के शून्य से लेकर 01,02,12,व 13 विधायक चुने गए थे। बीजेपी की यह सदस्य संख्या सरकार क्या विपक्ष के लायक भी नहीं थी लेकिन राज्यपालों ने वहां उनकी सरकार बनवाने में भरपूर मदद की थी।<br>कहते हैं कि नेहरू शासन काल में राज्यपालों का वेजा इस्तेमाल नहीं किया जाता था और जनतात्रिक मूल्यों की रक्षा हो रही थी।लेकिन यह बताने की जरूरत नहीं है कि नेहरू के कार्याकाल में अधिकांश प्रदेशीय सरकार भी कांग्रेस की ही हुआ करती थी। इसलिए सरकार गिराने या बनाने में राज्यपालों के इस्तेमाल की जरूरत नहीं महसूस हुई।लेकिन नेहरू काल के जनतांत्रिक होने का भी भ्रम 1959 में तब टूट गया जब केरल की इएमएस नंबूदरीपाद की कम्युनिस्ट सरकार को एक दम अनुचित ढंग से गिरा दिया गया।उस वक्त कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती इंदरा गांधी थीं जिनका केरल में कानून व्यवस्था की बिगड़ी हाल के बहाने केरल सरकार गिराए जाने का समर्थन था।नेहरू तब इस ओर से आंख बंद किए रहे।बताने की जरूरत नहीं कि आपातकाल के बाद 1980 में वापस लौटीं श्रीमती इंदिरा गांधी के शासन काल में आंध्र प्रदेश में एन टी रामाराव की सरकार को तत्कालीन राज्यपाल रामलाल ने कैसे बर्खास्त किया था? इंदरा गांधी का यह ऐसा शासन काल था जब राज्यपालों का खूब मनमाना इस्तेमाल हुआ।<br>राज्यपालों के संदर्भ में पूर्व की स्थिति की पूनरावृत्ति की कल्पना फिलहाल भाजपा शासनकाल में नहीं की गई थी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>चुनाव आयोग की सख्ती: 474 गैर-मान्यता प्राप्त दलों को सूची से हटाया, अब तक 808 पार्टियाँ बाहर</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/election-commission-cracks-down-474-unrecognized-parties-removed-from-list-808-removed-so-far/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 20 Sep 2025 04:01:16 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[भारतीय राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीतिक दलों पर कार्रवाई]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली स्पेशल डेस्क नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने चुनावी पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 474 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPP) को सूची से हटा दिया है। ये वे दल हैं जिन्होंने पिछले छह सालों से कोई चुनाव नहीं लड़ा और न ही तय नियमों का पालन किया। इससे पहले 9 अगस्त को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली स्पेशल डेस्क</strong></span></p>
<p>नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने चुनावी पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 474 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPP) को सूची से हटा दिया है। ये वे दल हैं जिन्होंने पिछले छह सालों से कोई चुनाव नहीं लड़ा और न ही तय नियमों का पालन किया।</p>
<p>इससे पहले 9 अगस्त को 334 दलों को डी-लिस्ट किया गया था। यानी पिछले दो महीनों में कुल 808 दलों को बाहर किया जा चुका है। अब देशभर में गैर-मान्यता प्राप्त दलों की संख्या 2,520 से घटकर 2,046 रह गई है। इसके अलावा, वर्तमान में 6 राष्ट्रीय दल और 67 राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त दल सक्रिय हैं।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>बिहार चुनाव से पहले बड़ा असर</strong></span></p>
<p>यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है जब नवंबर में बिहार विधानसभा चुनाव होने हैं। हटाए गए दलों में 14 दल बिहार के भी शामिल हैं। इन दलों को अब चुनाव में उम्मीदवार उतारने का अधिकार नहीं होगा।<br />
अधिकारियों ने बताया कि कई दल न तो चुनाव लड़ रहे थे और न ही अपने सालाना खाते और खर्चों की रिपोर्ट जमा कर रहे थे। 2021-22 से 2023-24 तक, 359 दलों ने ऑडिटेड अकाउंट्स और चुनावी खर्च रिपोर्ट भी नहीं सौंपी।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>पारदर्शिता और कानून का पालन ज़रूरी</strong></span></p>
<p>चुनाव आयोग का कहना है कि निष्क्रिय और संदिग्ध दलों को हटाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अनिवार्य है।<br />
कई मामलों में दलों पर इनकम टैक्स और मनी लॉन्ड्रिंग कानूनों के उल्लंघन के आरोप भी लगे थे। आयोग ने स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकृत दलों को टैक्स छूट और अन्य सुविधाएं मिलती हैं, इसलिए सक्रिय न रहने वाले दलों को सूची से बाहर करना ही सही कदम है।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>दोबारा पंजीकरण का विकल्प</strong></span></p>
<p>चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन दलों को सूची से हटाया गया है, वे चाहें तो भविष्य में दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मोदी के 75वें जन्मदिन पर विपक्ष से लेकर सत्ता तक के नेताओं ने दी बधाई</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/leaders-from-opposition-to-ruling-party-extend-greetings-to-modi-on-his-75th-birthday/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 Sep 2025 04:39:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जुबिली स्पेशल डेस्क प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन पर देश-विदेश से बधाइयों का सिलसिला जारी रहा। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बड़े नेताओं के साथ-साथ राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं। राहुल गांधी और खरगे की शुभकामनाएं लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पीएम मोदी को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली स्पेशल डेस्क</strong></span></p>
<p data-start="77" data-end="290">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन पर देश-विदेश से बधाइयों का सिलसिला जारी रहा। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बड़े नेताओं के साथ-साथ राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं।</p>
<p data-start="292" data-end="556"><span style="color: #800000;"><strong data-start="292" data-end="329">राहुल गांधी और खरगे की शुभकामनाएं</strong></span></p>
<p data-start="292" data-end="556">लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई दी और उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी पोस्ट कर मोदी को दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की शुभकामनाएं दीं।</p>
<p data-start="292" data-end="556"><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-327924" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot-2025-09-17-100533.jpg" alt="" width="612" height="275" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot-2025-09-17-100533.jpg 612w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot-2025-09-17-100533-300x135.jpg 300w" sizes="(max-width: 612px) 100vw, 612px" /></p>
<p data-start="292" data-end="556">कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी पीएम मोदी को उनके 75वें जन्मदिन पर बधाई दी है। खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि पीएम मोदी को उनको जन्मदिन की बधाई देता हूं। साथ ही मैं उनके बेहतर स्वास्थ्य की कामना भी करता हूं. भगवान उनको दीर्घायु बनाए।</p>
<p data-start="292" data-end="556"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-327925" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot-2025-09-17-100609.jpg" alt="" width="613" height="353" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot-2025-09-17-100609.jpg 613w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot-2025-09-17-100609-300x173.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 613px) 100vw, 613px" /></p>
<p data-start="558" data-end="826"><span style="color: #800000;"><strong data-start="558" data-end="596">राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संदेश</strong></span></p>
<p data-start="558" data-end="826">राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संदेश में मोदी को असाधारण नेतृत्व का प्रतीक बताते हुए उनके मार्गदर्शन में देश की प्रगति की सराहना की। उन्होंने प्रार्थना की कि प्रधानमंत्री स्वस्थ और सानंद रहकर देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएं।</p>
<p data-start="828" data-end="1168"><span style="color: #800000;"><strong data-start="828" data-end="885">केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों की प्रतिक्रियाएं</strong></span></p>
<p data-start="828" data-end="1168">केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुद्वारों में प्रधानमंत्री के दीर्घायु जीवन के लिए अरदास किए जाने की जानकारी दी। गृहमंत्री अमित शाह ने मोदी के नेतृत्व में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतरिक्ष से लेकर समुद्र की गहराई तक भारत ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।</p>
<p data-start="1170" data-end="1468">बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू समेत कई मुख्यमंत्रियों ने भी प्रधानमंत्री को शुभकामनाएं दीं। योगी आदित्यनाथ ने उन्हें &#8220;140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का संवाहक&#8221; बताते हुए भगवान राम से उनके दीर्घायु जीवन की प्रार्थना की।</p>
<p data-start="1470" data-end="1714"><span style="color: #800000;"><strong data-start="1470" data-end="1511">अन्य नेताओं और हस्तियों की शुभकामनाएं</strong></span></p>
<p data-start="1470" data-end="1714">एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार, टीएमसी नेता और अभिनेता शत्रुघन सिन्हा सहित कई अन्य नेताओं ने भी मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पीएम मोदी को बधाई संदेश भेजा।</p>
<p data-start="1716" data-end="1913" data-is-last-node="" data-is-only-node="">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के नेताओं की साझा बधाई ने यह दिखाया कि राजनीतिक मतभेदों से परे भी प्रधानमंत्री को एक राष्ट्रीय नेतृत्व के तौर पर स्वीकार किया जाता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भारत के 17वें उपराष्ट्रपति के लिए आज मतदान, NDA और विपक्ष आमने-सामने</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/voting-for-the-17th-vice-president-of-india-today-nda-and-opposition-face-to-face/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Sep 2025 04:36:43 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग न्यूज़]]></category>
		<category><![CDATA[उपराष्ट्रपति चुनाव 2025]]></category>
		<category><![CDATA[उपराष्ट्रपति पद]]></category>
		<category><![CDATA[एनडीए उम्मीदवार]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[बी. सुदर्शन रेड्डी]]></category>
		<category><![CDATA[भारत के 17वें उपराष्ट्रपति]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय राजनीति]]></category>
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		<category><![CDATA[लोकसभा सदस्य]]></category>
		<category><![CDATA[विपक्षी प्रत्याशी]]></category>
		<category><![CDATA[संसद भवन वोटिंग]]></category>
		<category><![CDATA[संसदीय चुनाव प्रक्रिया]]></category>
		<category><![CDATA[सी.पी. राधाकृष्णन]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली स्पेशल डेस्क नई दिल्ली। देश आज अपने 17वें उपराष्ट्रपति का चुनाव करने जा रहा है। मतदान संसद भवन के कक्ष संख्या एफ-101 (वसुधा) में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक होगा। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद देर शाम तक नतीजे आने की संभावना है। इस बार उपराष्ट्रपति चुनाव में दक्षिण भारत &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली स्पेशल डेस्क</strong></span></p>
<p>नई दिल्ली। देश आज अपने 17वें उपराष्ट्रपति का चुनाव करने जा रहा है। मतदान संसद भवन के कक्ष संख्या एफ-101 (वसुधा) में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक होगा। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद देर शाम तक नतीजे आने की संभावना है।</p>
<p>इस बार उपराष्ट्रपति चुनाव में दक्षिण भारत के दो दिग्गज आमने-सामने हैं। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने तमिलनाडु के वरिष्ठ नेता सी.पी. राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया है, जबकि विपक्ष की ओर से तेलंगाना के पूर्व न्यायाधीश और अनुभवी राजनेता बी. सुदर्शन रेड्डी को संयुक्त प्रत्याशी के तौर पर उतारा गया है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-327433" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/09/cnsbjttk_vice-president-elections_625x300_19_August_25.webp" alt="" width="545" height="307" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/09/cnsbjttk_vice-president-elections_625x300_19_August_25.webp 545w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/09/cnsbjttk_vice-president-elections_625x300_19_August_25-300x169.webp 300w" sizes="auto, (max-width: 545px) 100vw, 545px" /></p>
<p><span style="color: #ff6600;"><strong>निर्वाचन अधिकारी और राज्यसभा महासचिव पी.सी. मोदी के अनुसार, उपराष्ट्रपति चुनाव में कुल 788 सांसद मतदान के पात्र हैं। इनमें राज्यसभा के 233 निर्वाचित और 12 मनोनीत सदस्य, साथ ही लोकसभा के 543 निर्वाचित सदस्य शामिल हैं। हालांकि, मौजूदा रिक्तियों के कारण इस बार 781 सांसद ही वोट डालेंगे। उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों द्वारा होता है और इसमें राज्यसभा के नामित सदस्य भी वोट डाल सकते हैं।</strong></span></p>
<p>राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो संख्याबल राजग के पक्ष में माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सुबह ही मतदान के लिए संसद पहुंचे और उन्होंने सबसे पहले वोट डाला।</p>
<p>इधर, विपक्ष ने इस चुनाव को वैचारिक लड़ाई बताया है और कहा है कि यह सिर्फ संख्या का नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का चुनाव है।</p>
<p>गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति भी होते हैं। मौजूदा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का कार्यकाल पूरा होने के बाद अब नया चेहरा इस पद पर चुना जाएगा।</p>
<p>आज का चुनाव न केवल अगले पांच वर्षों के लिए ऊपरी सदन की कार्यवाही को प्रभावित करेगा, बल्कि सत्ता और विपक्ष के बीच भविष्य की राजनीति की दिशा भी तय कर सकता है।</p>
<p>इस बीच उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बीच दो बड़ी क्षेत्रीय पार्टियों भारत राष्ट्र समिति (BRS) और बीजू जनता दल (BJD) ने साफ कर दिया है कि वे चुनाव में मतदान से दूरी बनाए रखेंगे। दोनों पार्टियों का कहना है कि वे न तो NDA और न ही INDIA गठबंधन के साथ खड़ी होंगी।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>RSS ने 75 की उम्र में रिटायरमेंट की बात छेड़ी, मोदी पर विपक्ष के सवाल तेज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Jul 2025 06:30:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जुबिली स्पेशल डेस्क नागपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के एक बयान ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा कि 75 वर्ष की उम्र में नेताओं को स्वयं पीछे हट जाना चाहिए और नई पीढ़ी के लिए रास्ता बनाना चाहिए। भागवत नागपुर में आयोजित एक पुस्तक विमोचन समारोह में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली स्पेशल डेस्क</strong></span></p>
<p>नागपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के एक बयान ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा कि 75 वर्ष की उम्र में नेताओं को स्वयं पीछे हट जाना चाहिए और नई पीढ़ी के लिए रास्ता बनाना चाहिए।</p>
<p>भागवत नागपुर में आयोजित एक पुस्तक विमोचन समारोह में बोल रहे थे, जो दिवंगत संघ विचारक मोरोपंत पिंगले को समर्पित था। उन्होंने याद किया कि पिंगले हमेशा यह मानते थे कि जब उम्र 75 की हो जाए और शॉल ओढ़ाई जाए, तो यह संकेत होता है कि अब थोड़ा किनारे हो जाना चाहिए।</p>
<p><span style="color: #ff6600;"><strong>“राष्ट्रीय सेवा में समर्पण जरूरी है, लेकिन समय आने पर विनम्रता से पीछे हटना भी उतना ही अहम है,” – मोहन भागवत</strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-301911" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2024/06/08_06_2024-mohan_bhagwat_pm_modi_23734673_m.webp" alt="" width="700" height="394" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2024/06/08_06_2024-mohan_bhagwat_pm_modi_23734673_m.webp 700w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2024/06/08_06_2024-mohan_bhagwat_pm_modi_23734673_m-300x169.webp 300w" sizes="auto, (max-width: 700px) 100vw, 700px" /></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>क्या मोदी पर भी लागू होगा 75 साल का &#8216;नियम&#8217;? विपक्ष का वार</strong></span></p>
<p>भागवत के इस बयान के बाद विपक्षी दलों को मोदी सरकार पर हमला बोलने का नया मौका मिल गया है। शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने कहा: “प्रधानमंत्री मोदी ने 75 की उम्र पार करने पर लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और जसवंत सिंह जैसे दिग्गजों को रिटायर किया था। अब देखना है कि क्या वे खुद भी इसी मापदंड पर उतरेंगे?”कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी तंज कसते हुए कहा “जब मार्गदर्शक मंडल की अनिवार्य सेवानिवृत्ति लागू हुई थी, तब यह नीति थी। अब क्या उसी नियम से मौजूदा नेतृत्व भी गुज़रेगा या फिर नियम बदल जाएंगे?</p>
<p>यह बहस नई नहीं है। मार्च 2025 में भी संजय राउत ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री मोदी का नागपुर आरएसएस मुख्यालय जाना <strong data-start="1624" data-end="1647">संभवित उत्तराधिकारी</strong> को लेकर हुई चर्चाओं का हिस्सा था। हालांकि, <strong data-start="1693" data-end="1732">भाजपा ने उन अटकलों को सिरे से खारिज</strong> कर दिया था।”भागवत का बयान केवल संगठनात्मक दर्शन का हिस्सा था या इसके पीछे कोई <strong data-start="2152" data-end="2170">राजनीतिक संकेत</strong> भी छिपा है – यह फिलहाल साफ नहीं है। लेकिन इतना तय है कि <strong data-start="2227" data-end="2265">75 साल की उम्र और नेतृत्व परिवर्तन</strong> पर बहस अब और तेज हो चली है।</p>
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