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	<title>चीफ जस्टिस रंजन गोगोई Archives &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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	<description>News &#38; Information Portal</description>
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		<title>ये पांच जज आज रचेंगे इतिहास</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/five-judge-made-history-on-ayodhya-case/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ali Raza]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 09 Nov 2019 03:48:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[न्यूज़ डेस्क अयोध्या पर सबसे बड़ा फैसला आज यानी शनिवार को आएगा। इस फैसले के आने का काउंटडाउन शुरु हो चूका है। इसी के साथ आज का दिन इतिहास में दर्ज हो जायेगा। वर्षों से चल रहे इस मामले की अंतिम सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चालीस दिनों में पूरी की है। 40 दिन की बहस &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4></h4>
<p><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-136041 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/Ranjan-Gogoi-SA-Bobde-DY-Chandrachud-Ashok-Bhushan-S-Abdul-Nazeer-ram-mandir-2-1.jpg" alt="" width="900" height="454" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/Ranjan-Gogoi-SA-Bobde-DY-Chandrachud-Ashok-Bhushan-S-Abdul-Nazeer-ram-mandir-2-1.jpg 900w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/Ranjan-Gogoi-SA-Bobde-DY-Chandrachud-Ashok-Bhushan-S-Abdul-Nazeer-ram-mandir-2-1-300x151.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/Ranjan-Gogoi-SA-Bobde-DY-Chandrachud-Ashok-Bhushan-S-Abdul-Nazeer-ram-mandir-2-1-768x387.jpg 768w" sizes="(max-width: 900px) 100vw, 900px" /></p>
<h4><strong><span style="color: #000080">न्यूज़ डेस्क</span></strong></h4>
<p>अयोध्या पर सबसे बड़ा फैसला आज यानी शनिवार को आएगा। इस फैसले के आने का काउंटडाउन शुरु हो चूका है। इसी के साथ आज का दिन इतिहास में दर्ज हो जायेगा। वर्षों से चल रहे इस मामले की अंतिम सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चालीस दिनों में पूरी की है। 40 दिन की बहस के बाद अब पूरा देश की नजरें आज आने वाले फैसले पर टिकी हुई है।</p>
<p>वहीं, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में पांच जजों की पीठ ऐतिहासिक फैसला सुनाएगी। साथ ही ये पीठ भी इतिहास में अपना नाम दर्ज करवाएगी। आइए जानते है इस मामले में सुनवाई करने वाले जजों के बारे में।</p>
<h4><strong><span style="color: #800000">सीजीआई जस्टिस रंजन गोगोई</span></strong></h4>
<p>इस पीठ की अगुवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई कर रहे हैं। उन्होंने तीन अक्टूबर 2018 को बतौर मुख्य न्यायधीश पदभार ग्रहण किया था। उन्होंने 1978 में बार काउंसिल ज्वाइन किया। अपने पेशे की शुरुआत गुवाहाटी हाई कोर्ट से की, 2001 में गुवाहाटी हाई कोर्ट में जज भी बने।</p>
<p>बतौर चीफ जस्टिस अपने कार्यकाल में कई ऐतिहासिक मामलों को सुना है। इनमे अयोध्या केस, NRC, जम्मू-कश्मीर पर याचिकाएं जैसे केस शामिल हैं।</p>
<h4><strong><span style="color: #800000">जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े</span></strong></h4>
<p>इस पीठ में दूसरे जज जस्टिस एस. ए. बोबड़े हैं। जोकि रंजन गोगोई के बाद अगले चीफ जस्टिस होंगे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 1978 में बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र को ज्वाइन कर की थी। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में लॉ की प्रैक्टिस की, 1998 में वरिष्ठ वकील भी बने।</p>
<p>साल 2000 में उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में बतौर एडिशनल जज पदभार ग्रहण किया। इसके बाद वह मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने और 2013 में सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज कमान संभाली। जस्टिस एस. ए. बोबड़े 23 अप्रैल, 2021 को रिटायर होंगे।</p>
<h4><strong><span style="color: #800000">जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़</span></strong></h4>
<p>जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने 13 मई 2016 को सुप्रीम कोर्ट के जज का पदभार संभाला था। सुप्रीम कोर्ट में आने से पहले वो इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस थे। वहीं, बॉम्बे हाई कोर्ट में भी वह बतौर जज रह चुके हैं।</p>
<p>जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ जज नियुक्त होने से पहले देश के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल भी रह चुके हैं। वह सबरीमाला, भीमा कोरेगांव, समलैंगिकता समेत कई बड़े मामलों में पीठ का हिस्सा रह चुके हैं।</p>
<h4><strong><span style="color: #800000">जस्टिस अशोक भूषण</span></strong></h4>
<p>उत्तर प्रदेश के जौनपुर में जन्मे जस्टिस अशोक भूषण ने साल 1979 में यूपी बार काउंसिल का हिस्सा बने। इसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस की। इसके अलावा उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में कई पदों पर काम किया और वो 2001 में बतौर जज नियुक्त हुए। 13 मई 2016 को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में कार्यभार संभाला।</p>
<h4><strong><span style="color: #800000">जस्टिस अब्दुल नज़ीर</span></strong></h4>
<p>जस्टिस अब्दुल नज़ीर ने 1983 में वकालत की शुरुआत उन्होंने कर्नाटक हाई कोर्ट से की। इसके बाद उन्होंने वहां एडिशनल जज और परमानेंट जज के तौर पर कार्य किया। 17 फरवरी, 2017 को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज कार्यभार संभाला।</p>
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		<title>CJI ने यूपी डीजीपी को किया तलब, गृह मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/ayodhya-land-dispute-supreme-court-cji-ranjan-gogoi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ali Raza]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 08 Nov 2019 04:13:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[न्&#x200d;यूज डेस्&#x200d;क अयोध्या फैसले के मद्देनजर गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित राज्यों को एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी में प्रदेशों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। साथ ही चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने यूपी के डीजीपी ओपी सिंह और मुख्&#x200d;य सचिव को तलब किया है। जन गोगोई दोनों अफसरों से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong style="color: #0000ff;">न्&#x200d;यूज डेस्&#x200d;क</strong></p>
<p>अयोध्या फैसले के मद्देनजर गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित राज्यों को एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी में प्रदेशों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है।</p>
<p>साथ ही चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने यूपी के डीजीपी ओपी सिंह और मुख्&#x200d;य सचिव को तलब किया है। जन गोगोई दोनों अफसरों से आज दिन में मिलेंगे। माना जा रहा है कि अयोध्या पर संभावित फैसले से पहले की तैयारियों को लेकर यह मुलाकात हो सकती है।</p>
<p>बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ अयोध्या मामले पर फैसला सुनाने वाली है। इसलिए ये एडवाइजरी जारी कर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।</p>
<p>अयोध्या विवाद पर फैसले को लेकर योगी सरकार से लेकर पूरा प्रशासनिक अमला हाई अलर्ट पर आ चुका है। इस कड़ी सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों साथ सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की।</p>
<p>इसके साथ ही सभी दलों के नेताओं ने शांति रखने की अपील की है। इसके साथ ही अर्धसैनिक बल के 4,000 जवानों को एहतियातन उत्तर प्रदेश भेजा गया है।</p>
<p>केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को सभी राज्यों को भेजे सामान्य परामर्श में कहा है कि वे किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति न बनने दें। सुरक्षा-व्यवस्था बनाने में यूपी सरकार की मदद के लिए 40 कंपनी अतिरिक्त अर्धसैनिक बल भेजे गए हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-87444 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/ram-mandir-jubilee-post-1.jpg" alt="" width="600" height="400" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/ram-mandir-jubilee-post-1.jpg 600w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/ram-mandir-jubilee-post-1-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /></p>
<p>गृह मंत्रालय ने योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली उत्तर प्रदेश सरकार को अयोध्या में सभी सुरक्षा तैयारियों को सुनिश्चित करने के लिए आगाह किया है। अयोध्या को सुरक्षा तैयारियों के साथ किसी भी अप्रिय घटना को विफल करने के लिए एक किले की तरह बदल दिया जाएगा।</p>
<p>प्रदेश के सभी जिलों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। इतना ही नहीं, अयोध्या को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस फोर्स तैनात है. इसके साथ ही जिला प्रसाशन लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की बात भी कह रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने नेताओं और मंत्रियों से अयोध्या विवाद पर बयानबाजी न करने की सलाह दी है।</p>
<p>ऐसी आशंका है कि असामाजिक तत्व लोगों की धार्मिक भावनाओं को भड़का सकते हैं। इसलिए परिपत्र में यूपी सरकार को राज्य में अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखने और विशिष्ट स्थानों पर पुलिस बल तैनात करने के निर्देश भी दिए हैं।</p>
<p>फैसले को लेकर अयोध्या में भी सुरक्षा एजेंसियां और प्रशासन मुस्तैद हो गया है। बृहस्पतिवार को अतिसंवेदनशील विवादित परिसर के पीछे मिश्रित आबादी वाले मोहल्लों की सड़कें-गलियां बल्लियों से सील कर दी गईं।</p>
<p>अयोध्या पर फैसले से पहले अंबेडकर नगर के अलग-अलग कॉलेजों में 8 अस्थाई जेल बनाई गई है। प्रशासन ने ऐसा फैसला सुरक्षा के मद्देनजर लिया है। अयोध्या में पहले से हाई अलर्ट है और जगह-जगह जवानों की तैनाती की गई है। प्रशासन हर परिस्थिति से निपटने के लिए सुरक्षात्मक मोड में हैं। संवेदनशील मामला होने की वजह से एहतियातन ऐसा किया गया है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश पुलिस ने बरेली जोन में 6 हजार से ज्यादा ऐसे लोगों को चिन्हित किया है जो फैसले के बाद उपद्रव कर सकते हैं। ऐसे शरारती तत्वों को रेड कार्ड जारी किया गया है, यानी उन पर पुलिस की सख्त नजर रहेगी। बरेली जोन के शहर शाहजहापुर, बदायूं, पीलीभीत, रामपुर, मुरादाबाद, संभल, अमरोहा और बिजनौर में 4 हजार से अधिक ऐसे लोग चिन्हित किए गए हैं, ये वो लोग हैं जो बवाल करवा सकते हैं. इसके अलावा 90 ऐसे स्थान चिन्हित किये गए है जो संवेदनशील हैं।</p>
<p>स्मृति उपवन में 25 नवंबर से होने वाला लखनऊ महोत्सव स्थगित कर दिया गया है। प्रशासन ने जनवरी के तीसरे सप्ताह में यूपी दिवस के साथ इसका आयोजन करने का दावा किया है। माना जा रहा है कि प्रशासन ने अयोध्या के फैसले के मद्देनजर तमाम खुफिया इनपुट को आधार बनाते हुए सुरक्षा कारणों से महोत्सव की तिथियों को आगे बढ़ाया है।</p>
<p>मंडलायुक्त मुकेश मेश्रम की अध्यक्षता में महोत्सव समिति की बैठक में महोत्सव को जनवरी में कराने का निर्णय लिया गया। वहीं देर रात डीएम अभिषेक प्रकाश ने बताया कि 24 जनवरी को यूपी दिवस के साथ ही महोत्सव कराने का निर्णय किया गया है।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>आखिर क्यों गौतम नवलखा के केस से खुद को अलग कर रहे हैं जज</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/after-all-why-the-judge-is-separating-himself-from-gautam-navlakhas-case/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Oct 2019 07:57:23 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
		<category><![CDATA[आखिर क्यों गौतम नवलखा के केस से खुद को अलग कर रहे जज]]></category>
		<category><![CDATA[उच्चतम न्यायालय]]></category>
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		<category><![CDATA[चीफ जस्टिस रंजन गोगोई]]></category>
		<category><![CDATA[जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी]]></category>
		<category><![CDATA[जस्टिस एन. वी. रमना]]></category>
		<category><![CDATA[जस्टिस बी. आर. गवई]]></category>
		<category><![CDATA[जस्टिस यू यू ललित]]></category>
		<category><![CDATA[जस्टिस रवींद्र भट्ट]]></category>
		<category><![CDATA[बॉम्बे हाईकोर्ट]]></category>
		<category><![CDATA[सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा]]></category>
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					<description><![CDATA[न्यूज डेस्क अधिकांश लोगों के जेहन में इस समय सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा हैं। लोग उनके बारे में जानना चाह रहे हैं कि उन्होंने ऐसा क्या किया है कि जज उनके मामले की सुनवाई करने को तैयार नहीं है। बीते चार दिन में उच्चतम न्यायालय के पांच न्यायाधीश सामाजिक कार्यकर्ता गौतल नवलखा की याचिका पर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-130361" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/10/gautam-navlakha.jpg" alt="" width="730" height="455" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/10/gautam-navlakha.jpg 730w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/10/gautam-navlakha-300x187.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 730px) 100vw, 730px" /></h4>
<h4><span style="color: #000080;"><strong>न्यूज डेस्क </strong></span></h4>
<p>अधिकांश लोगों के जेहन में इस समय सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा हैं। लोग उनके बारे में जानना चाह रहे हैं कि उन्होंने ऐसा क्या किया है कि जज उनके मामले की सुनवाई करने को तैयार नहीं है।</p>
<p>बीते चार दिन में उच्चतम न्यायालय के पांच न्यायाधीश सामाजिक कार्यकर्ता गौतल नवलखा की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर चुके हैं।</p>
<p>दरअसल गौतम नवलखा पर भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले के सिलसिले में एफआईआर हुई है।</p>
<p>जस्टिस रवींद्र भट्ट भीमा-कोरेगांव हिंसा के आरोपी नवलखा की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग करने वाले सुप्रीम कोर्ट के पांचवें जज बन गए। गुरुवार को नवलखा की याचिका पर सुनवाई होनी थी।</p>
<p>जस्टिस भट्ट तीन जजों की बेंच के सदस्य थे जिसे याचिका पर सुनवाई करनी थी, लेकिन जैसे ही बेंच के सामने यह मामला आया, जस्टिस रवींद्र भट्ट ने खुद को अलग करने का ऐलान कर दिया।</p>
<p>गौतम ने शीर्ष कोर्ट में याचिका दाखिल कर बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग की है।</p>
<p>पिछले साल पुणे पुलिस ने नक्सलियों से संपर्क और भीमा-कोरेगांव और एल्गार परिषद के मामलों में नवलखा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसे गौतम ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए रद्द करने की मांग की थी।</p>
<p>13 सितंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने नवलखा की याचिका खारिज कर दी थी जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। चूंकि नवलखा की गिरफ्तारी पर अदालत की तरफ से लगी रोक की मियाद आज खत्म हो रही है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट उनके वकील अभिषेक मनु सिंघवी का आग्रह मानते हुए आज याचिका पर सुनवाई को तैयार हो गया।</p>
<p>13 सितंबर को हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद नवलखा ने 30 सितंबर को शीर्ष कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>गौतम की याचिका को पहली बार चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली बेंच में लिस्ट किया गया, लेकिन मुख्य न्यायाधीश इसकी सुनवाई से अलग हो गए। </strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>उसके बाद गौतम की याचिका तीन जजों जस्टिस एन. वी. रमना, जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी और जस्टिस बी. आर. गवई की बेंच के सामने लाया गया लेकिन बेंच के तीनों जज इस याचिका की सुनवाई से अलग हो गए।</strong></span></p>
<p>तीसरी बार फिर नवलखा की याचिका को जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस विनीत सरण और जस्टिस एस. रवींद्र भट्ट की बेंच के सामने पेश किया गया। 3 अक्टूबर को याचिका पर सुनवाई होनी थी, लेकिन ऐन मौके पर जस्टिस रवींद्र भट्ट ने सुनवाई से खुद को अलग करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई से याचिका को अन्य बेंच को सौंपने का आग्रह किया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-130362" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/10/justice-ravindra-navlakha.jpg" alt="" width="569" height="367" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/10/justice-ravindra-navlakha.jpg 360w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/10/justice-ravindra-navlakha-300x193.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 569px) 100vw, 569px" /></p>
<p>गौतम नवलखा की याचिका पर जजों द्वारा खुद को लगातार अलग करते जाना और एक बार तो पूरी बेंच का अलग होना अपने आप में अनोखा है। सबसे बड़ी हैरत की बात यह है कि किसी भी जज ने नवलखा की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग करने का कोई कारण नहीं बताया।</p>
<p>हालांकि, इस मामले में नवलखा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जस्टिस भट्ट कभी बतौर वकील &#8216;पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स&#8217; की तरफ से पेश हुए थे जिससे नवलखा जुड़े हुए हैं। सिंघवी के मुताबिक, संभव है कि इसी कारण जस्टिस भट्ट ने याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।</p>
<h3><strong><span style="color: #800000;">कब अलग होते हैं जज </span></strong></h3>
<p>जज किसी मामले की सुनवाई से तब अलग होते हैं जब हितों के टकराव की स्थिति में या फिर वैसे मामले में जब जज बतौर वकील उस पार्टी की तरफ से कोर्ट में पेश हुए हों और बाद में जज बन गए हों, तभी वो ऐसा करते हैं। इसके कई उदाहरण देखने को मिल चुके हैं।</p>
<p>जस्टिस यू यू ललित ने हाल ही में खुद को अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था, क्योंकि वह बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराने के आरोपी की तरफ से बतौर वकील कोर्ट में पेश हुए थे।</p>
<p>इससे पहले जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने नोवार्टिस केस से खुद को अलग कर लिया था क्योंकि उन्होंने फार्मा पेटेंट्स के ग्रांट पर एक आर्टिकल लिखा था।</p>
<p>वहीं, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एस एच कपाडिय़ा ने माइनिंग कंपनी वेदांता से जुड़े एक केस की सुनवाई से अनिच्छा प्रकट की थी क्योंकि उनके पास कंपनी के कुछ शेयर थे। हालांकि वकीलों ने कहा कि उन्हें सीजेआई वाली बेंच में सुनवाई पर कोई आपत्ति नहीं है।</p>
<p><span style="color: #000080;"><strong> यह भी पढ़ें : <a style="color: #000080;" href="https://www.jubileepost.in/so-what-is-the-danger-in-imrans-chair/">तो क्या खतरें में है इमरान की कुर्सी</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #000080;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #000080;" href="https://www.jubileepost.in/why-pakistans-foreign-minister-was-angry-at-the-anchors-question/">एंकर के सवाल पर क्यों भड़के पाक विदेश मंत्री</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #000080;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #000080;" href="https://www.jubileepost.in/fir-on-celebrities-writing-open-letter-to-modi-on-mob-lynching/">मॉब लिंचिंग पर मोदी को खुला पत्र लिखने वाली हस्तियों पर हुई एफआईआर</a></strong></span></p>
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		<title>सुप्रीम कोर्ट में 4 नए न्यायाधीशों ने ली शपथ</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/4-new-supreme-court-judges-sworn/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ali Raza]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 23 Sep 2019 10:32:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
		<category><![CDATA[Chief Justice Hrishikesh RoyS]]></category>
		<category><![CDATA[Chief Justice Krishna Murari]]></category>
		<category><![CDATA[Chief Justice V. Ramasubramanian]]></category>
		<category><![CDATA[four new judgesKerala High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Ravindra Bhat]]></category>
		<category><![CDATA[supreme court]]></category>
		<category><![CDATA[चीफ जस्टिस रंजन गोगोई]]></category>
		<category><![CDATA[न्यायाधीश]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज़ डेस्क सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को चार नए न्यायाधीशों जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस एस. रवींद्र भट्ट, जस्टिस वी. रामसुब्रमण्यन और जस्टिस ऋषिकेश रॉय ने शपथ ली। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने चारों जजों को शपथ दिलाई। चार न्यायाधीशों की नियुक्ति के साथ ही शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की संख्या 34 हो गई, जो &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-120609 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/sc.jpg" alt="" width="810" height="607" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/sc.jpg 600w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/sc-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 810px) 100vw, 810px" /></p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली न्यूज़ डेस्क</strong></span></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को चार नए न्यायाधीशों जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस एस. रवींद्र भट्ट, जस्टिस वी. रामसुब्रमण्यन और जस्टिस ऋषिकेश रॉय ने शपथ ली। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने चारों जजों को शपथ दिलाई।</p>
<p>चार न्यायाधीशों की नियुक्ति के साथ ही शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की संख्या 34 हो गई, जो कि स्वीकृत संख्या है। न्यायमूर्ति मुरारी पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के, न्यायमूर्ति भट्ट राजस्थान उच्च न्यायालय के, न्यायमूर्ति वी.रामसुब्रमण्यन हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के और न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय केरल उच्च न्यायालय के प्रमुख थे।</p>
<p>केंद्र ने बुधवार को चार उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों के नामों को मंजूरी दी थी। शीर्ष अदालत की कॉलेजियम ने 30 अगस्त को इन नामों की सिफारिश की थी।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #ff0000;" href="https://www.jubileepost.in/terrorist-camp-became-active-again-in-balakot/">बालाकोट में फिर सक्रिय हुआ आतंकी कैंप</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #ff0000;" href="https://www.jubileepost.in/so-is-jharkhand-becoming-a-stronghold-of-mob-linking/">तो क्या मॉब लिंंचिंग का गढ़ बन रहा है झारखंड</a></strong></span></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>क्यों चर्चा में है जस्टिस अकील कुरैशी</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/why-justice-akil-qureshi-is-in-discussion/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 29 Aug 2019 06:38:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
		<category><![CDATA[16 अगस्त को शीर्ष अदालत]]></category>
		<category><![CDATA[उच्च न्यायालयों]]></category>
		<category><![CDATA[उच्चतम न्यायालय]]></category>
		<category><![CDATA[कॉलेजियम]]></category>
		<category><![CDATA[क्यों चर्चा में है जस्टिस अकील कुरैशी]]></category>
		<category><![CDATA[गुजरात हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन]]></category>
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		<category><![CDATA[जुबिली पोस्ट]]></category>
		<category><![CDATA[पीएम मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[मोदी सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम]]></category>
		<category><![CDATA[हिंदी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[हिंदी समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[न्यूज डेस्क बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस अकील कुरैशी  चर्चा में है। कुरैशी  के  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किए जाने में हो रही देरी का मामला एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है। दरअसल केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम की उस फाइल को वापस लौटा दिया है जिसमें जस्टिस &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-124520" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/justice-akeel-kuraisi.jpg" alt="" width="1200" height="630" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/justice-akeel-kuraisi.jpg 1200w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/justice-akeel-kuraisi-300x158.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/justice-akeel-kuraisi-768x403.jpg 768w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/08/justice-akeel-kuraisi-1024x538.jpg 1024w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /><br />
<span style="color: #000080;"><strong>न्यूज डेस्क </strong></span></p>
<p>बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस अकील कुरैशी  चर्चा में है। कुरैशी  के  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किए जाने में हो रही देरी का मामला एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है। दरअसल केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम की उस फाइल को वापस लौटा दिया है जिसमें जस्टिस कुरैशी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई थी।</p>
<p>हालांकि सरकार ने संकेत दिया है कि वह जस्टिस अकील कुरैशी को किसी अन्य हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने के विरुद्ध नहीं है, लेकिन मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के संबंध में भेजी गई फाइल को सरकार ने क्यों लौटा दिया, इसकी वजह नहीं बताई।</p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने 28 अगस्त को कहा कि कानून एवं न्याय मंत्रालय की ओर से उसे जस्टिस कुरैशी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की कॉलेजियम की सिफारिश को लेकर एक पत्र मिला है।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा कि मंत्रालय की ओर से पत्र मिले पर कोई फैसला लेने के लिए इसे कॉलेजियम के सामने रखा जाएगा। इससे पहले केंद्र ने 16 अगस्त को शीर्ष अदालत से कहा था कि वह जस्टिस कुरैशी की नियुक्ति से जुड़ी कॉलेजियम की सिफारिश पर एक सप्ताह के भीतर फैसला लेगा। बाद में उसने फाइल वापस भेज दी।</strong></span></p></blockquote>
<p align="justify">दरअसल, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 10 मई को जस्टिस अकील कुरैशी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाए जाने के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार बताते हुए सिफारिश की थी। हालांकि केंद्र सरकार ने अभी तक सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर अमल नहीं किया है।</p>
<blockquote>
<p align="justify"><span style="color: #ff0000;"><strong>सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अपनी सिफारिश में कहा था कि जस्टिस अकील कुरैशी गुजरात हाई कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायमूर्ति हैं और वर्तमान में तबादले पर बॉम्बे हाई कोर्ट में कार्यरत हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की राय है कि जस्टिस कुरैशी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में नियुक्ति के लिए हर नजरिए से योग्य हैं।&#8217;</strong></span></p>
</blockquote>
<p>वहीं गुजरात हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन (जीएचसीएए) ने इस मामले में उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर कर केंद्र को यह निर्देश देने की अपील की है कि वह जस्टिस कुरैशी की नियुक्ति को अधिसूचित करे। अपनी याचिका में जीएचसीएए ने कहा है कि सरकार अन्य उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायधीशों की नियुक्ति को हरी झंडी दे चुकी है, न्यायमूर्ति कुरैशी के मामले में उसने कॉलेजियम की सिफारिश को अधिसूचित नहीं किया।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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