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	<title>गठबंधन Archives &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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		<title>CM योगी से मिले कैबिनेट मंत्री संजय निषाद, सियासी हलचल</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/cabinet-minister-sanjay-nishad-met-cm-yogi-political-stir-regarding-the-meeting-after-recent-statements/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 05:46:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जुबिली स्पेशल डेस्क लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय बीजेपी और उसकी सहयोगी निषाद पार्टी के रिश्ते चर्चा का विषय बने हुए हैं। इसी बीच रविवार को राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस दौरान उनके बेटे और विधायक अमित &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली स्पेशल डेस्क</strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>लखनऊ।</strong></span> उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय बीजेपी और उसकी सहयोगी निषाद पार्टी के रिश्ते चर्चा का विषय बने हुए हैं। इसी बीच रविवार को राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष <a href="https://www.jubileepost.in/?s=%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%AF+%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A6" target="_blank" rel="noopener"><span style="color: #0000ff;"><strong>संजय निषाद</strong></span></a> ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस दौरान उनके बेटे और विधायक अमित निषाद भी मौजूद रहे।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>आरक्षण और मछुआरों की समस्या पर चर्चा</strong></span></p>
<p>बैठक में संजय निषाद ने अपने समाज के हितों से जुड़े मुद्दों को मुख्यमंत्री के सामने रखा। खास तौर पर निषाद समाज को आरक्षण दिलाने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मछुआरों की समस्या को लेकर उन्होंने विस्तार से चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी मुद्दों के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया और सहयोग का भरोसा भी दिलाया।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>हालिया बयान ने बढ़ाई थी सियासी सरगर्मी</strong></span></p>
<p>गौरतलब है कि कुछ दिन पहले गोरखपुर में आयोजित निषाद पार्टी के कार्यक्रम में संजय निषाद ने खुलकर बीजेपी पर नाराज़गी जताई थी। उन्होंने मंच से यहां तक कह दिया था कि अगर भाजपा को लगता है कि छोटे दलों से कोई फायदा नहीं हो रहा तो गठबंधन तोड़ दे। इस बयान ने गठबंधन की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए थे और सियासी गलियारों में हलचल मचा दी थी।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>ये भी पढ़ें-<a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/up-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%8b-%e0%a4%b9%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%a8%e0%a5%8b-%e0%a4%ab%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%82/">UP में आज से नो हेलमेट नो फ्यूल अभियान, 30 सितंबर तक चलाई जाएगी पहल</a></strong></span></p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-326979" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot-2025-09-01-111354-e1756705457795.png" alt="" width="600" height="345" /></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>बीजेपी नेताओं की सक्रियता</strong></span></p>
<p>संजय निषाद के इस बयान के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने उनसे फोन पर बात कर मामला शांत करने की कोशिश की थी। इसके अलावा बीते गुरुवार को संजय निषाद की मुलाकात डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से भी हुई थी। इन मुलाकातों से संकेत मिल रहे हैं कि बीजेपी और निषाद पार्टी के बीच चल रही तनातनी को सुलझाने की कोशिशें जारी हैं।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>संजय निषाद ने बैठक को बताया शिष्टाचार भेंट</strong></span></p>
<p>मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात के बाद संजय निषाद ने इसे शिष्टाचार भेंट करार दिया। उन्होंने कहा कि समाज के मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई है और सरकार सकारात्मक रुख रखती है। वहीं, सूत्रों का मानना है कि इस बैठक से बीजेपी और निषाद पार्टी के बीच की खटास को कम करने में मदद मिलेगी।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>गठबंधन पर टिकी निगाहें</strong></span></p>
<p>हालांकि संजय निषाद के हालिया बयान और नाराज़गी के बाद सवाल उठने लगे हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और निषाद पार्टी का रिश्ता किस रूप में आगे बढ़ेगा। संजय निषाद ने अपने बयान में साफ कहा था कि “हमें भीख मांगने की ज़रूरत नहीं है, अब देखते हैं आगे क्या होता है।”</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भारतीय राजनीति में दल बदल:</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/defection-in-indian-politics/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Supriya Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 May 2024 07:47:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[जुबिली डिबेट]]></category>
		<category><![CDATA[गठबंधन]]></category>
		<category><![CDATA[चुनाव]]></category>
		<category><![CDATA[दल बदल]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[मतदाताओं]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रो. अशोक कुमार दल बदल, जिसे राजनीतिक दल-बदल भी कहा जाता है, एक ऐसी प्रथा है जिसमें कोई निर्वाचित प्रतिनिधि उस राजनीतिक दल को छोड़ देता है जिसके टिकट पर वह चुनाव जीता था और दूसरे दल में शामिल हो जाता है। इतिहास: भारत में दल बदल की प्रथा स्वतंत्रता से पहले से ही मौजूद &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft wp-image-255801 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/ashok-kumar-vc-300x259.jpg" alt="" width="154" height="133" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/ashok-kumar-vc-300x259.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/ashok-kumar-vc.jpg 545w" sizes="auto, (max-width: 154px) 100vw, 154px" /></p>
<p><strong><span style="color: #0000ff">प्रो. अशोक कुमार</span></strong></p>
<p>दल बदल, जिसे राजनीतिक दल-बदल भी कहा जाता है, एक ऐसी प्रथा है जिसमें कोई निर्वाचित प्रतिनिधि उस राजनीतिक दल को छोड़ देता है जिसके टिकट पर वह चुनाव जीता था और दूसरे दल में शामिल हो जाता है।</p>
<h3><span style="color: #0000ff"><strong>इतिहास:</strong></span></h3>
<p>भारत में दल बदल की प्रथा स्वतंत्रता से पहले से ही मौजूद थी, लेकिन 1960 के दशक में गठबंधन सरकारों के उदय के साथ यह अधिक आम हो गई। 1980 के दशक में, दल बदल ने भारतीय राजनीति में अस्थिरता पैदा कर दी, जिसके कारण अक्सर सरकारें गिर जाती थीं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-300107 size-large" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2024/05/20_11_2023-indian_politics_1200_23585346-1024x576.webp" alt="" width="618" height="348" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2024/05/20_11_2023-indian_politics_1200_23585346-1024x576.webp 1024w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2024/05/20_11_2023-indian_politics_1200_23585346-300x169.webp 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2024/05/20_11_2023-indian_politics_1200_23585346-768x432.webp 768w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2024/05/20_11_2023-indian_politics_1200_23585346.webp 1200w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /></p>
<h3><strong><span style="color: #0000ff">दल बदल विरोधी कानून:</span></strong></h3>
<p>1985 में, दल बदल को रोकने के लिए 52वें संविधान संशोधन के माध्यम से दसवीं अनुसूची को संविधान में जोड़ा गया। इस कानून के तहत, यदि कोई निर्वाचित प्रतिनिधि दल बदल करता है, तो उसे अपनी सीट से अयोग्य घोषित किया जा सकता है और उसे अगले कुछ वर्षों तक चुनाव लड़ने से वंचित किया जा सकता है।</p>
<p><strong>दल बदल के कारण:</strong> दल बदल के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:</p>
<p><strong>वैचारिक मतभेद:</strong> कभी-कभी, निर्वाचित प्रतिनिधि उस राजनीतिक दल की विचारधारा से सहमत नहीं रह जाते हैं जिसके टिकट पर उन्होंने चुनाव लड़ा था।</p>
<p><strong>राजनीतिक महत्वाकांक्षा:</strong> कुछ निर्वाचित प्रतिनिधि अधिक शक्ति या पद प्राप्त करने के लिए दल बदलते हैं।</p>
<p><strong>पैसे या अन्य प्रलोभन:</strong> कभी-कभी, निर्वाचित प्रतिनिधियों को दूसरे दल में शामिल होने के लिए रिश्वत या अन्य प्रलोभन दिए जाते हैं।</p>
<p><strong>विरोधी दल द्वारा दबाव:</strong> विरोधी दल कभी-कभी सत्ताधारी दल के सदस्यों को दल बदलने के लिए धमकाते हैं या उन्हें मनाते हैं।</p>
<p><strong>दल बदल के प्रभाव:</strong> दल बदल के कई नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:</p>
<p><strong>राजनीतिक अस्थिरता:</strong> दल बदल से सरकारें गिर सकती हैं और राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो सकती है।</p>
<p><strong>मतदाताओं का विश्वास कम होना:</strong> दल बदल से मतदाताओं का राजनीतिक दलों और नेताओं पर विश्वास कम हो सकता है।</p>
<p><strong>राजनीतिक भ्रष्टाचार:</strong> दल बदल से राजनीतिक भ्रष्टाचार बढ़ सकता है, क्योंकि निर्वाचित प्रतिनिधि अक्सर अपने निजी लाभ के लिए दल बदलते हैं।</p>
<p><strong>नीतिगत निष्क्रियता:</strong> दल बदल से नीतिगत निष्क्रियता पैदा हो सकती है, क्योंकि सरकारें अक्सर राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रही होती हैं।</p>
<p><strong>दल बदल को रोकने के उपाय:</strong> दल बदल को रोकने के लिए कई उपाय किए जा सकते हैं, जिनमें शामिल हैं।</p>
<p><strong>दल बदल विरोधी कानून को मजबूत करना:</strong> दल बदल  विरोधी कानून को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है ताकि दल बदल को रोकने में अधिक प्रभावी हो सके।</p>
<h3><strong><span style="color: #0000ff">राजनीतिक दलों के बीच आंतरिक लोकतंत्र को बढ़ावा देना: </span></strong></h3>
<p>राजनीतिक दलों के बीच आंतरिक लोकतंत्र को बढ़ावा देने से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि निर्वाचित प्रतिनिधि दल के नेतृत्व और सदस्यों के साथ सहमत हों।</p>
<p><strong><span style="color: #000000">मतदाताओं में जागरूकता पैदा करना:</span></strong> मतदाताओं में जागरूकता पैदा करने से उन्हें उन उम्मीदवारों को चुनने में मदद मिलेगी जो दल बदल की संभावना कम रखते हैं।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000"><strong>दल बदल क़ानून में संशोधन के लिए एक सुझाव- “ आचार संहिता लागू होने के बाद से चुनाव परिणाम तक “दल बदल “ अवैध माना जाएगा ।</strong></span></p></blockquote>
<h3><span style="color: #0000ff">निष्कर्ष:</span></h3>
<p>दल बदल भारत में एक गंभीर समस्या है जिसके कई नकारात्मक प्रभाव हैं। दल बदल को रोकने के लिए कई उपाय किए जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए राजनीतिक दलों, चुनाव आयोग और नागरिकों की ओर से एक ठोस प्रयास की आवश्यकता होगी।</p>
<p><span style="color: #0000ff"><strong>(पूर्व कुलपति कानपुर, गोरखपुर विश्वविद्यालय)</strong></span></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सपा और रालोद में टूटा गठबंधन! सपा नेताओं ने दिए संकेत</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/alliance-broken-in-up-sp-leaders-gave-indications/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Supriya Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 08 Feb 2024 07:43:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गठबंधन]]></category>
		<category><![CDATA[जयंत चौधरी]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय जनता पार्टी]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज डेस्क उत्तर प्रदेश में सपा और रालोद का गठबंधन लगभग टूट गया है. समाजवादी पार्टी के साथ अलायंस में रहे राष्ट्रीय लोकदल ने भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के साथ जाने का पूरा मन बना लिया है. यह दावा सपा सूत्रों ने किया है. समाजवादी पार्टी के उच्च सूत्रों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>जुबिली न्यूज डेस्क</strong></p>



<p>उत्तर प्रदेश में सपा और रालोद का गठबंधन लगभग टूट गया है. समाजवादी पार्टी के साथ अलायंस में रहे राष्ट्रीय लोकदल ने भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के साथ जाने का पूरा मन बना लिया है. यह दावा सपा सूत्रों ने किया है. समाजवादी पार्टी के उच्च सूत्रों के मुताबिक जयंत चौधरी जल्द  एनडीए गठबंधन का हिस्सा होंगे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="784" height="450" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2024/02/alsa_643e32175442a.png" alt="" class="wp-image-294618" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2024/02/alsa_643e32175442a.png 784w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2024/02/alsa_643e32175442a-300x172.png 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2024/02/alsa_643e32175442a-768x441.png 768w" sizes="auto, (max-width: 784px) 100vw, 784px" /></figure>



<p></p>



<p>सीटों के बंटवारे और प्रत्याशियों के चयन पर सपा के साथ बात बिगड़ जाने के बाद रालोद की एनडीए में जाने की चर्चा ने जोर पकड़ा है. इस समय पश्चिमी यूपी में जयंत की पकड़ कुछ सीटों पर ठीक-ठाक मानी जाती है. वे जिस भी गठबंधन में जायेंगे, उसका पड़ला भारी रहने का अनुमान है. इसी वजह से उनका किसी भी गठबंधन में शामिल होना काफी अहम है.</p>



<p>हालांकि सूत्रों की माने तो जयंत चौधरी की पार्टी बीजेपी के साथ गठबंधन पर बात कर रही है. दोनों के बीच मुजफ्फरनगर सीट को लेकर मामला फंसा हुआ है.&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सपा और आरएलडी में गठबंधन हुआ फाइनल, जानिए यूपी में कितने सीटों पर चुनाव लड़ेगी RLD</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/alliance-finalized-between-sp-and-rld-know-how-many-seats-rld-will-contest-in-up/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Supriya Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Jan 2024 10:23:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[आरएलडी]]></category>
		<category><![CDATA[गठबंधन]]></category>
		<category><![CDATA[सपा]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज डेस्क उत्तर प्रदेश में आगामी लोकसभा चुनाव  मद्देनजर समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच सीटों को लेकर  सहमति बन गई है. सूत्रों के अनुसार RLD 7 से 8 सीटों पर गठबंधन में लड़ेगी. ज्यादातर पश्चिमी यूपी की सीटों पर आरएलडी के साथ सहमति बन गई है. सपा RLD के सूत्रों के हवाले से बड़ी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-vivid-cyan-blue-color has-text-color has-link-color wp-elements-c3237c125996f708014aa4e93916ae16"><strong>जुबिली न्यूज डेस्क</strong></p>



<p>उत्तर प्रदेश में आगामी लोकसभा चुनाव  मद्देनजर समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच सीटों को लेकर  सहमति बन गई है. सूत्रों के अनुसार RLD 7 से 8 सीटों पर गठबंधन में लड़ेगी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="766" height="476" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2024/01/Capture-8.jpg" alt="" class="wp-image-293408" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2024/01/Capture-8.jpg 766w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2024/01/Capture-8-300x186.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 766px) 100vw, 766px" /></figure>



<p>ज्यादातर पश्चिमी यूपी की सीटों पर आरएलडी के साथ सहमति बन गई है. सपा RLD के सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और आरएलडी अध्यक्ष जयंत चौधरी के बीच बातचीत के बाद सहमति हो गई है. आज से कल तक गठबंधन की ओर से आधिकारिक ऐलान हो सकता है.</p>



<p>वहीं कांग्रेस के साथ सपा ने अभी तक सीटें फाइनल नहीं कीहैं. सपा और कांग्रेस के बीच सीटों पर फाइनल बंटवारा अभी नहीं हुआ है.</p>



<p>जानकारी के मुताबिक समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच 2024 के लोकसभा चुनाव हेतु समझौता तय राष्ट्रीय लोकदल के लिये समाजवादी पार्टी ने 7 लोकसभा सीटें छोड़ी हैं. राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल दुबे ने समझौते की पुष्टि करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव व राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह की मुलाकात के बाद &nbsp;समझौता तय हुआ.</p>



<p>हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि रालोद के लिए सपा ने कौन सी सीटें छोड़ीं हैं. इससे पहले सपा नेता अखिलेश यादव और रालोद नेता जयंत चौधरी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट किया. एक ओर जहां अखिलेश यादव ने लिखा कि राष्ट्रीय लोक दल और सपा के गठबंधन की सभी को बधाई! जीत के लिए सभी एकजुट हो जाएं, जुट जाएं!. </p>



<p>वहीं रालोद नेता ने अखिलेश की पोस्ट पर जवाब देते हुए लिखा- राष्ट्रीय, संवैधानिक मूल्यों के रक्षा के लिए सदैव तत्पर, हमारे गठबंधन के सभी कार्यकर्ताओं से उम्मीद है, अपने क्षेत्र के विकास और ख़ुशहाली के लिए कदम मिलाकर आगे बढ़ें!</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पश्चिम बंगाल में 2 सीटें ऑफर किए जाने पर भड़के अधीर रंजन चौधरी, कहा-ममता से हमने भीख नहीं मांगी</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/adhir-ranjan-chaudhary-got-angry-on-being-offered-2-seats-in-west/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Supriya Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Jan 2024 10:41:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
		<category><![CDATA[गठबंधन]]></category>
		<category><![CDATA[पश्चिम बंगाल]]></category>
		<category><![CDATA[ममता बनर्जी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.jubileepost.in/?p=292506</guid>

					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज डेस्क इंडिया ब्लॉक में सीट शेयरिंग पर सामंजस्य से पहले ही विवाद की खबरें निकलकर आने लगी हैं. पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने सीधे टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी पर जमकर निशाना साधा है. यहां तक कह दिया कि ममता बनर्जी अलायंस ही नहीं चाहती हैं. वो मोदी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-vivid-cyan-blue-color has-text-color has-link-color wp-elements-c3237c125996f708014aa4e93916ae16"><strong>जुबिली न्यूज डेस्क</strong></p>



<p>इंडिया ब्लॉक में सीट शेयरिंग पर सामंजस्य से पहले ही विवाद की खबरें निकलकर आने लगी हैं. पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने सीधे टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी पर जमकर निशाना साधा है. यहां तक कह दिया कि ममता बनर्जी अलायंस ही नहीं चाहती हैं. वो मोदी की सेवा में लगी हुई हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="640" height="420" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2024/01/2023_9image_00_07_42403440800.jpg" alt="" class="wp-image-292507" style="width:840px;height:auto" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2024/01/2023_9image_00_07_42403440800.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2024/01/2023_9image_00_07_42403440800-300x197.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></figure>



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<p>दरअसल, बुधवार को सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया था कि तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में अलायंस में सहयोगी कांग्रेस को सिर्फ दो लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की कोशिश की है. सूत्रों ने यह भी बताया था कि चूंकि 2019 के चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने राज्य में 43 प्रतिशत वोट हासिल किए थे और 22 सीटें जीती थीं. ऐसे में टीएमसी चाहती है कि बंगाल में वो प्रमुख पार्टी है और उसे सीट बंटवारे पर अंतिम फैसला लेने का अधिकार दिया जाना चाहिए.</p>



<p>गुरुवार को टीएमसी के इस फॉर्मूले पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है. प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा, पता नहीं किसने ममता से भीख मांगी है. हमने तो कोई भीख नहीं मांगी. ममता खुद ही कह रही हैं कि वो गठबंधन चाहती हैं. हमें ममता की दया की कोई जरूरत नहीं है. हम अपने दम पर चुनाव लड़ सकते हैं.&nbsp;</p>



<p class="has-vivid-cyan-blue-color has-text-color has-link-color has-medium-font-size wp-elements-b677ce773355dd55e342e6e8b9208033"><strong>&#8216;पिछले चुनाव नतीजे के आधार पर सीट फॉर्मूला&#8217;</strong></p>



<p>सूत्रों का कहना है कि सीट बंटवारे की संख्या एक स्पष्ट फॉर्मूले पर आधारित है, जिसमें संसदीय चुनाव और राज्य विधानसभा चुनाव का आकलन शामिल है. पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने सभी 42 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा और सिर्फ दो सीटें मालदा दक्षिण और बरहामपुर जीत सकी थी. सबसे पुरानी पार्टी को सिर्फ 5.67 प्रतिशत वोट मिले, जो सीपीआई (एम) से भी कम है. सीपीआई (एम) को 6.33 प्रतिशत वोट मिले थे.</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color has-link-color wp-elements-b38ea35182aee552ee8417e325224dbf"><strong>ये भी पढ़ें-<a href="https://www.jubileepost.in/ram-mandir-news-no-one-needs-invitation-to-go-to-ayodhya-uddhav-thackerays-attack-on-bjp/">अयोध्या का निमंत्रण न मिलने पर क्या बोले उद्धव?</a></strong></p>



<p class="has-vivid-cyan-blue-color has-text-color has-link-color has-medium-font-size wp-elements-40585ab8f166fe7d331d51947ef74359"><strong>&#8216;खड़गे को विपक्ष का&nbsp;पीएम फेस बनाना चाहती हैं ममता&#8217;</strong></p>



<p>इससे पहले 19 दिसंबर को दिल्ली में इंडिया अलायंस की चौथी बैठक हुई थी. उसमें टीएमसी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को इंडिया ब्लॉक को पीएम फेस बनाए जाने का प्रस्ताव रखा था. AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने समर्थन किया था. हालांकि, यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका. सूत्रों ने बताया कि टीएमसी का मानना ​​है कि दलित समुदाय से आने वाले खड़गे बेहतर विकल्प हैं. वे 58 सीटों पर प्रभाव डाल सकते हैं.&nbsp;</p>
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