शिगेलोसिस संक्रमण को लेकर केरल में हड़कंप, जानें लक्षण और बचाव के तरीके

तिरुवनंतपुरम: केरल में शिगेलोसिस (Shigellosis) संक्रमण के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के कई जिलों से मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर है। इस बीच, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan ने संक्रमण की रोकथाम के लिए सरकार से युद्धस्तर पर कदम उठाने की मांग की है।
विजयन ने कहा कि शिगेलोसिस के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय निकायों को मिलकर व्यापक रोकथाम अभियान चलाना चाहिए। उन्होंने पेयजल स्रोतों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, स्वच्छता अभियान तेज करने और लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया।
वायनाड के स्कूल में मिले दो संक्रमित बच्चे
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, Wayanad के एक स्कूल में दो बच्चों में शिगेलोसिस संक्रमण की पुष्टि हुई है। संक्रमित बच्चों में साढ़े चार साल का एक लड़का और पांच साल की एक लड़की शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि अब तक 339 लोगों में संक्रमण जैसे लक्षण पाए गए हैं। इनमें से 21 मरीजों का इलाज अस्पताल में चल रहा है, जबकि 38 अन्य निजी अस्पतालों में भर्ती हैं। राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी भी मरीज की हालत गंभीर नहीं बताई गई है।
क्या है शिगेलोसिस?
शिगेलोसिस एक अत्यधिक संक्रामक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो शिगेला (Shigella) बैक्टीरिया के कारण होता है। यह आंतों को प्रभावित करता है और गंभीर दस्त, पेट दर्द तथा बुखार जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
यह संक्रमण खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए अधिक खतरनाक माना जाता है।
शिगेलोसिस के प्रमुख लक्षण
- बार-बार दस्त आना (कई मामलों में खूनी दस्त)
- तेज बुखार
- पेट में ऐंठन और दर्द
- उल्टी और मतली
- कमजोरी और डिहाइड्रेशन
- भूख में कमी
विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रमण के लक्षण बैक्टीरिया के संपर्क में आने के 1 से 2 दिन बाद दिखाई दे सकते हैं और आमतौर पर 5 से 7 दिनों तक बने रहते हैं।
कैसे फैलता है संक्रमण?
शिगेलोसिस मुख्य रूप से दूषित पानी, संक्रमित भोजन और गंदे हाथों के जरिए फैलता है। खराब स्वच्छता वाले क्षेत्रों, डे-केयर सेंटर, नर्सिंग होम और भीड़भाड़ वाली जगहों पर इसके फैलने का खतरा अधिक रहता है।
संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने या दूषित सतहों को छूने के बाद बिना हाथ धोए भोजन करने से भी संक्रमण फैल सकता है।
शिगेलोसिस से बचाव के उपाय
- साबुन और पानी से नियमित रूप से हाथ धोएं।
- केवल साफ और उबला हुआ पानी पिएं।
- फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाएं।
- खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचें।
- बच्चों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें।
- लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
बच्चों पर सबसे ज्यादा खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शिगेलोसिस का खतरा बच्चों में अधिक होता है। संक्रमण के कारण शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है, जिससे स्थिति गंभीर बन सकती है। ऐसे में माता-पिता को बच्चों में दस्त, बुखार या कमजोरी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।



