ईरान-अमेरिका संघर्ष: इस्लामाबाद शांति वार्ता पर संकट, ट्रंप की घेराबंदी के आगे झुकने को तैयार नहीं तेहरान

इस्लामाबाद/वॉशिंगटन। मध्य पूर्व में युद्ध के बादलों को छाँटने के उद्देश्य से पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली दूसरे दौर की शांति वार्ता अधर में लटकती नजर आ रही है। मंगलवार (21 अप्रैल) को प्रस्तावित इस बैठक के लिए जहाँ अमेरिका ने अपने उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की घोषणा कर दी है, वहीं ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है।
ईरान की दो टूक: “घेराबंदी खत्म हो, तभी होगी बात”
ईरानी न्यूज़ एजेंसी ‘तस्नीम’ के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह फिलहाल पाकिस्तान कोई प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजेगा। ईरान का रुख पूरी तरह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी पर टिका है।
- ईरान की शर्त: तेहरान का कहना है कि जब तक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी, तब तक बातचीत की मेज पर बैठने का कोई औचित्य नहीं है।
- तनाव का केंद्र: हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी को ईरान अपनी संप्रभुता और आर्थिक हितों पर सीधा हमला मान रहा है।
ट्रंप का ‘पावर डेलीगेशन’: कुशनर और विटकॉफ संभालेंगे कमान
दूसरी ओर, वाशिंगटन ने इस वार्ता को लेकर अपनी गंभीरता दिखाई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि अमेरिकी दल का नेतृत्व शांति मिशन के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ करेंगे।
- खास चेहरा: इस मिशन में ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर की मौजूदगी ने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। कुशनर की मध्य पूर्व कूटनीति में पहले भी सक्रिय भूमिका रही है, जिससे इस दौरे का महत्व बढ़ गया है।
इस्लामाबाद वार्ता का भविष्य?
पाकिस्तान इस महत्वपूर्ण शांति प्रक्रिया की मेजबानी कर रहा है, लेकिन ईरान के इनकार के बाद अब गेंद अमेरिका के पाले में है। कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या अमेरिका नाकेबंदी में ढील देकर ईरान को मेज पर लाएगा, या फिर यह गतिरोध किसी नए सैन्य संघर्ष को जन्म देगा।


