Ujjwala Yojana: उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को तगड़ा झटका! अब 9 नहीं, साल में सिर्फ इतने सिलेंडरों पर मिलेगी ₹300 सब्सिडी

जुबिली स्पेशल डेस्क
नई दिल्ली। घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर के दाम बढ़ने के बाद अब मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ (PMUY) के लाभार्थियों के लिए एक बेहद बुरी खबर आ रही है। तेल वितरण कंपनियों (OMCs) ने उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले रियायती (सब्सिडी वाले) सिलेंडरों की संख्या में भारी कटौती कर दी है।
नए नियमों के मुताबिक, अब लाभार्थियों को साल भर में 9 सिलेंडरों की जगह सिर्फ 4 सिलेंडरों पर ही सब्सिडी दी जाएगी। यानी पांचवां सिलेंडर लेते ही आपको बाजार की पूरी कीमत चुकानी होगी।
नया नियम: जानिए अब कैसे मिलेगी ₹300 की सब्सिडी?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार:
- पहले 4 रिफिल पर राहत: उज्ज्वला योजना के उपभोक्ताओं को साल के पहले 4 सिलेंडरों की बुकिंग पर प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी मिलती रहेगी।
- डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT): यह सब्सिडी राशि हमेशा की तरह सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।
- 5वें सिलेंडर से ‘नो सब्सिडी’: जैसे ही कोई परिवार साल का 5वां या उससे अधिक सिलेंडर बुक करेगा, उसे बिना किसी सरकारी छूट के पूरी मार्केट प्राइस चुकानी होगी।
सरकार का तर्क: मंत्रालय का मानना है कि उज्ज्वला योजना वाले एक ग्रामीण व गरीब परिवार में औसतन साल भर में लगभग 4 सिलेंडरों की ही खपत होती है। इसी डेटा को आधार बनाकर यह फैसला लिया गया है।
12 से घटकर 4 पर सिमटी संख्या: यहाँ देखें पूरा सफर
मई 2016 में पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई इस योजना में समय-समय पर सिलेंडरों की संख्या घटाई गई है:
| दौर (Timeline) | सब्सिडी वाले सिलेंडरों की सालाना संख्या |
| शुरुआती दिन (2016) | 12 सिलेंडर (14.2 किलोग्राम वाले) |
| दूसरा चरण | घटाकर 9 सिलेंडर किए गए |
| अब (नया नियम 2026) | घटाकर सिर्फ 4 सिलेंडर कर दिए गए |
महंगाई की दोहरी मार: हाल ही में महंगे हुए हैं दाम
उज्ज्वला योजना में यह कटौती ऐसे समय पर की गई है जब आम जनता पहले से ही रसोई गैस की महंगाई से जूझ रही है। बीते 7 जून को ही तेल कंपनियों ने घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में 29 रुपये की बढ़ोतरी की थी। कंपनियों का कहना था कि उन्हें हो रहे भारी नुकसान (Under-recovery) की भरपाई के लिए कीमतों को बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया था। अब सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या घटने से गरीब परिवारों का बजट पूरी तरह गड़बड़ाने की आशंका है।


